पुलिस, अर्धसैनिक बलों के जवानों को नहीं ‘शहीद’ का दर्जा

नई दिल्ली/एजेंसी Updated Sun, 21 Oct 2012 11:42 PM IST
Police, paramilitary forces personnel not 'martyr' status
भले ही देश ने ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों की शहादत पर रविवार को श्रद्धांजलि अर्पित की लेकिन इन जवानों को सशस्त्र बलों के जवानों की तरह अभी तक ‘शहीद’ का दर्जा नहीं दिया गया है।

एक वरिष्ठ केंद्रीय पुलिस अधिकारी ने कहा कि वास्तविकता यह है कि थलसेना, नौसेना और वायुसेना के अधिकारी और जवान ड्यूटी के दौरान मारे जाते हैं तो सरकारी गजट में उन्हें शहीद घोषित करने की आधिकारिक जानकारी है लेकिन पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों के लिए ऐसा कोई आदेश नहीं है।

गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार सितंबर 2011 से इस साल अगस्त के बीच पुलिस और अर्धसैनिक बलों के कुल 546 जवानों ने ड्यूटी के दौरान ‘अप्राकृतिक’ कारणों से अपनी जान गंवाई है। केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने यहां एक स्मृति समारोह में इन जवानों को श्रद्धांजलि दी।

पहली बार सभी केंद्रीय बलों ने एक साथ शहीद साथियों को श्रद्धासुमन अर्पित किए। गृह राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने संसद में हाल ही में जानकारी दी थी कि पिछले वर्ष इस मसले पर बुलाई सचिवों की समिति (सीओएस) की बैठक में इस बारे में कोई सहमति नहीं बन सकी।

सिंह ने इस साल आठ मई को लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया था कि सीओएस ने 14 सितंबर 2011 को अर्धसैनिक बलों के जवानों को शहीद का दर्जा देने पर विचार किया लेकिन आम सहमति नहीं बन सकी। इस बारे में सीएपीएफ की ओर से मांग की गई थी।

अर्धसैनिक बलों के शीर्ष सूत्रों ने कहा कि सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, आरपीएफ और अन्य केंद्रीय बलों के सैनिकों को शहीद का दर्जा देने संबंधी अनुरोध गृहमंत्रालय से किया गया है। ये सभी सुरक्षा बल राज्य पुलिस बलों और अपनी विशेष ऑपरेशन यूनिटों के साथ देश के अंदर नक्सल विरोधी या अन्य आतंकवादी विरोधी अभियानों में तैनात किए जाते रहे हैं।

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