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'चुनाव प्रचार में जानवरों से क्रूरता न करें पार्टियां'

Thu, 27 Sep 2012 12:47 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Thu, 27 Sep 2012 12:47 AM IST
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political parties should not campaign with animal in elections
पशु-पक्षियों के साथ क्रूरतापूर्ण व्यवहार रोकने की गैर सरकारी संगठनों की राय से इत्तफाक रखते हुए चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों को चुनाव प्रचार में चिन्ह के तौर पर पशुओं का इस्तेमाल नहीं करने की नसीहत दी है। आयोग का कहना है कि राजनीतिक दल प्रचार अभियान में चुनाव चिन्ह के तौर पर पशुओं का इस्तेमाल करते हैं, इससे पशुओं के स्वच्छंद रहने के अधिकार का हनन तो होता ही है, साथ ही अभियान में अनवरत रहने के कारण उनका शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न भी होता है।
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हालांकि आयोग ने इस पर पूरी तरह से पाबंदी नहीं लगाई है। यह हिदायत जरूर दी है कि बहुत जरूरी होने पर ही राजनीतिक दल पशुओं का इस्तेमाल करें, लेकिन यह सुनिश्चित कर लें कि इस्तेमाल किए जा रहे पशु-पक्षियों का किसी भी कीमत पर उत्पीड़न न हो। चुनाव प्रचार अभियान के दौरान जानवरों का इस्तेमाल किए जाने का पशु अधिकार संगठन ऐतराज करते हुए लंबे समय से प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं। इसके चलते निर्वाचन आयोग ने एक आदेश जारी कर चुनाव अभियानों में पशुओं का इस्तेमाल न करने के लिए राजनीतिक दलों को सख्त हिदायत दी है।
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आयोग का कहना है कि इस संबंध में कई व्यक्तियों और संगठनों से अनुरोध प्राप्त हुए हैं, जिनमें आरोप लगाया गया है कि चुनाव अभियान के दौरान राजनीतिक दल अपने चिन्ह के तौर पर बड़ी संख्या में घोडे़, गधे, हाथी, ऊंट और बैलों का इस्तेमाल करते हैं। अभियान में जानवरों के साथ अमानवीय बर्ताव किया जाता है। संगठनों ने यह भी आरोप लगाया गया है कि पशुओं को अक्सर निर्धारित सीमा से अधिक भार ढोना पड़ता है। ज्यादा समय तक काम करना पड़ता है और कुछ उम्मीदवार जानवरों के ऊपर हानिकारक रासायनों का इस्तेमाल कर नारे और चुनाव चिन्ह भी लिखते हैं।
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निर्वाचन आयोग ने सभी राजनीतिक दलों को परामर्श जारी करते हुए कहा है कि वे पशु क्रूरता निवारक अधिनियम 1960 और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 का उल्लंघन न करें। वहीं पेटा इंडिया ने निर्वाचन आयोग के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा है कि पशु संरक्षण के लिए काम कर रहे कार्यकर्ताओं के कई दफा अनुरोध के बाद आखिरकार चुनाव आयोग ने एक अच्छा कदम उठाया है। चुनाव अभियान में शामिल जानवर अक्सर कुपोषण के शिकार होते हैं और उन्हें पर्याप्त भोजन और पानी नहीं मिलता। जख्म और अन्य तरह की चोट तो उनके लिए सामान्य बात होती है।
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