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15 राजनीतिक बातें जो आपने 2014 से पहले सोची न थीं

Thu, 04 Dec 2014 06:02 PM IST
अलखराम सिंह/अमर उजाला, दिल्ली
अलखराम सिंह/अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 04 Dec 2014 06:02 PM IST
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Political Changes in 2014, 15 Unique Political Events Happened in 2014

देश के सबसे बड़े पद पर पहुंचा 'चायवाला'

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प्रधानमंत्री का पद देश में सबसे बड़ा है। इस पद तक पहुंचने की राह इतनी जटिल है कोई साधारण व्यक्ति वहां पहुंच पाने का ख्वाब भी नहीं देखता। वहीं नरेंद्र मोदी के रूप में वह शख्स इस पद पर पहुंचा जो कभी अपने परिवार की जीविका के लिए चाय बेचा करता था। जब देश में विरासत की राजनीति का बोलबाला है तब 2014 से पहले किसे पता था कि कोई चायवाला भी प्रधानमंत्री बन सकता है?

खुद ग्रैजुएट नहीं और बन गईं शिक्षामंत्री

शिक्षा बड़ा मसला है। इस पर मानव संसाधन विकास मंत्री का नियंत्रण होता है। देश की सैकड़ों यूनिवर्सिटी और लाखों स्कूल उनके मार्ग निर्देशन में चलते हैं। लेकिन मोदी सरकार आई तो स्मृति ईरानी को शिक्षा मंत्री बना दिया गया। पहले तो उनकी डिग्री को लेकर विवाद उठा फिर बाद में पता चला कि वे तो स्नातक यानी ग्रैजुएट तक नहीं। क्या आपने 2014 से पहले कभी सोचा था कि ऐसा भी हो सकता है?

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राहुल गांधी 'पप्पू' साबित हो जाएंगे

Political Changes in 2014, 15 Unique Political Events Happened in 2014

वर्ष 2014 आने से पहले राहुल गांधी एक उभरते सितारे थे। कांग्रेस में नंबर दो और प्रधानमंत्री पद के दावेदार। लेकिन बीत रहे साल में उनके सितारे ऐसे गर्दिश में रहे कि मोदी के सामने उनका कद एकदम छोटा हो गया। वे सोशल मीडिया में पप्पू की तरह मशहूर हो गए और उन्हें ज्यादातर बच्चे की तरह पेश किया गया। पार्टी के भीतर भी उनकी कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ गए। इस साल से पहले किसी ने सोचा भी न होगा कि ऐसा हो सकता है।

कांग्रेस की ऐसी दुर्गति हो जाएगी

कांग्रेस भारत की सबसे पुरानी पार्टी है। आजादी से अब तक देश में करीब 80 प्रतिशत समय कांग्रेस का ही शासन रहा है। इस साल के चुनावों से पहले भी देश में गैर कांगेसी सरकारें बनीं हैं लेकिन ऐसी हालत कभी नहीं हुई कि उसे नेता प्रतिपक्ष का पद ही देने लायक न समझा जाए। इस साल हुए आम चुनावों में कांग्रेस सिर्फ 44 सीटों में ही सिमट गई। 2014 से पहले किसी को पता था कि कांग्रेस की ऐसी दुर्गति होगी?

भाजपा बहुमत के बाद भी 370 पर लेगी यू-टर्न?

Political Changes in 2014, 15 Unique Political Events Happened in 2014

भारतीय जनता पार्टी कहती आई है कि जिस दिन वह अपने दम पर सत्ता में आई तो कश्मीर में अनुच्छेद 370 को समाप्त कर देगी। अनुच्छेद 370 वह कानून है जो जम्मू-कश्मीर को विशेष अधिकार देता है। पर हैरानी की बात यह है कि पार्टी बहुमत में होने के बावजूद इस कानून को रद्द करने के बजाए अब इस पर चर्चा करने की बात कर रही है। क्या पहले किसी ने सोचा था कि भाजपा इस मुद्दे पर यू-टर्न लेगी?

लोकसभा में मायावती की पार्टी को जीरो

बहुजन समाज पार्टी एक मात्र ऐसी दलित पार्टी है जिसे किसी राज्य में पूर्ण बहुमत के सरकार चलाने का गौरव हासिल है। मायावती की पार्टी ने 2012 में अब तक का सबसे शानदार प्रदर्शन करते हुए लोकसभा में 20 सांसद पहुंचाए थे। लेकिन 2014 के आम चुनावों मे बसपा को एक भी लोकसभा की सीट नहीं मिली। पार्टी को जीरो मिला। 2014 से पहले किसे पता था मायावती की पार्टी उसके सामने ही जीरो सीट पर सिमट जाएगी?

