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EXCLUSIVE: मोदी के खिलाफ किसने कराया वंजारा ‘ब्लास्ट’?

Thu, 05 Sep 2013 08:23 AM IST
विनोद अग्निहोत्री
विनोद अग्निहोत्री Updated Thu, 05 Sep 2013 08:23 AM IST
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politics behind Vanzara letter

नरेंद्र मोदी की आंखों के तारे रहे जेल में बंद आईपीएस अधिकारी डीजी वंजारा की बगावत की पटकथा करीब पिछले चार महीने से भी ज्यादा वक्त से लिखी जा रही थी।

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गुजरात के मुख्यमंत्री और लोकसभा चुनावों में भाजपा के संभावित प्रधानमंत्री के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को लेकर यह एक बड़ा सियासी धमाका है, जिसे बेहद गोपनीय तरीके से यूपीए के रणनीतिकारों ने अंजाम दिया है।
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सूत्रों के मुताबिक वंजारा को वायदा मुआफ सरकारी गवाह (एप्रूवर) बनाने की भी तैयारी सीबीआई ने कर ली है और जल्दी ही धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेटी बयान भी दर्ज करा लिया जाएगा।
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ऐसा होने के बाद मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके बेहद करीबी भाजपा महासचिव अमित शाह की मुसीबतें बढ़ सकती हैं।

वंजारा और पूरा परिवार आसाराम का भक्त

इसे संयोग कहा जाए या वक्त का तकाजा कि डीजी वंजारा और उनका पूरा परिवार उन आसाराम बापू का भक्त रहा है जो इन दिनों यौन शोषण के आरोप में जोधपुर की जेल में बंद हैं। जबकि मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की इन दिनों आसाराम से तकरार जगजाहिर है।

यह जानकारी देने वाले सूत्रों का कहना है इशरत जहां, सोहराबुद्दीन, तुलसीराम प्रजापति और कौसर बी समेत गुजरात में हुई कथित फर्जी पुलिस मुठभेड़ों की जांच कर रही सीबीआई को करीब चार महीने पहले ही सरकार में उच्च स्तर से जांच को उसकी तार्किक परिणति तक पहुंचाने की हरी झंडी मिली थी।

इसके पहले कांग्रेस नेतृत्व और सरकार में उच्च स्तर पर इसे लेकर लंबी जद्दोजहद चलती रही कि कथित फर्जी मुठभेड़ों की जांच को कहां तक आगे बढ़ाया जाए?

फूंक फूंक कर कदम रखने के हिमायती पीएम
सूत्रों के मुताबिक जहां प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पीएमओ के अधिकारी इस मामले में फूंक फूंक कर कदम रखने के हिमायती थे और इस मामले के राजनीतिक नफे नुकसान का आंकने की बात भी करते थे। वहीं, वित्त मंत्री पी. चिदंबरम, कानून मंत्री कपिल सिब्बल, गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे जांच को किसी भी हद तक ले जाने की छूट सीबीआई को देने के पक्ष में थे।

जबकि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके राजनीतिक सचिव अहमद पटेल जल्दबाजी और हड़बड़ी में ऐसा कोई भी कदम उठाने के पक्ष में नहीं थे, जिससे भाजपा को मामले को राजनीतिक रंग देने का मौका मिले।

वहीं अपने मुखर बयानों के लिए चर्चित कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह की राय जल्दी ठोस कार्रवाई के पक्ष में थी ताकि लोगों में एक राजनीतिक संदेश जा सके। कांग्रेस कोर ग्रुप की बैठकों में भी इस मुद्दे पर लंबी चर्चा हुई। खासी जद्दोजहद के बाद तय किया गया कि सीबीआई अपने तरीके से जांच को आगे बढ़ाए और ठोस सबूत जुटाकर ही आगे बढ़े।

सीबीआई को पहली सफलता
सीबीआई को पहली सफलता तब मिली थी जब इशरत जहां मामले के एक अभियुक्त आईपीएस अधिकारी जी.एल.सिंघल ने अंतरआत्मा की आवाज पर अपने सहअभियुक्त पुलिस कर्मियों से बगावत करते हुए इस मुठभेड़ का सच बयान किया।

सिंघल को अदालत से जमानत भी मिल गई। इसके बाद एक अन्य अभियुक्त पुलिस अधिकारी किशोर सिंह मोती सिंह वाघेला ने भी अपना हलफिया बयान दर्ज करा दिया। इसी बयान में सफेद दाढ़ी और काली दाढ़ी से ग्रीन सिग्नल लेने का खुलासा किया गया है।

एक दर्जन पुलिस कर्मियों के हलफिया बयान दर्ज

बताया जाता है कि सीबीआई पिछले काफी समय से जेल में बंद कुछ अन्य पुलिस अधिकारियों को वायदा मुआफ गवाह बनाने की कोशिश में जुटी थी। कुल 32 अभियुक्तों में अब तक करीब एक दर्जन पुलिस कर्मियों के हलफिया बयान दर्ज कराए जा चुके हैं।


सूत्रों के मुताबिक मोदी के बेहद करीबी वंजारा को लेकर सीबीआई लगातार उहापोह में रही। जब उसे वंजारा के करीबी सूत्रों की ओर संकेत मिले कि जेल में परेशान वंजारा टूट सकते हैं तब पारिवारिक सूत्रों और मित्रों के जरिए संपर्क साधा गया।

पाला बदल चुके कुछ अभियुक्त पुलिस कर्मियों ने भी वंजारा को तैयार करने में मदद की। मुठभेड़ों पर हुई सियासत से परेशान और टूट चुके वंजारा ने वायदा माफ गवाह बनने का आश्वासन मिलने के बाद अपने इस्तीफे का धमाका कर दिया।

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