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VIP सुरक्षा: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को लगाई फटकार
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Fri, 08 Feb 2013 01:43 AM IST
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देश की राजधानी में महिलाओं के खिलाफ बदस्तूर जारी अपराधों को रोकने में नाकाम रहने पर सुप्रीम कोर्ट ने वीआईपी सुरक्षा के लिए बड़ी तादाद में पुलिसकर्मियों की मनमानी तैनाती पर सवाल उठाते हुए कड़ी नाराजगी जताई है।
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सर्वोच्च अदालत ने दिल्ली सरकार से सुरक्षाकर्मियों के दुरुपयोग पर यह स्पष्टीकरण मांगा है कि सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारियों या अन्य अधिकारियों को किस आधार पर सुरक्षा उपलब्ध कराई गई है। बेवजह उन्हें सुरक्षा का सुख किस कारण से दिया जा रहा है।
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जस्टिस जीएस सिंघवी व जस्टिस एलएल गोखले की पीठ ने दिल्ली सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सिद्धार्थ लूथरा से पूछा कि क्या कुछ लोगों को उपलब्ध कराई गई सुरक्षा के लिए कोई स्पष्टीकरण है आपके पास? बड़ी संख्या में जो नाम दिल्ली सरकार की ओर से दिए गए हैं, उनमें से कई पूर्व अधिकारी या उनसे संबंधित हैं। यह कौन से स्तर का वर्गीकरण है। पीठ ने यह टिप्पणी दिल्ली सरकार की ओर से सीलबंद लिफाफे में पेश उस सूची पर की, जिसमें सुरक्षा लेने वाले वीआईपी लोगों के नाम दिए गए।
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पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने हलफनामे के अंश पढ़ते हुए दलील दी कि दिल्ली गैंगरेप की घटना रुक सकती थी यदि वीपीआई सुरक्षा में इतनी बढ़ी तादाद में पुलिसकर्मी तैनात करने की बजाय जनता की सुरक्षा में लगाए जाते। उनको सार्वजनिक वाहनों की जांच में लगाया जा सकता था। मौजूदा हालात में भी महज 3400 पुलिसकर्मी ही दिल्ली में जनता के लिए हैं।
साल्वे के इस तर्क का केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल इंदिरा जय सिंह ने भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता से लिया जाना चाहिए। इस पर पीठ ने कहा कि हाल ही में दिल्ली की मुख्यमंत्री ने कहा था कि महिलाएं राजधानी में सुरक्षित नहीं है।
जस्टिस गोखले ने दिल्ली में बड़ी तादाद में सुरक्षाकर्मियों को वीआईपी सुरक्षा में लगाए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि कुछ लोगों को सुरक्षा मुहैया कराए जाने के लिए और सबको ताक पर नहीं रखा जा सकता। भला क्यों कुछ पूर्व अधिकारियों सैकड़ों पुलिसकर्मियों की सुरक्षा प्रदान की गई है। पीठ की ओर से कड़ी नाराजगी जताए जाने पर लूथरा ने कहा कि वह विस्तृत हलफनामा दाखिल करेंगे कि आखिर क्यों इन लोगों को सुरक्षा मुहैया कराई गई है।
दस राज्यों ने दिया हलफनामा
मामले में सर्वोच्च अदालत में दिल्ली के अलावा गुजरात, उत्तराखंड, सिक्किम, बिहार, गोवा, जम्मू-कश्मीर, झारखंड और छत्तीसगढ़ सहित दस राज्यों ने हलफनामा दाखिल कर दिया है। अन्य राज्यों को पीठ ने अंतिम मौका देते हुए सोमवार तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत इस मसले पर 14 फरवरी को अगली सुनवाई करेगी।
दिल्ली में वीआईपी सुरक्षा में लगे हैं 8000 पुलिसकर्मी
दिल्ली सरकार ने हलफनामे में कहा है कि वीआईपी सुरक्षा पर 341 करोड़ रुपये का सालाना खर्च है। आठ हजार से भी ज्यादा पुलिसकर्मी और अधिकारी वीआईपी सुरक्षा में लगे हुए हैं। जबकि तफ्तीश के लिए महज 3400 पुलिसकर्मी हैं।