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पाक में सेना की शह पर चल रहा सियासी ड्रामा

Mon, 25 Aug 2014 02:36 PM IST
हफीज चाचड़/इस्लामाबाद
हफीज चाचड़/इस्लामाबाद Updated Mon, 25 Aug 2014 02:36 PM IST
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political war in pakistan on behalf of army

पाकिस्तान में इन दिनों जबरदस्त राजनीतिक उथल पुथल मची है। इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पिछले 10 दिनों से लगातार विरोध प्रदर्शन कर रही है।

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इमरान के साथ एक दूसरी पार्टी के कार्यकर्ता भी सड़कों पर हैं और उनकी मांग है कि प्रधानमंत्री नवाज शरीफ इस्तीफा दें और नए चुनाव की घोषणा करें। इमरान का दावा है कि 11 मई 2013 हो हुए आम चुनाव में नवाज शरीफ की पार्टी ने धांधली से जीत हासिल की थी।
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शरीफ ने इन तमाम आरोपों को खारिज कर दिया है और कहा है कि उनके इस्तीफे की मांग असंवैधानिक है क्योंकि वह चुने हुए प्रधानमंत्री हैं।

यह विरोध प्रदर्शन 14 अगस्त को लाहौर से शुरू हुए थे और इमरान ने अपने सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ इस्लामाबाद की ओर मार्च किया था और धरना शुरू किया था जो आज तक जारी है। इमरान की पार्टी और सरकार के बीच बातचीत भी जारी है लेकिन अभी तक गतिरोध बरकरार है।

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प्रदर्शन के पीछे है पाकिस्तानी सेना

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जानकार मानते हैं कि इस्लामाबाद में हो रहे विरोध प्रदर्शन शरीफ की सरकार को कमजोर करने की एक कोशिश है जिसके पीछे पाकिस्तानी सेना है।

हालांकि जनरल अशफाक परवेज कयानी के रिटायर होने के बाद शरीफ ने अपनी पसंद से जनरल राहील शरीफ को सेनाध्यक्ष नियुक्त किया था।

जनरल राहील शरीफ के सेनाध्यक्ष बनने के कुछ महीनों बाद उनके प्रधानमंत्री से संबंध खराब हुए और कहा जाता है कि प्रधानमंत्री की ओर से विदेश मंत्री नियुक्त न करना इसका एक बड़ा कारण है।

विदेश मंत्री का पोर्टफोलियो भी प्रधानमंत्री के पास है और वह चाहते हैं कि विदेश नीति में उनकी सरकार खुद अपने स्तर पर फैसले करे।

मोदी से बात के खिलाफ थी आर्मी

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लेकिन सेना नहीं चाहती है कि ऐसा हो और विदेश नीति में सेना अपनी मर्जी करना चाहती है। विदेश नीति के मुद्दे पर सेना और सरकार के बीच खराब हो चुके संबंधों के संकेत भी मिले हैं।

भारत में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद जब उनके शपथ ग्रहण समारोह में शरीफ गए तो सेना इससे बेहद नाराज थी। सेना ने प्रधानमंत्री को संदेश भी भेजा था कि वह उस शपथग्रहण समारोह में न जाएं लेकिन प्रधानमंत्री ने किसी की एक भी न सुनी और दिल्ली पहुंच गए।

शरीफ जब भारत से लौटे तो उन्होंने यहां से नरेंद्र मोदी की मां के लिए साड़ी का तोहफा भेजा और मोदी ने ख़ुद उसकी तस्वीर ली और ट्विटर पर पोस्ट की। इसकी पाकिस्तान में कड़ी आलोचना हुई और यहां तक कहा गया कि शरीफ ने साड़ी देकर कश्मीर का सौदा कर लिया है।

सेना ने उस समय तो इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी लेकिन बाद में दो पार्टियों के सैकड़ों कार्यकर्ताओं को सड़कों पर लाकर शरीफ की सरकार को कमजोर करने की कोशिश की है।

कमजोर हुई शरीफ सरकार

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विरोध प्रदर्शनों के बाद पाकिस्तान में एक तरह से ‘सॉफ्ट कूप’ आ चुका है और शरीफ सरकार कमजोर होने लगी है और विदेशी मामले सेना के पास आ गए हैं।

इसका पहला सबूत दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित का कश्मीरी अलगाववादी नेताओं से मुलाकात करना और बाद में भारत की ओर से विदेश सचिव स्तर की बातचीत रद्द करना है।

अब अगर विरोध प्रदर्शन खत्म भी हो जाते हैं और शरीफ इस्तीफा नहीं भी देते हैं तो भी सरकार कमजोर हो गई है और इमरान और कादरी जैसे लोग इसका कारण बने हैं।

ये है मामला

पाकिस्तान के विपक्षी नेता इमरान खान और पाकिस्तान अवामी तहरीक के प्रमुख मौलवी ताहिर उल कादरी पिछले कुछ दिनों से प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के इस्तीफे के साथ ही देश में फिर आम चुनाव कराए जाने की मांग कर रहे हैं।

इमरान और कादरी अपने हजारों समर्थकों के साथ गत मंगलवार से राजधानी इस्लामाबाद के ‘रेड जोन’ में डटे हैं। लेकिन शरीफ इस्तीफा देने से इनकार कर चुके हैं।

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