फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   Political parties fight on Communal violence bill

सांप्रदायिक हिंसा बिल: आपस में भिड़े नेता

Thu, 14 Aug 2014 09:16 AM IST
Updated Thu, 14 Aug 2014 09:16 AM IST
विज्ञापन
Political parties fight on Communal violence bill

सांप्रदायिक हिंसा मामले पर हुई बहस में इससे निपटने के लिए तंत्र विकसित किए जाने के बदले सत्ता पक्ष और विपक्ष आपस में ही भिड़ गए। विपक्ष ने सत्ताधारी दल को तो सत्ताधारी दल ने विपक्ष को सांप्रदायिक करार दिया।

विज्ञापन


सांप्रदायिक हिंसा से निपटने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करने के मूल विषय पर न तो किसी दल ने राय रखी और न ही किसी ने इसकी जरूरत ही समझी। इस दौरान दोनों ही ओर से जमकर आरोप-प्रत्यारोपों का दौर चला।
विज्ञापन


कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खड़गे ने जहां इन दंगों के लिए संघ परिवार को सीधे तो सरकार को परोक्ष रूप से जिम्मेदार ठहराया और कहा कि लोगों को पता है कि इन दंगों के पीछे कौन है।

विज्ञापन
विज्ञापन

संजीव बालियान को मंत्री बनाने पर सवाल

Political parties fight on Communal violence bill

वहीं भाजपा की ओर से योगी आदित्यनाथ ने न केवल कांग्रेस को उसके कार्यकाल में हुए दंगों की याद दिलाई, बल्कि विपक्ष पर दंगा भड़काने का आरोप लगाते हुए हाल में हुए सांप्रदायिक दंगों की जांच के लिए एसआईटी गठित करने की मांग की।

राजद के पप्पू यादव ने मुजफ्फरनगर दंगा मामले के आरोपी संजीव बालियान को मंत्रिमंडल में शामिल करने के फैसले पर सवालिया निशान लगाए। गृह मंत्री राजनाथ सिंह बृहस्पतिवार को चर्चा का उत्तर देंगे।

सांप्रदायिक हिंसा पर लोकसभा में हुई चर्चा आरोपो-प्रत्यारोपों में तब्दील हो गई। खड़गे ने कहा कि नई सरकार केआते ही देश भर में 600 दंगे हुए। उन्होंने कहा कि दंगे वहीं हो रहे हैं जहां या तो उपचुनाव होने हैं या फिर विधानसभा चुनाव होने हैं।

जमकर हुआ सदन में हंगामा

Political parties fight on Communal violence bill

उन्होंने इसे वोटों के ध्रुवीकरण की शर्मनाक राजनीति बताते हुए कहा कि लोगों को पता है कि इन दंगों के पीछे कौन है। इसी दौरान जब खड़गे ने दंगों के लिए संघ परिवार को जिम्मेदार ठहराया तो सदन में हंगामा शुरू हो गया।

हालांकि खड़गे ने कहा कि दरअसल राजनीतिक फायदा हासिल करने के लिए सरकार इन घटनाओं को रोकने में दिलचस्पी नहीं ले रही है।

इसके बाद भाजपा के योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर पलटवार करने में देरी नहीं लगाई। उन्होंने कहा कि जब कश्मीर से 3.5 लाख कश्मीरी पंडितों को खदेड़ा गया, असम में तीन महीने तक एक धर्म विशेष के लोगों की हत्या होती रही तब किसी ने सांप्रदायिक हिंसा पर चिंता नहीं जताई।

उन्होंने विपक्षी दलों की कथित मुस्लिम तुष्टिकरण की नीतियों पर भी जमकर हंगामा बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा को सांपद्रायिक कहने वाले उत्तर प्रदेश में आतंकी घटनाओं में शामिल लोगों को रिहा करने की कोशिश करने, कोयंबटूर बम धमाके में शामिल लोगों को जेल से रिहा करने पर क्यों चुप हैं।

आद‌ित्यनाथ ने संभाला मोर्चा

Political parties fight on Communal violence bill

उन्होंने उत्तर प्रदेश में हुई सांप्रदायिक घटनाओं के बारे में कहा कि एक जगह मंदिर में लाउडस्पीकर लगाने की इजाजत नहीं दी जा रही तो दूसरी जगह अदालत के आदेश के बावजूद गुरुद्वारा बनाने नहीं दिया जा रहा। योगी ने सवाल किया कि क्या यह धर्मनिरपेक्षता है?

चर्चा के दौरान उस समय हंगामा हो गया जब राजद के पप्पू यादव ने सरकार पर दंगाइयों को संरक्षण देने और महिमामंडित करने का आरोप लगाया। यादव ने कहा कि मुजफ्फरनगर हिंसा में शामिल व्यक्ति को मंत्रिमंडल में शामिल कर आखिर यह सरकार क्या संदेश देना चाहती है।

उन्होंने कहा कि हिंदू होने का उन्हें भी गर्व है, मगर उन्हें आसाराम और रामदेव जैसे धार्मिक गुरू नहीं चाहिए।

दंगों की जांच को बने एसआईटी

Political parties fight on Communal violence bill

योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए संसद में कहा कि जब कश्मीर से 3.5 लाख कश्मीरी पंडितों को खदेड़ा गया, असम में तीन महीने तक एक धर्म विशेष के लोगों की हत्या होती रही तब किसी ने सांप्रदायिक हिंसा पर चिंता नहीं जताई।

भाजपा को सांप्रदायिक कहने वाले उत्तर प्रदेश में आतंकी घटनाओं में शामिल लोगों को रिहा करने की कोशिश पर और कोयंबटूर बम धमाके में शामिल लोगों को जेल से रिहा करने पर क्यों चुप हैं।

उन्होंने हाल में हुए सांप्रदायिक दंगों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के जज की अध्यक्षता में एसआईटी गठित करने की मांग की, ताकि पता चल सके कि दंगों के पीछे कौन है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed