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बच्चा जेल में घायल हुए सिपाही की मौत

Sat, 13 Dec 2014 01:24 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ Updated Sat, 13 Dec 2014 01:24 PM IST
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policeman martyr in juvenile jail disturbance.

मेरठ में राजकीय बाल संप्रेक्षण गृह में किशोरों के हमले में घायल सिपाही ओमप्रकाश की मौत हो गई। शुक्रवार तड़के 4:45 बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस लाइन में राजकीय सम्मान के साथ शहीद सिपाही को अंतिम विदाई दी गई। पुलिस-प्रशासनिक अफसरों और राजनीतिक लोगों ने शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद परिजन शहीद का पार्थिव शरीर पैतृक गांव नगला फैजलपुर (बुलंदशहर) ले गए।

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बृहस्पतिवार शाम 4:30 बजे बुलंदशहर से पेशी के बाद लाए गए किशोरों को संप्रेक्षण गृह में दाखिल किया जा रहा था। इस दौरान किशोरों ने एचसीपी मंतू सिंह और हेड कांस्टेबल सत्यवीर सिंह पर हमला बोल दिया था। सूचना पर प्रतिसार निरीक्षक (आरआई) श्रीभगवान यादव टीम के साथ मौके पर पहुंचे, तो किशोरों ने उन्हें भी घेरकर पथराव किया और लकड़ी के फट्टे (क्रिकेट बैट वाली लकड़ी) से बुरी तरह पीटा। इस हमले में सिपाही ओमप्रकाश के सिर में गहरी चोट लगी थी। इसके बाद उन्हें सुशीला जसवंत राय अस्पताल में वेंटीलेटर पर रखा गया था। डॉक्टर देर रात तक जुटे रहे, मगर सिपाही की जान नहीं बचाई जा सकी। शुक्रवार तड़के करीब 4:45 बजे डॉक्टरों ने ओमप्रकाश को मृत घोषित किया। नौचंदी थाना पुलिस ने शव मोर्चरी पहुंचाया।
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नहीं थमे बेटे के आंसू:

पूर्वाह्न करीब 11:30 बजे पोस्टमार्टम होने पर सिपाही का पार्थिव शरीर पुलिस लाइन लाया गया। यहां डीआईजी रमित शर्मा, जिलाधिकारी पंकज यादव, एसएसपी ओंकार सिंह, एसपी सिटी ओपी सिंह ने पुष्प चक्र अर्पित किया। सपा नेता इसरार सैफी और भाजपा नेता विनीत अग्रवाल शारदा ने भी श्रद्धांजलि दी। इस दौरान तमाम पुलिसकर्मियों की आंखें नम हो गईं। सिपाही ओमप्रकाश के दो बेटे और दामाद भी मौजूद थे, जो भावुक हो गए। बेटा हेमंत तो पिता के पैरों के पास बैठकर फफक-फफककर रोने लगा। इसके बाद पार्थिव शरीर को पैतृक गांव ले गए। वहीं पर राजकीय सम्मान में शहीद का अंतिम संस्कार किया गया। यहां से सीओ डीपी सिंह और पुलिस लाइन से गारद भी शहीद सिपाही के साथ भेजी गई थी।
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केस हत्या में तरमीम:
मामले में एचसीपी मंतू सिंह की तरफ से नौचंदी थाने पर 25 किशोरों को नामजद और 125 अज्ञात के खिलाफ बृहस्पतिवार रात ही कातिलाना हमले और अन्य गंभीर आरोपों में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। ओमप्रकाश की मौत के बाद केस हत्या में तरमीम कर दिया गया है। उधर, पुलिस सूत्रों के मुताबिक शहीद सिपाही के परिजनों को आर्थिक सहायता के तौर पर करीब 50 लाख रुपये दिए जाएंगे, जिसमें से 35 लाख विभागीय और 15 लाख रुपये पुलिसकर्मी अपने वेतन से इकट्ठा करके देंगे।

चीखता रहा ओमप्रकाश, भागते रहे साथी

policeman martyr in juvenile jail disturbance.

