ट्रांसजेंडर के लिए बिल से पहले कारगर नीति की जरूरत
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सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस साल राज्यसभा में ट्रांसजेंडर लोगों के अधिकारों के लिए पास बिल में संशोधन की जरूरत बताई है। उनका कहना है कि इसमें विसंगतियां हैं और सरकार को बिल पास कराने से पहले समुदाय के लिए एक राष्ट्रीय नीति बनानी चाहिए।
अधिवक्ता और मानवाधिकार कार्यकर्ता बीटी वेंकटेश ने कहा कि वह सरकार के प्रयासों का स्वागत करते हैं लेकिन पास बिल में कई कमियां और स्पष्टता की कमी है। इस पर फिर से विचार कर संशोधन किए जाने की जरूरत है।
अलोकतांत्रिक तरीके से तैयार है बिल
सरकार यह समझने में असफल रही है कि जब हमारे पास महिलाओं, बच्चों और
मजदूरों के लिए राष्ट्रीय नीति है तो फिर ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए क्यों
नहीं।
वहीं इस मुद्दे पर काम कर रहे संपूर्ण बेहुरा के अनुसार इस बिल का
मसौदा बहुत ही अलोकतांत्रिक तरीके से तैयार और पास किया गया है। उन्होंने
सवाल उठाया कि इस क्षेत्र में काम कर रहे विशेषज्ञों या समुदाय से एक भी
सलाह लिए बिना कोई ट्रांसजेंडर के हित और अधिकारों पर बात कैसे कर सकता है।