फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   politics of ban india

पीएम मोदी के राज में बैनिस्तान की राह पर है हिंदुस्तान?

Sat, 19 Sep 2015 07:54 PM IST
Updated Sat, 19 Sep 2015 07:54 PM IST
विज्ञापन
politics of ban india

26 मई 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भारत में 30 साल बाद किसी एक दल की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनी थी। इस दौरान मोदी सरकार ने 'मेक इन इंडिया', 'स्वच्छ भारत', 'स्मार्ट सिटी' समेत कई विकास योजनाओं की घोषणा की।

विज्ञापन


लेकिन सबसे ज़्यादा चर्चा में रहे उनके कुछ मंत्रियों और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के ऐसे बयान या फ़ैसले जिनसे हिंदुस्तान की छवि 'बैनिस्तान' या 'अनिवार्यस्तान' की बनती जा रही है। वैसे भारत में पहले भी वोट बैंक को साधने के लिए बैन की राजनीति होती रही है, लेकिन पिछले डेढ़ साल से तो बैन मानो आम बात हो गई है।
विज्ञापन


लोगों के ख़ाने-पीने की चीज़ों से लेकर फ़िल्म, डॉक्यूमेंट्री, किताबें तक मोदी सरकार की बैन लिस्ट में शामिल हैं। कई चीजों पर गुपचुप तरीके से बैन लगाया गया। मसलन सरकार ने करीब 900 पोर्न वेबसाइट्स पर रोक लगाई, लेकिन जब सोशल मीडिया पर मामला गरमाया तो सरकार ने तुरंत-फुरंत सफ़ाई दी कि केवल चाइल्ड पोर्न से जुड़ी वेबसाइट्स पर रोक लगाई गई है। लेखिका वेंडी डोनिगर पर आरोप लगा कि उनकी किताब द हिंदूजः ऐन अल्टरनेटिव हिस्ट्री में हिंदुओं के इतिहास की गलत जानकारी दी गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसके बाद पब्लिशर ने किताब वापस ले ली। दिल्ली के निर्भया कांड पर बीबीसी के लिए बनाई गई लेस्ली उडविन की डॉक्यूमेंट्री 'इंडियाज डॉटर' पर रोक लगा दी गई। बाद में कोर्ट ने भी इस पाबंदी को जारी रखा। मोदी सरकार ने इसी साल मार्च में विदेशी फंड लेने वाली 69 ग़ैर सरकारी संगठनों को ब्लैकलिस्ट कर दिया, इसके बाद जून में 4470 एनजीओ के लाइसेंस रद्द कर दिए।

संघ के इशारे पर?

politics of ban india

पहलाज निहलानी की अध्यक्षता वाले सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ फ़िल्म सर्टिफिकेशन यानी सेंसर बोर्ड ने फ़रवरी 2015 में एक आदेश जारी किया जिसमें फ़िल्मों में हिंदी और अंग्रेज़ी के कुल 36 शब्दों के इस्तेमाल पर रोक लगाने की बात की गई थी।

कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी कहते हैं, "मोदी सरकार के पास एक ही काम है लोगों को ये बताना कि उन्हें क्या खाना है, क्या पहनना है, क्या देखना है, कौन सा मजहब अपनाना है आदि-आदि।"

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार या राज्य की भाजपानीत सरकारें इनके मूल संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के इशारे पर काम कर रही हैं। इसी महीने की शुरुआत में आरएसएस और उसके सहयोगी संगठनों की राजधानी में तीन दिनों तक बैठक हुई थी, जिसमें ख़ुद प्रधानमंत्री और कैबिनेट के कुछ मंत्री भी शामिल हुए थे। हालाँकि संघ ने कहा था कि बैठक सरकार के कामकाज की समीक्षा के लिए नहीं थी।

सरकार को स्पष्ट करना पड़ा कि संस्कृत को अनिवार्य भाषा नहीं

politics of ban india

ये तो हुई पाबंदियों की बात, अब जरा उन मुद्दों का जिक्र भी हो जाए जिन्हें भाजपा सरकारों ने अनिवार्य बनाया है या अनिवार्य बनाने की बातें करती रही हैं। पिछले साल नवंबर में मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी के जर्मन की जगह संस्कृत भाषा पढ़ाने के पत्र ने ख़ासा विवाद खड़ा किया था।

संस्कृत को ‘अनिवार्य’ बनाए जाने की चौतरफ़ा आलोचना के बाद सरकार को स्पष्ट करना पड़ा कि संस्कृत को अनिवार्य भाषा नहीं बनाया जाएगा। राजस्थान सरकार ने सभी सरकारी और निजी विद्यालयों में सुबह प्रार्थना के बाद बच्चों के द्वारा सूर्य नमस्कार और योग करना अनिवार्य करने के आदेश जारी किए।

शिक्षा के भगवाकरण के आरोपों के बावजूद शिवराज सरकार ने मध्य प्रदेश के स्कूलों और मदरसों में गीता पढ़ाना ज़रूरी कर दिया था। 2006 झारखंड में भाजपा सरकार ने आदेश जारी किया कि सात सितंबर को सारे स्कूलों में वंदे मातरम् गीत ज़रूरी रूप से गाया जाएगा। केंद्रीय पर्यटन व संस्कृति राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) महेश शर्मा ने हाल ही में कहा कि रामायण और महाभारत की पढ़ाई स्कूलों में अनिवार्य की जानी चाहिए। केंद्र सरकार ने योग को कक्षा 6 से लेकर 10 तक के पाठ्यक्रम में एक अनिवार्य विषय के रूप में शामिल किया है।

मराठी फ़िल्म दिखाए जाने की समयसीमा

politics of ban india

केंद्रीय सुरक्षा बलों के 10 लाख जवानों के लिए योग ज़रूरी कर दिया गया है। इसके अलावा महाराष्ट्र की भाजपा सरकार ने प्राइम टाइम शो में मराठी फ़िल्में अनिवार्य रूप से दिखाए जाने का आदेश दिया था।

बाद में इस मामले के तूल पकड़ने पर राज्य सरकार ने इसमें संशोधन करते हुए प्राइम टाइम की जगह मराठी फ़िल्म दिखाए जाने की समयसीमा दोपहर 12 बजे से रात 9 बजे तक दी।

एक के बाद एक पाबंदियों और कुछ चीजों को लोगों पर कथित तौर पर थोपने के सवाल पर भाजपा प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने बीबीसी से कहा, “मीट बैन समेत अधिकतर मामले पहले की सरकारों के फैसले के तहत ही हुए हैं, लेकिन अब क्योंकि वहाँ हमारी सरकारें हैं, इसलिए पूर्वाग्रह से ग्रसित लोग इस तरह की बातें करते हैं।”

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed