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इशरत जहां, लश्कर की फिदायीन कैसे बनी सियासत का मोहरा?

Fri, 12 Feb 2016 11:20 AM IST
Updated Fri, 12 Feb 2016 11:20 AM IST
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Politics behind ishrat jahan encounter

इशरत जहां ट्यूशन करती और सिलाई-कढ़ाई। पिता की मौत के बाद वह भी घर की रोजीरोटी का सहारा थी। हालांकि महाराष्ट्र के थाणे जिले के मुंब्रा के मुस्लिम बहुल इलाके रशीद कंपाउंड की 19 साल की 'मासूम' इशरत पिछले 12 सालों से मुद्दा-ए-बहस रही है, सवाल यह रहा है कि पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की सदस्य होने और गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण नेता आडवाणी की हत्या की साजिश रचने के आरोप में मारी गई इशरत का एनकाउंटर फर्जी था या वाकई एक पुलिस मुठभेड़ थी?

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बुधवार को पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी आतंकी डेविड कोलमैन हेडली एक बार फिर दोहराया कि इशरत लश्कर-ए-तैयबा की सदस्य थी। 26/11 मुंबई हमले के अभियुक्त डेविड हेडली ने दावा किया कि 2004 में गुजरात में पुलिस एनकाउंटर में मारी गई इशरत जहां लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ी हुई थी।
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अमेरिका के किसी अज्ञात स्थान से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हो रही गवाही में मुंबई की कोर्ट को उसने बताया कि इशरत जहां मुजम्मिल बट्ट नाम के लश्कर के आतंकी के साथ काम करती थी। हालांकि इशरत जहां के एनकाउंटर का केस लड़ रही वकील वृंदा गोवर ने हेडली के दावे को खरिज किया। हेडली पहले भी ऐसा दावा कर चुका है। उन्होंने कहा कि, "हेडली के बयान में कुछ भी नया नहीं है।" उन्होंने सरकारी वकील उज्ज्वल निकम के सवाल पूछने के तरीके पर भी सवाल उठाया।
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इशरत का एनकाउंटर फर्जी था या वास्तविक, ये कोर्ट को तय करना है। हालांकि पिछले कई सालों से उसे राजनीतिक मोहरे के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। पढ़िए इशरत की मौत और उसके बाद हुई सियासत का पूरा किस्सा-

अहमदाबाद के पास मुठभेड़ में मारी गई इशरत

Politics behind ishrat jahan encounter

इशरत जहां और उसके तीन साथी 15 जून 2004 को अहमदाबाद के पास हुई मुठभेड़ में मारे गए थे। उस समय गुजरात पुलिस ने दावा किया था इशरत और उनके तीन दोस्त गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या करने के इरादे से अहमदाबाद पहुंचे थे, जहां पुलिस के साथ मुठभेड़ में उनकी मौत हो गई।

इशरत जहां के अलावा जिन तीन व्यक्तियों को मारा गया, उनके नाम प्रणेश पिल्लई उर्फ जावेद गुलाम शेख, अमजद अली राणा और जीशान जौहर थे। पुलिस की जिस टीम ने इनका एनकाउंटर किया, उसका नेतृत्व तत्कालीन डीआईजी डीजी वंजारा ने किया था, जिन पर बाद में सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में मुकदमा चला और जेल में रहना पड़ा।

पुलिस का दावा था कि इशरत और उसके साथी लश्कर के आतंकी थे। बाद में पुलिस मुठभेड़ पर सवाल उठे और मामले की जांच के आदेश दिए गए। लंबे समय तक चली जांच के बाद 2009 में अहमदाबाद मेट्रोपॉलिटन कोर्ट ने माना क‌ि एनकाउंटर 'नाटकीय' था। हालांकि गुजरात सरकार ने निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। सीबीआई ने 3 जुलाई, 2013 को मामले में पहली चार्जशीट दाखिल की और कहा कि एनकाउंटर 'नाटकीय' था।

इशरत के परिजनों और कई राजनीतिज्ञों ने उसे निर्दोष माना। सीबीआई ने कोर्ट में ये तो माना कि इशरत का एनकाउंटर 'नाटकीय' था, लेकिन उसने इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं कि वह लश्कर की सदस्य थी या नहीं?

