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गरीब कामगारों को मोदी सरकार दे सकती है ये तोहफा

Tue, 23 Dec 2014 11:42 AM IST
Updated Tue, 23 Dec 2014 11:42 AM IST
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Poor workers may Free from the PF contribution.

कम पगार पाने वाले कर्मचारियों को भविष्य निधि (पीएफ) जमा किए बगैर आर्थिक सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल सकेगा।

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उन्हें पीएफ अंशदान से छूट मिल सकती है। निर्माण कार्य, बुनकर या फिर ऐसे किसी काम में जुटे कामगार जिनका मासिक वेतन कम होने के कारण वे पीएफ जमा कराने में सक्षम नहीं हैं, सरकार उनके लिए विशेष प्रावधान लाने का निर्णय ले चुकी है।

वहीं न्यूनतम दस कर्मचारी वाले संस्थानों या कंपनियों का ईपीएफओ के दायरे में आना अनिवार्य होगा। भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम (एम्प्लॉयज प्रोविडेंट फंड एंड मिसलेनियस प्रोविजन एक्ट) 1952 में संशोधन कर केंद्र इसे साकार करने की तैयारी में है।
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प्रस्तावित संशोधन से पहली बार सरकार को यह शक्ति हासिल होगी कि वह कुछ श्रेणियों में गरीब कामगारों का अंशदान कम कर सकती है। यानी कर्मचारी को नियोक्ता के बराबर अंशदान करने की जरूरत नहीं होगी। उनकी सुविधा के अनुसार पीएफ अंशदान की राशि तय होगी।
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पीएफ अंशदान से कामगारों को छूट का अधिकार

Poor workers may Free from the PF contribution.

यह भी संभव है कि केवल नियोक्ता के अंशदान से उन्हें पीएफ जमा का लाभ मिल सकेगा। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पुराने कानून के सेक्शन 6 में संशोधन कर सभी छोटे और कम वेतन पाने वाले कामगारों को पीएफ लाभ देने का निर्णय लिया गया है।

दूसरी ओर श्रम मंत्रालय की ओर से कानून संशोधन के प्रस्तावित मसौदे में पहली बार कर्मचारी भविष्य निधि संगठन को शामिल किया गया है। इससे पहले इस संगठन की संरचना के बारे में कोई जिक्र कानून में नहीं किया गया था।

महत्वपूर्ण यह है कि अब प्रत्येक पेशे और प्रत्येक वर्ग के कर्मचारी को पीएफ लाभ देने का रास्ता भी इसी कानून में संशोधन से खुलने वाला है। जबकि कर्मचारी, मजदूरी, मजदूरी सीमा, वैकल्पिक अंशदान जैसे शब्दों को भी नए सिरे से पारिभाषित किया जाएगा।

गौरतलब है कि पीएफ के दायरे में गरीब कामगारों को लाने और पुराने कानून में संशोधन को लेकर कई दफा सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय भी सवाल खड़े कर चुकी है, जिसे संज्ञान में लेकर सरकार ने कानून संशोधन का निर्णय लिया है।

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