भोपाल: भाजपा में छिड़ी जंग, 'ब्राह्मण नेताओं का सफाया'
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भोपाल लोकसभा के टिकट को लेकर कैलाश जोशी भी जसवंत सिंह बनते-बनते रह गए। इस सीट ने मध्य प्रदेश भाजपा में भी नाराज नेताओं की भीड़ पैदा कर दी है।
शुक्रवार को दिनभर की मशक्कत के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और संगठनमंत्री अरविंद मेनन ने मिलकर आलोक संजर के नाम की घोषणा तो कर दी है लेकिन अब कैलाश जोशी से लेकर आलोक शर्मा तक नेता एक दूसरे के दुश्मन हो गए हैं।
भाजपा के सूत्रों का कहना है कि कैलाश जोशी अड़ गए थे कि टिकट जिला अध्यक्ष आलोक शर्मा को दिया गया तो वे पार्टी छोड़ देंगे। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि प्रदेश भाजपा नेतृत्व पहले ही आलोक संजर के नाम का फैसला किए बैठा था, लेकिन नाटक का पटाक्षेप कैलाश जोशी का नाम लेकर किया गया।
चक्रव्यूह में फंसे आलोक शर्मा
सूत्रों के मुताबिक जिला अध्यक्ष आलोक शर्मा को बड़ी चतुराई से चक्रव्यूह में फंसाकर टिकट से वंचित किया गया। पहले तो लालकृष्ण आडवाणी का नाम उछाला गया। जब आडवाणी ने गांधीनगर से चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी, तब कैलाश जोशी ने फिर दावा ठोंकना शुरू कर दिया। इस बीच एक वीडियो आ गया। इस वीडियो को जारी करते हुए कांग्रेस ने आरोप लगाए कि कैलाश जोशी टिकट के बदले एक करोड़ रुपए मांग रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि आलोक शर्मा विरोधी खेमे ने यह प्रचारित करना शुरू किया कि यह वीडियो के जारी होने में आलोक शर्मा का हाथ रहा है। इस मुद्दे पर शुक्रवार शाम को मुख्यमंत्री ने कैलाश जोशी को अपने निवास पर उनकी राय जाननी चाही।
कैलाश जोशी ने आलोक संजर के नाम का पुरजोर समर्थन किया और आलोक शर्मा के नाम की मुखालफत की। बताया जाता है कि कैलाश जोशी ने यहां तक कह दिया कि आलोक शर्मा को टिकट दिया गया तो वे पार्टी से इस्तीफा दे देंगे।
कई धड़ों में बंटी भाजपा
अब भोपाल में भाजपा कई धड़ों में बंट चुकी है। गृहमंत्री बाबूलाल गौर अपनी बहू कृष्णा गौर के लिए टिकट मांग रहे थे, वे भी खफा हैं। कैलाश जोशी खुद को टिकट नहीं मिलने से नाराज हैं।
जिला अध्यक्ष आलोक शर्मा को टिकट नहीं मिला तब उनके इस्तीफे की खबरें चलीं, लेकिन उन्होंने ऐसी तमाम खबरों का खंडन किया है। लेकिन वह भी क्षुब्ध हैं।
प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का कैंप पहले से ठाने बैठा था कि अनिल माधव दवे को टिकट नहीं देना है। दवे के समर्थक भी इस बात से खफा हैं।
ब्राह्मणों का सफाया
भाजपा के ब्राह्मण नेताओं का कहना है कि पूरी मशक्कत में ब्राह्मण नेताओं का सफाया कर दिया गया है। एक ही तीर से कैलाश जोशी और आलोक शर्मा को दौड़ से बाहर कर दिया गया है, वहीं मंदसौर से रघुनंदन शर्मा और लक्ष्मीनारायण पांडे का भी सफाया कर दिया गया है।
राजगढ़ जिले में हरिचरण तिवारी को दरकिनार कर दिया गया है। अटल बिहारी वाजपेयी के भांजे अनूप मिश्रा को मुरैना से टिकट देकर जहां कांग्रेसी उम्मीदवार गोविंद सिंह का रास्ता आसान कर दिया गया है।
वहीं चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी को टिकट नहीं देकर उन्हें भी मुश्किल में डाल दिया गया है। यहां भी एक तीर से दो ब्राह्मणों को निशाना बनाया गया है।