पाक के अखबार ने भी इशरत को बताया लश्कर का सदस्य

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2004 में लाहौर के एक प्रकाशन गाजवा टाइम्स ने आतंकी संगठन जमात-उद-दावा के बयान के आधार पर कहा था कि इशरत और उसके साथी लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य थे। 26/11 मुंबई हमले का मास्टरमाइंट हाफिज सईद जमात-उद-दावा का सरगना है।

हालांकि गाजवा टाइम्स ने 2007 में अपना बयान वापस ले लिया। प्रकाशन ने कहा कि उसका बयान दरअसल 'अखबारी गलती' थी। उस प्रकाशन ने ये कभी नहीं बताया कि उसे गलती तीन साल बाद क्यों समझ में आई? गाजवा टाइम्स ने इशरत के परिवार से माफी भी मांगी।

2010 में भारत के कुछ मीडिया संगठनों ने एनआईए के हवाले से दावा किया कि इशरत को डेविड हेडली ने आतंकी गतिवि‌धियों में शामिल किया था। एनआईए ने बाद में इन खबरों को फर्जी बताया और सीबीआई ने आशंका जताई कि ये खबरें आईपीएस अधिकारी राजेंद्र कुमार ने गढ़ी होंगी, जो खुद भी फर्जी एनकाउंटर केस में संदिग्ध हैं।

अली अनवर ने इशरत को कहा था 'बिहार की बेटी'

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मामले के जांच के बाद विशेष जांच टीम ने गुजरात हाईकोर्ट को बताया कि इशरत और उसके साथियों का एनकाउंटर वास्तविक नहीं था और पुलिस ने जिस तारीख को एनकाउंटर करने का दावा किया ‌था, उन्हें उससे पहले मार दिया गया था।

तत्कालीन आईबी चीफ आसिफ इब्राहिम ने 2013 में प्रधानमंत्री और गृहमंत्रालय के दफ्तर को बताया कि इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि इशरत लश्कर-ए-तैयबा के मॉड्यूल का हिस्सा था, जिसने नरेंद्र मोदी और लालकृष्‍ण आडवाणी को मारने की योजना बनाई थी। डेविड हेडली ने गुरुवार को अपनी गवाही में एक बार फिर उसी तथ्य को दोहराया।

गुजरात पुलिस ने इशरत और उसके सा‌थियों को 15 जून 2004 को अहमदबाद में मारने का दावा किया था, जबकि इशरत 11 जून, 2004 को मुंब्रा के अपने घर से नासिक के लिए निकली ‌थी। 11 जून को उसने अपनी मां से नासिक बस अड्डे से बात की थी। 12 जून को भी उसकी बात मां से हुई थी, ऐसा दावा किया जाता है।

इशरत के परिजनों, मुंबई की पुलिस और महाराष्ट्र के कई नेताओं ने दावा किया कि इशरत आतंकी नहीं थी। महाराष्ट्र के अल्पसंख्यक आयोग ने भी एनकाउंटर की जांच की मांग की। इशरत पर सियासत का आलम ये रहा कि बीते चुनावों में जदयू के प्रवक्ता अली अनवर ने उसे बिहार की बेटी बताया था। इशरत के परिजन मूलतः बिहार के ही रहने वाले हैं।

फिलहाल डेविड हेडली की गवाही के बाद इशरत पर नए सिरे से सियायत शुरु हो चुकी है, और भाजपा उन दलों से माफी मांगने की मांग कर रही है, जो उसे निर्दोष मानते रहे हैं।

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