सिपाही ओमप्रकाश बचाओ-बचाओ चिल्ला रहा था। संप्रेक्षण गृह की सीढ़ियों से गिरते-पड़ते वह नीचे तो आ गया, मगर किशोरों ने पकड़ लिया। जमीन पर गिराकर ईंट-पत्थर से हमला किया। तब उसकी चीखों से संप्रेक्षण गृह गूंज उठा था। अफसोस ये है कि सिपाही के साथ पहुंचे पुलिसकर्मी अपनी जान बचाकर भागते रहे। ओमप्रकाश की चीख किसी ने नहीं सुनी।

संप्रेक्षण गृह के पास में गांधीनगर मोहल्ला है। बृहस्पतिवार शाम जब बंदी किशोरों ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया, तो संप्रेक्षण गृह और गांधीनगर मोहल्ले के बीच स्थित नाले की पटरी पर लोगों की भीड़ लग गई थी। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि 100 से ज्यादा किशोर एक साथ पुलिस वालों पर टूट पड़े थे। किसी के हाथ में ईंट थी, तो किसी के क्रिकेट बैट बनाने वाली लकड़ी के फट्टे। पुलिस वाले भाग रहे थे, पीछे-पीछे किशोर पथराव करते जा रहे थे। तभी एक को (ओमप्रकाश) किशोरों ने पकड़ कर गिरा लिया। चूंकि ओमप्रकाश की उम्र 55 वर्ष हो चुकी थी और वह अन्य पुलिसकर्मियों की तरह दौड़ नहीं लगा सका। इसके बाद उसके सिर में ईंट मारी और फट्टे बरसाए।

तब तक खून से लथपथ हो चुका था:
बाकी पुलिसकर्मी वहां से भागकर सीधे मेन रोड पर पहुंच गए। वहां ओमप्रकाश की मौजूदगी न होने पर पुलिसकर्मियों में हड़कंप मच गया। इस बीच, किशोरों की भीड़ संप्रेक्षण गृह में वापस पहुंची, तो पुलिसकर्मी फिर से संप्रेक्षण गृह परिसर में आए। खून से लथपथ पड़े ओमप्रकाश को उठाकर छोटा हाथी में अस्पताल भिजवाया गया।

दहशत ने हमसे हिम्मत छीन ली थी:
गांधीनगर मोहल्ले के लोगों ने पुलिस पर हमला होते देखा, मगर कोई बचाने नहीं आया। शुक्रवार को जब लोगों से इस बारे में बात की गई, तो बताया कि किशोर इतने खूंखार होकर हमला कर रहे थे कि हम बीच में जाते, तो घायल ही होते। इन किशोरों ने यहां जैसी गुंडागर्दी और अराजकता मचा रखी है, उसकी दहशत में भी लोग पुलिसकर्मियों को बचाने के लिए आगे नहीं आ सके।

ईंट, बैट और रॉड से ताबड़तोड़ प्रहार

policeman martyr in juvenile jail disturbance.

हमले के दौरान संप्रेक्षण गृह के किशोरों ने हैवानियत की हद पार कर दी। सिपाही ओमप्रकाश पर ईंट, बैट और लोहे के रॉड से ताबड़तोड़ प्रहार किए। इससे उसके सिर में 17 गंभीर चोटें आईं। सिर की कोई हड्डी साबुत नहीं बची थी। दिमाग में खून जमने से मस्तिष्क ने काम करना बंद कर दिया था। बृहस्पतिवार शाम अचानक आई सूचना पर एक झटके में आरआई श्रीभगवान यादव के साथ संप्रेक्षण गृह पहुंचने वाले सिपाही ओमप्रकाश को पता नहीं था कि वह मौत को गले लगाने जा रहा है। मौत भी ऐसी कि सुनकर रूह कांप जाए। सिर पर इतने भीषण प्रहार किए गए जैसे किशोर बंदी सिपाही को मार डालने की जिद पर ही अड़े थे। डॉक्टरों के मुताबिक, सिपाही के सिर पर बेरहमी से प्रहार किए गए थे। सिर की कोई हड्डी ऐसी नहीं मिली, जो टूटी न हो। दिमाग के आसपास की नस फट गई थीं। इस कारण खून जमने से दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था। इससे सिपाही कोमा में चला गया था।