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वामपंथी सीएम का मोदी को न्योता

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मोदी के कई विरोधियों का उनका मुरीद होने का जैसे इस साल सिलसिला चल पड़ा। कोई उनकी भाषण शैली का मुरीद हुआ तो कोई उनकी प्रशासनिक क्षमता का तो कोई उनके काम करने के तरीके का।

कांग्रेस के नेता शशि थरूर ने मोदी के स्वच्छ भारत अभियान की तारीफ की। उन्हें इसका खामियाजा भी उठाना पड़ा था। कांग्रेस आलाकमान उनसे नाराज हुआ और उन्हें प्रवक्ता पद से हाथ धोना पड़ा था। अब राजनीति में विपरीत ध्रुव माने जाने वाले वामपंथी नेता और ‌त्रिपुरा के सीएम माणिक सरकार भी मोदी के कायल नजर आए।

उन्होंने अपनी कैबिनेट को संबोधित करने के लिए मोदी को बुलाया। 2014 से पहले कौन सोच सकता था कि एक वामपंथी मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपनी कैबिनेट को संबोधित करने का न्योता देगा।

अमित शाह का ऐसा रुतबा

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इससे पहले अमित शाह गुजरात के गृह राज्यमंत्री थे और नरेंद्र मोदी के नंबर दो। लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान उनका कद इतनी तेजी से बढ़ा कि लोगों को एकबारगी यकीन ही नहीं हुआ। आज वे सर्वोपरि हैं। नरेंद्र मोदी के बाद वे भाजपा के सबसे ताकतवर नेता हैं। उन्हें भाजपा के भीतर लोग बेहतरीन रणनीतिकार की तरह देख रहे हैं। 2014 के पहले किसने सोचा था कि मुकदमे झेल रहा एक राज्यबदर नेता इतना ताकतवर हो सकता है।

मोटापे का शिकार हैं अरुण जेटली

भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली को टीवी पर देखकर 2014 के पहले कोई कह सकता था कि वे मोटापे का शिकार हैं और यह इतनी बड़ी समस्या है कि उन्हें दुबला होने के लिए सर्जरी करानी पड़ेगी? हकीकत यह है कि उनका वजन 117 किलो निकला। फिर सर्जरी हुई। अब वे स्वस्थ होकर मैदान में आ गए हैं। राजनीतिक वजन कुछ कम हुआ क्योंकि उनका एक मंत्रालय उनसे लेकर एक नए मंत्री को दे दिया गया। शारीरिक वजन कितना कम हुआ ये अभी पता नहीं।

ताज महल देश का नहीं वक्फ बोर्ड का है?

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दुनिया के सात अजूबों में सुमार और प्यार के प्रतीक के रूम में चर्चित ताज महल के बारे में कौन नहीं जानता? आमतौर पर लोग ताजमहल को देश की साझा संपत्ति ही मानते आ रहे थे। लेकिन हाल में अखिलेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री आजम खान ने ताज को सुन्नी वक्फ बोर्ड की सम्‍पत्ति घो‌षित करने की मांग कर दी? क्या 2014 पहले किसी ने सोचा था ताज किसका है?

समाजवादी जन्मदिन भी ऐसा होता है!
समाजवादी पार्टी डॉ. लोहिया की विचारधारा पर चलने का दावा करती रही है। इस विचारधारा में साधारण जीवन गरीबों की भलाई की बात की गई है। लेकिन समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने अपने 75वें जन्मदिन पर लंदन से मंगाई बग्घी पर सवारी की फिर 75 फिट लंबा केक काटा। यह भी समाजवाद का नया रूप था जो 2014 में ही सामने आया।

मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में नवाज

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लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान पाकिस्तान के मसले पर कांग्रेस पार्टी और यूपीए सरकार को जी-भरकर कोसने वाले नरेंद्र मोदी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में सार्क देशों के सभी राष्ट्रध्यक्षों को बुलाया। इसमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को न केवल न्योता भेजा, तमाम कयासों के बीच वो भी शपथ ग्रहण समारोह में उपस्थित भी हुए।

एक जवान के सिर के बदले कई जवानों का सिर काटकर लाने का दावा करने वाली पार्टी के प्रधानमंत्री अपने शपथ ग्रहण समारोह में सबसे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को बुलाएंगे, ये किसने सोचा था।

केरल में भी शराबबंदी

केरल को आमतौर पर बहुत पढ़ा-लिखा और खुला समाज माना जाता है। केरल की आय का एक बड़ा ज़रिया यहां का पर्यटन है। लेकिन अक्टूबर में यहां की हाईकोर्ट ने 4-स्टार और 5-स्टार होटलों को छोड़कर बाकी जगहों पर शराब बिक्री पर रोक लगाने आदेश दिया है।

फैसला किया गया है कि अगले दस साल में केरल में शराब पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। 2014 से पहले कोई सोच सकता था कि गुजरात की तरह केरल में भी शराब मिलनी बंद हो जाएगी?

नरेंद्र मोदी की पत्नी भी हैं, नाम है - जशोदाबेन

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में आम धारणा थी कि वे अविवाहित हैं। यहां तक कि वो तीन बार गुजरात के मुख्यमंत्री रहे, तीन बार मणिनगर सीट से विधानसभा का चुनाव भी जीते लेकिन उन्होंने कभी भी अपनी वैवाहिक स्थिति को उजागर नहीं किया।

लोकसभा चुनाव में मोदी ने वडोदरा सीट से जब नामांकन कराया तो पहली स्वीकार किया कि जशोदाबेन उनकी पत्नी हैं। क्या आप 2014 के पहले ये जानते थे? हालांकि ये अभी भी कोई नहीं जानता कि वे अपनी पत्नी को अधिकार क्यों नहीं दे रहे हैं।

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