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पुलिस ने ट्विटर से 'सुलझाए' दो बड़े केस

Fri, 31 Oct 2014 02:22 AM IST
Updated Fri, 31 Oct 2014 02:22 AM IST
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police solve two cases through twitter.

बहुत से लोगों के लिए ट्विटर सिर्फ़ एक सोशल मीडिया वेबसाइट है, लेकिन बंगलौर की पुलिस इसका इस्तेमाल अपराध रोकने और अपराधियों को पकड़ने के लिए बख़ूबी कर रही है।

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उसने अज्ञात ट्विटर अकाउंट्स से मिलने वाली जानकारी के आधार पर नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले एक गिरोह और देह व्यापार के एक कथित नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है।
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पहला मामला एक ऐसे गिरोह का है, जो नौकरी के इच्छुक लोगों से पैसे लेकर आईटी कंपनियों में काम के अनुभव का फर्ज़ी प्रमाण पत्र जारी करता था। इस सिलसिले में पुलिस ने 26 लोगों को गिरफ़्तार किया है जो कथित तौर पर 25 कंपनियों के फर्जी लेटरहेड पर एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट जारी कर रहे थे।
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इमरान कुरैशी की रिपोर्ट
बंगलौर की पुलिस ने ट्विटर पर अपना ईमेल साझा करके लोगों से मदद की अपील की थी। इससे मिलने वाली जानकारी इन दो मामलों में मददगार रही। पुलिस को नौकरी के नाम पर धोखाधडी करने वाली कंपनी के बारे में लोगों से जानकारी मिली थी।

ट्विटर पर लोगों की प्रतिक्रिया से उत्साहित बंगलौर के पुलिस उपायुक्त (अपराध) अभिषेक गोयल ने अपने ट्विटर हैंडल से देह व्यापार/तस्करी से जुड़ी जानकारी देने को कहा। गोयल ने कहा, "अगले ही दिन मुझे ट्विटर पर एक अनाम संदेश मिला, जिसके साथ इंटरनेट पर प्रकाशित एक अश्लील विज्ञापन का लिंक साझा किया गया था। हमने वेबसाइट पर दिए नंबर पर संपर्क करने के लिए एक व्यक्ति को भेजा।"

बंगलौर के संयुक्त आयुक्त (अपराध) हेमंत निंबालकर ने कहा, "हम चौंक गए कि यह नंबर कई राज्यों में देह व्यापार के कॉल सेंटर की तरह काम कर रहा था।" उन्होंने कहा, "अगर आप विज्ञापन वाले उस नंबर पर फ़ोन करें तो एक बीपीओ ऑपरेटर की तरह आपको विकल्प वाले शहर का नंबर दिया जाएगा। और यह व्यक्ति उन केंद्रों से अपना कमीशन लेगा।"

उन्होंने कहा कि वेश्यालय एक व्यावसायिक काम्पलेक्स मे स्थिति था और "लड़कियों को उनकी मर्जी के ख़िलाफ़ झूठी नौकरी का झांसा देकर वेश्वृत्ति के लिए मजबूर किया जाता है।"

नौकरी के नाम पर ठगी

police solve two cases through twitter.

वेश्यावृत्ति का ये नेटवर्क चलाने वालों की गिरफ़्तारी के बाद पुलिस ने नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी पर ध्यान दे रही है। गोयल ने कहा है कि पुलिस ने ऐसी क़रीब 169 फर्जी कंपनियों की पहचान की है।

पुलिस के अनुसार एक कंपनी नौकरी के इच्छुक लोगों से रजिस्ट्रेशन कराती हैं, जिसके नाम पर उनसे लगभग पांच हजार रुपये लिए जाते हैं और नौकरी न मिलने की स्थिति में सिर्फ़ एक हजार रुपए ही लौटाए जाते हैं।

इस तरह कंपनी ने 2.75 करोड़ रुपए बनाए और केवल 54.37 लाख रुपए लौटाए। निंबालकर ने कहा, "दिल्ली से एक ख़बरी ने ईमेल करके हमें जानकारी दी। ये खबरी पुलिस उपायुक्त (अपराध) का अकाउंट को फॉलो करता था।"

गोयल ने कहा, "हमने इस मामले को सुलझा लिया है लेकिन हमारे पास मामलों की बहुत लंबी सूची है। हम इस बात पर भी विचार कर रहे हैं कि कैसे स्थानीय पुलिस स्टेशन या केंद्रीय अपराध शाखा (सीसीबी) के अधिकारक्षेत्र में इस तरह की गतिविधियों को जारी रखा जा सकता है।"

निंबालकर ख़ुश है कि बंगलौर के नागरिक असामाजिक गतिविधियों के बारे में जानकारियां साझा कीं।

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