बंदी वाहन सहित एचसीपी को जलाने की थी साजिश
संप्रेक्षण गृह के किशोरों के मंसूबे बेहद खतरनाक थे। वे एचसीपी मंतू सिंह को बंदी वाहन सहित जलाना चाहते थे। इसी साजिश के तहत बंदी वाहन में आग लगाने की कोशिश की गई। दरअसल, जब संप्रेक्षण गृह की दूसरी मंजिल से पुलिसकर्मी नीचे आए, तो किशोरों की भीड़ उनके पीछे थी। किशोर पथराव करने के साथ पुलिस कर्मियों पर डंडे बरसा रहे थे। घबराहट और जान बचाने की जद्दोजहद में एचसीपी मंतू सिंह संप्रेक्षण गृह परिसर में खड़े बंदी वाहन में घुस गया और अंदर से कुंडी बंद कर ली। किशोर बंदियों ने वाहन का गेट तोड़ने का खूब प्रयास किया। पथराव कर विंड स्क्रीन और खिड़की तोड़ी। नाले के उस पार से गांधीनगर मोहल्ले के लोग यह सब देख रहे थे।

लोगों ने बताया कि कुछ किशोर बंदी चिल्ला रहे थे कि आग लगा दो गाड़ी में। कुछ कह रहे थे, इसका डीजल टैंक फोड़ो, तब लगेगी आग। उधर, मंतू सिंह गाड़ी के अंदर से हाथ जोड़कर रहम की गुजारिश कर रहा था। बावजूद इसके अराजक किशोरों ने तोड़फोड़ बंद नहीं की। बाद में जब कंट्रोल रूम के निर्देश पर नौचंदी, मेडिकल और सिविल लाइन थाने की पुलिस मौके पर पहुंची, तब किशोरों ने अपने पांव पीछे खींचे और संप्रेक्षण गृह में घुसकर मेन गेट पर लगे चैनल को बंद कर लिया।

अफसोस! आखिरी वक्त नहीं मिल पाए

policeman martyr in juvenile jail disturbance.

तीन दिन पहले ही तो पिताजी हमसे मिलकर गए थे। क्या पता था कि उन्हें आखिरी बार विदा कर रहे हैं। कल (बृहस्पतिवार) शाम जब हमें पता चला कि वे बुरी तरह घायल हो गए हैं तो हमें यकीन नहीं हुआ। रास्ते भर यही प्रार्थना करते रहे कि पिताजी हमें सही-सलामत मिलें। लेकिन अफसोस, आखिरी वक्त हम उनसे मिल तक नहीं पाए। इतना कहकर शहीद सिपाही ओमप्रकाश के बेटे और दामाद फूट-फूटकर रो पड़े।

संप्रेक्षण गृह में बवाल में शहीद सिपाही ओमप्रकाश के भाई, दो पुत्रों और दामाद के आंसू नहीं थम रहे थे। मेडिकल मोर्चरी और पुलिस लाइन में परिजन कुछ बोलना चाहते थे। लेकिन सुबकियों के बीच उनकी जुबां से शब्द नहीं फूट रहे थे। ओमप्रकाश का बड़ा बेटे हेमंत बी-फार्मा कर रहा है। छोटा बेटा दुष्यंत हाईस्कूल का छात्र है। तीन बेटियों प्रेमलता, बीना और सुरभि की शादी हो चुकी है, जबकि उषा अविवाहित है।

हेमंत ने बताया कि बृहस्पतिवार देर शाम हमें पुलिस लाइन से फोन आया था कि आपके पिताजी बुरी तरह घायल हो गए हैं। तुरंत मेरठ आ जाओ। यह सुनकर ओमप्रकाश की पत्नी निहाल देवी बदहवास हो गईं। यह मनहूस खबर मिलते ही हेमंत अपने चाचा बलवीर, मां, छोटे भाई और बहनोई पुष्पेंद्र के साथ देर रात ही जसवंत राय अस्पताल पहुंच गए थे। बकौल हेमंत, बुलंदशहर से मेरठ आते समय हम यही प्रार्थना कर रहे थे कि पिताजी ठीकठाक मिलें। यहां आकर पता चला कि सिर में ज्यादा चोट लगने से उनकी हालत नाजुक है। पूरी रात आंखों में ही कटी। शुक्रवार तड़के हमें पता चला कि पिताजी नहीं रहे।

पुलिस अधिकारियों ने दी सांत्वना:
पुलिस लाइन में शहीद ओमप्रकाश को राजकीय सम्मान के साथ विदाई देते समय परिजन बिलख पड़े। डीआईजी रमित शर्मा और एसएसपी ओंकार सिंह ने परिजनों को सांत्वना देते हुए भरोसा दिलाया कि पुलिस महकमा उनके साथ है। सिपाही ओमप्रकाश की कमी तो पूरी नहीं की जा सकती। लेकिन उनकी जो जिम्मेदारी अधूरी रह गई, उसे पूरा करने के हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।

पुलिस-प्रशासन आखिर कब जागेगा:

पुलिस लाइन में श्रद्धांजलि के दौरान भाजपा नेता विनीत अग्रवाल शारदा ने पुलिस और प्रशासनिक अफसरों से यही सवाल किया कि आखिर प्रशासन कब जागेगा। थोड़े से अंतराल में दूसरा जवान शहीद हुआ है। लिसाड़ी गेट में बदमाशों ने खुलेआम तो यहां किशोर बंदियों ने दुस्साहस दिखाते हुए सिपाही की जान ले ली। संप्रेक्षण गृह में बच्चे नहीं, बालिग रह रहे हैं। आसपास माहौल इतना खराब हो गया है कि मां-बहनों का रहना दुश्वार हो गया है। अफसरों ने इस समस्या का स्थायी हल निकालने का आश्वासन दिया।

बवाल के बाद टूटी शासन की नींद

policeman martyr in juvenile jail disturbance.

संप्रेक्षण गृह बवाल में सिपाही की शहादत के बाद शासन की नींद टूटी है। शुक्रवार को प्रमुख सचिव ने जहां कई बार मामले में अपडेट लेते हुए जरूरी निर्देश दिए तो शनिवार को निदेशक महिला कल्याण एवं बाल विकास मेरठ पहुंच रहे हैं।

बाल संप्रेक्षण गृह में लगातार बवाल हो रहा है। लेकिन शासन इस तरफ से आंख बंद किए बैठा रहा। जिला प्रशासन लगातार बढ़ते बवाल के मद्देनजर यहां बंद दूसरे जिलों किशोरों को उनके जिलों में शिफ्ट करने की मांग करता आ रहा है। लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। नतीजा ये हुआ कि बवाली किशोरों ने बृहस्पतिवार को पुलिस फोर्स पर हमला कर एक सिपाही की जान ले ली। सिपाही की मौत के बाद शासन की आंख खुली और कार्रवाई की तैयारियां शुरू हुई।

शुक्रवार को प्रमुख सचिव महिला कल्याण एवं बाल विकास रेणु कुमार ने कई बार डीएम पंकज यादव से बात की और पूरे मामले पर अपडेट लेते रहे। इस दौरान उन्होंने कहा कि इस माह के अंत तक सभी गैर जनपदों के किशोरों उनके मूल जिले में शिफ्ट किया जाएगा। साथ ही बालिग नजर आने वाले किशोरों का मेडिकल टीम से परीक्षण कराने का भी निर्देश दिया, ताकि बालिग हो चुके किशोरों को कारागार में शिफ्ट किया जा सके।

इसके अलावा प्रमुख सचिव ने पूरे मामले की जांच के लिए निदेशक महिला कल्याण एवं बाल विकास को मेरठ जाने का निर्देश दिया है। इस पर निदेशक डीएन वर्मा शनिवार मेरठ पहुंच रहे हैं।

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