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गम और गुस्से के बीच सरबजीत पर सियासत

Sat, 04 May 2013 12:30 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Sat, 04 May 2013 12:30 AM IST
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politics over sarabjit death

सरबजीत की निर्मम हत्या के मामले में एक ओर जहां देश गम और गुस्से में है, वहीं इस मामले में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी जुबानी जंग और आरोपों-प्रत्यारोपों की झड़ी लग गई है।

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राजग के सांसदों ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात कर पूरे मामले में सरकार पर हाथ पर हाथ धरे रहने का आरोप लगाते हुए माफी की मांग की है।

जवाब में सरकार ने पलटवार करते हुए पूछा है कि एनडीए सरकार के कार्यकाल में सरबजीत को छुड़ाने की एक भी कोशिश क्यों नहीं हुई।

साथ ही सरकार ने पाकिस्तान से सभी संबंध तोड़ने की विपक्ष की मांग को सिरे से खारिज कर दिया।

शुक्रवार को चीनी घुसपैठ के मामले में राष्ट्रपति से सांसदों की मुलाकात के बाद से ही सरकार और विपक्ष के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई।

भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने सरबजीत को बचा पाने में विफल रहने पर सरकार से सफाई देने और माफी मांगने की मांग की।

उन्होंने कहा कि बेहद खेदजनक है कि सरकार और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने न तो इस मामले में ठोस कार्रवाई की और न ही इस पर लगातार नजर रखा।

इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान से साथ शांति वार्ता पर भी सवालिया निशान लगाए। शिवसेना ने इस मुद्दे पर पाकिस्तान से सभी संबंध तोड़ लेने की मांग की।

इस पर तत्काल पलटवार करते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने पूछा कि आखिर एनडीए सरकार के कार्यकाल में सरबजीत को छुड़ाने के लिए एक भी प्रयास क्यों नहीं हुए।
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उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल के दौरान इस मामले में लगातार चुप्पी साधे रहने के लिए भाजपा को देश से माफी मांगनी चाहिए। इसके साथ ही सरकार ने पाकिस्तान से संबंध तोड़ने की मांग को भी खारिज कर दिया।
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दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि महज एक मामले में पाकिस्तान से सारे संबंध तोड़ लेना उचित फैसला नहीं माना जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे भारत क्या हासिल होगा।

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