फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   possible deal behind quami ekta dal leader mukhtar ansari and congress candidate ajay ray

मुख्तार अंसारी और अजय राय की दोस्ती के पीछे है ये डील!

Wed, 30 Apr 2014 06:14 PM IST
Updated Wed, 30 Apr 2014 06:14 PM IST
विज्ञापन
possible deal behind quami ekta dal leader mukhtar ansari and congress candidate ajay ray

मुख्तार अंसारी और अजय राय की दोस्ती से सभी भौचक हैं। बहुतों का ये 'सौहार्द्र' हजम नहीं हो रहा है। पूर्वांचल में कइयों की जुबान पर ये जुमला है- सियासत जो न करवा दे।

विज्ञापन


कौमी एकता दल का दावा है कि वाराणसी में कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय का समर्थन सांप्रदायिक शक्तियों को हराने के लिए किया गया है। उन्होंने समर्थन के एवज में किसी 'डील' से भी इनकार किया है। कौमी एकता दल अध्यक्ष अफजाल अंसारी ने मंगलवार को कहा कि वाराणसी को बचाने के लिए आगे आना जरूरी था। कांग्रेस को समर्थन का मकसद यही है।
विज्ञापन


क्या कौएद का मकसद उतना ही जितना वह दावा कर रही है? कम से कम पूर्वांचल की राजनीति को करीब से देखने वाले तो ये नहीं मानते।

समर्थन देकर क्या पाना चाहती है कौएद?

possible deal behind quami ekta dal leader mukhtar ansari and congress candidate ajay ray

कौमी एकता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष अफजाल अंसारी ने मंगलवार को कहा था कि वाराणसी में सांप्रदायिक ताकतों को हराने के लिए आगे आना जरूरी था। अजय राय और हमारे बीच जो भी है वो व्यक्तिगत है। इसका पार्टी और चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है।

हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का दावा है कि ये दोस्ती वाराणसी तक ही सीमित रहने वाली नहीं है।

पूर्वांचल की दूसरी सीटों विशेषकर बलिया और घोसी में भी इसका प्रभाव दिखेगा। दरअसल कौमी एकता दल ने समर्थन के जरिए दिया कम और लिया ज्यादा है।

भूमिहार वोटरों को लुभाने की योजना तो नहीं!

possible deal behind quami ekta dal leader mukhtar ansari and congress candidate ajay ray

राजनीतिक विश्लेषकों का दावा है कि अफजाल अंसारी और मुख्तार अंसारी ने 'देना कम और लेना ज्यादा' की नीति पर काम करते हुए वाराणसी में अजय राय का समर्थन किया है।

लोकसभा चुनावों में अफजाल अंसारी बलिया से और मुख्तार अंसारी घोसी से चुनाव लड़ रहे हैं। दोनों सीटों पर बड़ी संख्या में भूमिहार वोटर हैं। अजय राय पूर्वांचल में भूमिहार नेता के रूप में जाने जाते हैं।

अजय राय के सम‌र्थन के जर‌िए अंसारी बंधुओं ने भूमिहार वोटरों को ही अपने खेमे में लाने की कोशिश की है।

विज्ञापन

पिछले चुनाव में हार गए थे अफजाल और मुख्तार

possible deal behind quami ekta dal leader mukhtar ansari and congress candidate ajay ray

पिछले लोकसभा चुनाव में अफजाल अंसारी ने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर गाजीपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा ‌था, जबकि मुख्तार अंसारी वाराणसी लोकसभा सीट से प्रत्याशी थे।

बसपा के समर्थन के बाद भी दोनों भाई हार गए थे। हालांकि दोनो ही सीटों पर विजेता प्रत्याशियों को उन्होंने कांटें की टक्‍कर दी थी। वाराणसी में भाजपा प्रत्याशी मुरली मनोहर जोशी महज 17,211 वोटों से ही चुनाव जीत पाए ‌थे।

उन्हें 2,03,122 वोट मिले थे, जबकि दूसरे पायदान पर रहे मुख्तार अंसारी को 1,85,911 वोट मिले थे। अफजाल अंसारी को समाजवादी पार्टी प्रत्याशी राधेमोहन सिंह ने हराया था।

बलिया और घोसी सीटों पर हो सकता है फायदा

possible deal behind quami ekta dal leader mukhtar ansari and congress candidate ajay ray

अजय राय के समर्थन के बाद बलिया और घोसी की सीटों पर अंसारी बंधुओं का फायदा हो सकता है। बलिया लोकसभा सीट में दो विधानसभाएं जहुराबाद और मोहम्‍मदाबाद गाजीपुर जिले की हैं।

ये विधानसभाएं भूमिहार बहुल है, माना जा रहा है अजय राय को साथ मिलने के बाद अंसारी बंधु वहां भूमिहार वोटरों को लुभाने में कामयाब हो सकते हैं।

घोसी सीट पर बड़ी संख्या में भूमिहार वोटर हैं, जिनका फायदा मुख्तार अंसारी को मिल सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed