फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   politicians disapear after election

सांसद बनकर कहां चले जाते हैं ये प्रत्याशी?

Tue, 25 Mar 2014 08:17 AM IST
संजय शिशौदिया/अमर उजाला, गाजियाबाद
संजय शिशौदिया/अमर उजाला, गाजियाबाद Updated Tue, 25 Mar 2014 08:17 AM IST
विज्ञापन
politicians disapear after election

गाजियाबाद की पहचान आज ट्रांस हिंडन एरिया (इंदिरापुरम, वैशाली) की वजह से है। यह देन है गाजियाबाद विकास प्राधिकरण और बिल्डरों की। पुराना गाजियाबाद पहले के मुकाबले कुछ उभरा है तो सिर्फ नाली-खड़ंजों के नाम पर।

विज्ञापन


यहां आज भी बारिश में बच्चों की स्कूल वैन गौशाला अंडरपास में डूबते बचती है, तो महिलाओं और बच्चों का दिन में भी घर से बाहर घूमना दुश्वार है। ऐसी ही बरसों पुरानी तमाम समस्याएं ज्यों की त्यों हैं।
विज्ञापन


वैसे तो सांसद राजनाथ सिंह ने बाहरी सांसदों की निधि से भी विकास कराया, मगर यहां की जनता को सही मायनों में जिस सुरक्षा, ट्रैफिक, ट्रांसपोर्टेशन और दिल्ली-नोएडा कनेक्टिविटी की दरकार है, उसे शायद वे नहीं समझ सके।
विज्ञापन
विज्ञापन

इंजन उद्योग खत्म होने के कगार पर

politicians disapear after election

भले ही सुरक्षा का जिम्मा प्रदेश सरकार का है, मगर गाजियाबाद की महिलाओं को शिकायत है कि इस मुद्दे को मुखर तरीके से सांसद उठाते तो।
औद्योगिक नगरी के नाम से पहचाना जाने वाला जिला गाजियाबाद आज फैक्ट्रियों की कब्रगाह बन चुका है।

कभी जमाना था कि पूर्वांचल और बिहार तक से लोग गाजियाबाद में बने इंजन खरीदने आते थे। लेकिन अब इंजन उद्योग धीरे-धीरे खत्म होने के कगार पर पहुंच चुका है। फैक्ट्रियां बंद होती चली गईं। फैक्ट्रियों के उत्पाद से ज्यादा अब यहां बंद फैक्ट्रियों का स्क्रैप बिकता है।

ट्रैफिक जाम और लगातार बिगड़ती कानून व्यवस्था पर सवाल उठता है कि आखिर क्यों इस दिशा में ठोस प्रयास नहीं किए गए? जवाब भी खुद-ब-खुद मिलने लगा है कि लोकसभा चुनाव में यूपी के इस प्रवेशद्वार गाजियाबाद को सिर्फ दिल्ली पहुंचने के तौर पर इस्तेमाल किया गया।

नामी नेता रह चुकें हैं यहां से सांसद

politicians disapear after election

1967 के आम चुनाव में जब गाजियाबाद जिला नहीं बना था तब कांग्रेस के प्रत्याशी बीपी मौर्य को यहां की जनता ने सांसद बनाया। 1971 में प्रकाशवीर शास्त्री भी यहीं से निर्दलीय जीतकर संसद पहुंचे थे। 1984 में कांग्रेस के टिकट पर केएन सिंह गाजियाबाद से सांसद बने।

भाजपा के रमेशचंद तोमर जहां चार बार लगातार सांसद रहे, वहीं कांग्रेस के सुरेंद्र प्रकाश गोयल भी यहां से सांसद रह चुके हैं। खुद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह 2009 में इसी लोकसभा सीट से जीत हासिल करके संसद पहुंचे।

जनता ने उनमें भी अपना विश्वास जताया, मगर जहां गाजियाबाद को ले जाना चाहिए था, वहां कोई नहीं ले जा सका। इस बार बसपा ने मुकुल उपाध्याय को मैदान में उतारा तो कांग्रेस ने फिल्म स्टार राजबब्बर को। भाजपा ने भी पूर्व थलसेना अध्यक्ष वीके सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया है।

नाली-खड़ंजों तक ही सीमित रहे सांसद

politicians disapear after election

हिंदुस्तान, इंडेन और भारत जैसी तीन नामचीन गैस कंपनियों के प्लांट, देश के बडे़ सैन्य हवाई अड्डों में शुमार हिंडन एयर स्टेशन, सीबीआई एकेडमी, जैविक खेती का रिसर्च सेंटर, पोस्टल कॉलेज जैसे संस्थानों के अलावा एजूकेशन हब के नाम से पहचाने जाने वाले गाजियाबाद में इन संस्थानों तक पहुंचने वाली सड़कें खस्ताहाल हैं।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने अपनी सांसद निधि से गाजियाबाद की कॉलोनियों, गांवों और मोहल्लों में खड़ंजों और नालियों का खूब काम कराया, मगर जिले की प्रमुख समस्याओं का समाधान नहीं हो सका।

राजनाथ सिंह ने अपने पांच साल के कार्यकाल में विकास के करीब 250 काम कराए।

क्या कहते हैँ लोग

politicians disapear after election

गाजियाबाद पिछले दशकों में कोई खास विकास काम न होने से यहां के लोग भी नेताओं से खपा हैं। यहां के निवासी व वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर का कहना है कि चुनाव जीतने के बाद प्रत्याशी दर्शन तक नहीं देते। चुनाव के मौके पर जो वादे किए जाते हैं वह भी उधार ही रह जाते हैं।

जागरूक ना‌गरिक मंच के संयोजक पीयूष कुमार गर्ग का कहना है कि हाल ही में यहां से सांसद रहे राजनाथ सिंह ने कोई भी ऐसा काम नहीं किया जो जनता की उमींदों पर खरा उतरता हो।

वहीं समाजसेवी महेशचंद्र का कहना है कि चुनावों के दौरान प्रत्याशी बड़े-बड़े दावे करते हैं लेकिन चुनाव निकलते ही दावों की हवा निकल जाती है। जबकि नानकचंत गोयल का कहना गाजियाबाद की कानून व्यवस्‍था किसी से छिपी नहीं है। यहां आए दिन ब्यापारियों के साथ लूट-पाट होती रहती है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed