केजरीवाल स्टाइल में टीवी पर छाई मोदी एंड कंपनी, भन्नाए अरविंद
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ज्यादा वक्त नहीं गुजरा, जब दिल्ली की संकरी गलियों से लेकर चौड़ी सड़कों तक ने अरविंद केजरीवाल का धरना-प्रदर्शन देखा था। उस वक्त भाजपा का कहना था कि केजरीवाल सिवाय ड्रामे के कुछ नहीं करते, क्योंकि उन्हें जनता की भलाई नहीं करनी, अपनी सियासत चमकानी है।
लेकिन राजनीति वाकई किसी नाटक से कम नहीं, जहां किरदार बेहद तेजी से बदलते हैं। कभी-कभी इतनी तेजी से कि समझ नहीं आता कि कौन सा नेता कौन सी राजनीति करना चाहता है।
पांच-छह महीने के अंतराल ने देश की राजनीति का यही चेहरा एक बार फिर दिखाया। नवंबर में दिल्ली में सरकार बनाने से पहले और उसके बाद आम आदमी पार्टी ने कई बार अपनी बात रखने और मनवाने के लिए धरना प्रदर्शन किया। आज भाजपा बनारस में यही कर रही है।
भाजपा ने दिन भर बनारस में काटा बवाल
भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी की बेनियाबाग चुनावी रैली को इजाजत न मिलने से बिफरी भाजपा ने सवेरे से हल्ला मचाए रखा। दिल्ली से लेकर बनारस तक चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया गया।
नरेंद्र मोदी ने आजमगढ़ की रैली में यहां तक कह दिया कि चुनाव आयोग अपनी जिम्मेदारी सही तरह से नहीं संभाल रहा है। इस बीच दिल्ली में न्याय मार्च निकाला गया और बनारस में अमित शाह-अरुण जेटली की अगुवाई में बीएचयू के बाहर प्रदर्शन किया गया।
जब अमित शाह से पूछा गया कि पांच में से चार कार्यक्रम की इजाजत मिलने के बावजूद भाजपा ने आगे कदम क्यों नहीं बढ़ाया, तो उन्होंने कहा, "प्रशासन ने हमें उलझाए रखा। इजाजत तब दी गई, जब काफी देर हो चुकी थी।" कुछ देर बाद करीब ढाई बजे धरना खत्म कर दिया गया।
विरोधी दलों ने बताया नाटक
इससे पहले धरने पर बैठे अमित शाह ने कहा, "यह प्रतीकात्मक कार्यक्रम है। हम दिखाना चाहते हैं कि उत्तर प्रदेश की सरकार और प्रशासन किस तरह एकतरफा कार्रवाई कर कर रहा है। हमारे साथ जो अन्याय हो रहा है, उसके बारे में घर-घर तक जानकारी पहुंचाएंगे।"
उन्होंने कहा कि अगर किसी इनपुट की वजह से बेनियाबाग रैली के आयोजन की इजाजत नहीं गई, तो वो इनपुट सार्वजनिक किए जाने चाहिए। अरुण जेटली ने कहा कि पीएम पद के दावेदार को चुनाव प्रचार करने से रोकना कहां का लोकतंत्र है।
लेकिन भाजपा की इस रणनीति को विरोधी दलों ने नाटक करार दिया। खास तौर से आम आदमी पार्टी ने उस पर हमला बोला, जो अतीत में खुद धरना-प्रदर्शन करती रही है। और उसके निशाने पर रही भाजपा, जो धरना-प्रदर्शन करने को लेकर उस पर हमले करती रही है।
बदले रोल में केजरी ने उठाया धरने पर सवाल
आम आदमी पार्टी के संयोजक और बनारस से मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे अरविंद केजरीवाल ने हमला बोलने के लिए माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर का सहारा लिया।
उन्होंने ट्विटर पर वो चिट्ठी भी डाली, जिसमें भाजपा को मोदी की गंगा आरती की इजाजत दी गई थी। केजरीवाल ने लिखा, "यह रही गंगा आरती की इजाजत। वो जाकर पूजा-अर्चना क्यों नहीं करते? इस पर राजनीति क्यों की जा रही है?"
केजरीवाल ने आगे लिखा, "अगर आपको केवल आरती और पूजन करना हो, तो चुनाव आयोग की इजाजत नहीं चाहिए होती। आपको राजनीतिक गतिविधियों के लिए उसकी मंजूरी चाहिए होती है।"
नीयत साफ होनी चाहिएः केजरीवाल
आम आदमी पार्टी के नेता ने लिखा, "मैं एक दिन अकेला गया था और पूजा करके चला आया। मुझे किसी ने नहीं रोका। मैं आज भी अपनी पत्नी के साथ वहां जाऊंगा। नीयत साफ होनी चाहिए।"
पार्टी के दूसरे वरिष्ठ नेता पर भी भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि वो राजनीति कर रही है। मनीष सिसोदिया ने कहा, "भाजपा को लगने लगा है कि वो बनारस में हारने वाली है, इसलिए यह सब ड्रामा किया जा रहा है।"
उन्होंने कहा, "उन्होंने कल सुबह इजाजत मांगी, शाम को रद्द बता देते हैं। जब प्रशासन इजाजत देता है, तो जाते नहीं हैं। मोदी गंगा की आरती करना चाहते हैं, तो उन्हें कोई नहीं रोक सकता। लेकिन वो लोग राजनीति करना चाहत हैं। मैं रोज सवेरे जाता हूं गंगा घाट पर।"
भाजपा ने इजाजत न देने को बनाया मुद्दा
दरअसल, भाजपा ने नरेंद्र मोदी की बेनियाबाग रैली को इजाजत न मिलने को बड़ा मुद्दा बना दिया है। उसका कहना है कि बनारस के जिलाधिकारी राज्य सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं और चुनाव आयोग को उन्हें तुरंत वापस बुलाना चाहिए।
लोकसभा चुनाव का आखिरी चरण बचा है, ऐसे में भाजपा ज्यादा से ज्यादा सीटों तक पहुंचने के लिए सारे हथकंडे अपनाना चाहती है। चुनाव आयोग पर बूथ कैप्चरिंग रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाकर वो पूर्वांचल की बाकी सीटों पर 12 मई को होने वाले मतदान के लिए माहौल बना रही है।
इसके अलावा बनारस में नरेंद्र मोदी को उस नेता के तौर पर पेश किए जाने की कोशिश है, जिस पर ज्यादती हो रही है। भाजपा मोदी के ऐसे नेता के रूप में प्रोजेक्ट करना चाहती है, जिन्हें विरोधी दल रोकने के लिए सब कुछ करने को तैयार हैं।
पूर्वांचल में विक्टिम कार्ड खेलने की कोशिश
हकीकत में यह मामला केवल बनारस का नहीं है। गुरुवार को भाजपा के आक्रामक रुख से यह साफ हो गया कि उसका निशाने पर पूर्वांचल की सभी सीटें हैं। यह भाजपा के समर्थकों और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की परोक्ष कोशिश भी कही जा सकती है।
साथ ही साथ पर्चा भरने के दौरान रोड शो कर अपनी ताकत का अहसास कराने वाले मोदी के साथी नेताओं ने बनारस में विरोध प्रदर्शन का जिम्मा संभालकर माहौल गर्म कर दिया है।
भाजपा अब तक विकास की बात कर रही थी, लेकिन अब 'विक्टिम कार्ड' खेल रही है। इसके अलावा मोदी ने दलित कार्ड, जाति कार्ड और व्यक्तिगत कार्ड, सब दांव खेले हैं।
भाजपा ने दिन भर खाई टीवी फुटेज
इसे भाजपा का केजरीवाल स्टाइल भी कहा जा सकता है। अरविंद केजरीवाल ने विरोध-प्रदर्शन को राजनीति का नया आयाम बना डाला था, जिससे वाले टीवी-अखबारों की सुर्खियां बटोरने में कामयाब रहे।
बुधवार को यही हाल भाजपा का रहा। रैली की इजाजत मिलने पर जितनी चर्चा उसे मिलती, बनारस में दिन भर अलग-अलग तरह का कार्यक्रम कर उसने उससे कहीं ज्यादा सुर्खियों का इंतजाम अपने लिए कर लिया।
यह बात है और है कि उसे बनारस के बाशिंदों की खास चिंता नहीं रही। जब बीएचयू के बाहर भाजपा का प्रदर्शन और हो-हल्ला जारी था, भीतर बच्चे इम्तहान देते हुए परेशानी महसूस कर रहे थे। लेकिन भाजपा को खबर है कि सियासत में छोटी-मोटी बातों पर ध्यान नहीं दिया जाता!