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एक दशक में दोगुना से ज्यादे हो गए राजनीतिक दल

Mon, 26 Nov 2012 12:00 PM IST
चन्द्रभान यादव/फर्रुखाबाद
चन्द्रभान यादव/फर्रुखाबाद Updated Mon, 26 Nov 2012 12:00 PM IST
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political parties have been doubled in one decade in india

इसे सियासी दलों के प्रति घटता विश्वास कहें या भारतीय लोकतंत्र की बानगी, स्थिति जो भी हो, पर देश में सियासी दलों का कुनबा तेजी से बढ़ रहा है। हर चुनाव के वक्त नई पार्टियां जनता की अदालत में खड़ी नजर आती हैं। एक दशक में राजनीतिक दलों का कुनबा दोगुना हो गया है। इस एक दशक में सबसे ज्यादा सियासी दल उत्तर प्रदेश में बढ़े हैं। जबकि दिल्ली दूसरे नंबर पर है। आने वाले लोकसभा चुनाव में नई पार्टी के रूप में ‘आम आदमी पार्टी’ भी जनता की अदालत में खड़ी नजर आएगी।

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इंडिया अगेंस्ट करप्शन टीम के अहम सदस्य अरविंद केजरीवाल सोमवार 26 नवंबर को एक नई पार्टी का संविधान घोषित करने जा रहे हैं। इस पार्टी की घोषणा के बाद देश के सियासी दलों की सूची में एक संख्या और बढ़ जाएगी। एक दशक में नए सियासी दल बनाने का क्रम काफी तेजी से चला है। इस दौरान दोगुना से ज्यादा नए सियासी दल पंजीकृत हुए हैं।
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भारत निर्वाचन आयोग की सूची के मुताबिक वर्ष 2001 में राष्ट्रीय पार्टी के रूप में मान्यता हासिल करने वाली पार्टियों में बसपा, भाजपा, सीपीआई, सीपीएम, कांग्रेस और एनसीपी थी। एक दशक बाद भी राष्ट्रीय पार्टी के रूप में इन्हीं छह पार्टियों का नाम दर्ज है। उत्तर प्रदेश राज्य स्तरीय पार्टी में पहले सिर्फ समाजवादी पार्टी थी और अब सपा के साथ राष्ट्रीय लोकदल भी शामिल हो गया है। जबकि पंजीकृत गैरमान्यता प्राप्त दलों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है।
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भारत निर्वाचन आयोग के मुताबिक वर्ष 2001 में जहां 580 गैर मान्यता प्राप्त पार्टियां थीं वहीं 28 दिसंबर 2011 को इनकी संख्या में 1308 पहुंच गई। फिलहाल यह सिलसिला थमा नहीं है बल्कि बीते 11 माह में लगातार नई पार्टियां बनाने का क्रम जारी है। 10 अक्टूबर 2012 तक देश में 1366 गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल पंजीकृत हो चुके हैं। पंजीकृत गैर मान्यता प्राप्त दलों में तमाम दल जनता की अदालत में हाजिर हुए। कुछ को जनता ने स्वीकार किया तो ज्यादातर पूरी तरह से नकार दिए गए।
 
यूपी में बनीं सबसे ज्यादा पार्टियां
यदि एक दशक के इतिहास पर गौर करें तो सबसे ज्यादा सियासी दल उत्तर प्रदेश में गठित हुए। भारत निर्वाचन आयोग की ओर से जारी सूची के मुताबिक वर्ष 2001 में देश में पंजीकृत गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के रूप में 580 पार्टियां थीं, इसमें यूपी की 103 पार्टियां शामिल थीं। दिसंबर 2011 में इनकी संख्या 1308 तक पहुंच गई तो यूपी में इनकी संख्या बढ़कर 258 हो गई। यह अलग बात है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पंजीकृत गैर मान्यता प्राप्त दल के रूप में सिर्फ 40 पार्टियां ही मैदान में उतरीं। सियासी समर में भले इसमें से तमाम को जनता ने नकार दिया, लेकिन इन पार्टियों के पदाधिकारी खुद का सियासी दल होने पर गर्व महसूस करते हैं।
 
साल दर साल बढ़ा कुनबा
वर्ष              देश में गैर मान्यता प्राप्त दल     यूपी में गैर मान्यता प्राप्त दल
2001                  580                         98
2003                  655                        112
2005                  753                        130
2006                  781                        156
2007                  876                        210
2009                  1035                       228
2010                  1112                        236
2011                  1308                        253


बरकरार नहीं रख पाए रूतबा
भारत में राष्ट्रीय दल के रूप में मान्यता हासिल करने वाले दलों में बहुजन समाज पार्टी, भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, भारत की कम्यूनिस्ट पार्टी, भारत की कम्यूनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) एवं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शामिल है। वर्ष 2008 में इसमें बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनता दल भी शामिल हुई, लेकिन यह पार्टी भारत निर्वाचन आयोग के मानकों पर ज्यादा दिन तक खरा नहीं उतर पाई। अगले ही साल इसे राष्ट्रीय दलों की लिस्ट से हटना पड़ा और यह प्रदेश स्तरीय मान्यता प्राप्त दल में शामिल हो गई।

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