फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   points on start up india action plan

6 बातें: स्टॉर्ट अप के जरिए आप बनेंगे खुद के मालिक

Sun, 17 Jan 2016 01:31 PM IST
Updated Sun, 17 Jan 2016 01:31 PM IST
विज्ञापन
points on start up india action plan

मेक इन इंडिया के बाद केंद्र सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था और लोगों के लिए रोजगार सृजन करने हेतु स्टार्ट अप इंडिया स्कीम को लॉंच किया है।

विज्ञापन


इस स्कीम के अंतर्गत उन लोगों को खास तोहफा दिया गया है जो अपना व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं। यह प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है।
विज्ञापन


इसे लॉंच करते वक्त पीएम मोदी ने कहा कि हमारी सरकार स्टार्ट अप को प्राथमिकता के साथ शुरू करने जा रही है और इसे कैंपेन को प्राथमिकता देंगे। आईए हम आपको बताते हैं कि क्या है स्टार्टअप इंडिया स्कीम और इसका देश के विकास पर क्या असर पड़ा है एवं भविष्य में कैसा असर पड़ेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

स्टार्ट-अप के मामले में विश्व बाजार में भारत की स्थिति

points on start up india action plan

भारत अब व्यावासाय करने के नजरिए से दुनिया के चुनिंदा देशों में शामिल होने की ओर है। कई ऐसी कंपनियां भी हैं जो विदेशों को छोड़कर भारत आ रही है। इस दौर में कई ऐसी कंपनियां भी हैं जो विदेशों को छोड़कर भारत आ रही है। बता दें कि ट्विटर जिपडॉयल के फाउंडर वेलरी वेगनर ने अमेरिका छोड़कर भारत में काम शुरू किया।

वहीं जूमकार के को-फाउंडर ग्रेग मोरान ने जानी-मानी सिलिकॉन वैली को छोड़ कर, अपना कारोबार बंगलूरू में शुरू किया। यही नहीं कुल विदेशी कंपनियों मे से 45 फीसदी कंपनियां ऐसी भी हैं जो भारत में 10 फीसद का स्टार्ट अप डाल देते हैं। ग़र हम बात करें कि स्टार्टअप के मामले में भारत की स्थिति की करें तो यहां हालात ठीक-ठाक दिखते हैं।

‘ट्रैकर सीबी इनसाइट’ के मुताबिक ‘यूनिकॉर्न क्लब’ के भीतर दुनिया की 107 ग्लोबल फर्मों में आठ भारतीय कंपनियां शामिल हो चुकी हैं। ये कंपनियां 1 अरब डॉलर से ज्यादा की इन कंपनियों में फ्लिपकार्ट, स्नैपडील, म्युसिग्मा, हाऊसिंग डॉट कॉम, क्लियर ट्रिप, ओला भी शामिल हैं। इनके अलावा ऑनलाइन क्लासीफाइड सर्विस कंपनी ‘क्विकर’ और मोबाइल विज्ञापन प्लेटफॉर्म देने वाली कंपनी ‘इनमोबी’ भी इस क्लब में शामिल हैं।

ये हैं 2015 के प्रसिद्ध स्टार्ट अप

points on start up india action plan

साल 2015 में भी कई ऐसे स्टार्टअप शुरू हुए जिन्होंने खासी प्रसिद्धि पाई। जिनमें क्राउड फायर, प्राइस बाबा, रिक्रूटमेंट एप 'सुपर' और विजरॉकेट शामिल है। बताते चले कि क्राउडफायर ट्विटर व इंस्टाग्राम का फ्रैंड मैनेजमेंट एप है। इसके जरिए इंटरप्राइजेस अपने असक्रिय फॉलोअर्स को ट्विटर पर देख सकते हैं। यह कई सेवाएं देता है, जिसके दुनिया में 80 लाख यूजर्स हैं। कंपनी का रेवेन्यू 6 करोड़ रु. को पार कर चुका है।

प्राइस बाबा एक लोकल प्रोडक्ट सर्च इंजन है। यह ग्राहकों का स्थानीय व ऑनलाइन रिटेलर्स के साथ संपर्क करने में मदद करता है। इसमें बेहतर ढंग से कीमतों की तुलना करते हुए किफायती चीजों की जानकारी ले सकते हैं। बड़े स्टार्ट अप में शामिल रिक्रूटमेंट एप ‘सुपर’को हाल ही में वायरलट्रिक्स ने खरीदा है। इसका मकसद नौकरी के इच्छुक लोगों को कंपनियों से जोड़ना है। अब तक 5 लाख लोग इसमें पंजीकृत हो चुके हैं।

इसी सूची में शामिल विजरॉकेट यूजर के व्यवहार का विश्लेषण करने वाला उपकरण देता है। इससे न केवल शॉपिंग के नोटिफिकेशन को हासिल किया जा सकता है बल्कि खरीद करने पर यह धन्यवाद भी देता है।

ऐसे होगा फंड का जुगाड़

points on start up india action plan

एक स्टार्टअप के लिए ग़र आपके पास फंड की कमी है तो उसकी भी व्यवस्था हो जाती है। जब आप अपनी पूंजी व बैंक लोन की औपचारिकता पूरी कर देते हैं तो कंपनी लॉ के तहत रजिस्ट्रेशन होता है। इसके बाद मंत्रालय गाइडलाइन के मुताबिक लघु, छोटे व मध्यम एंटरप्रइजेज से अप्रूवल लेना होता है।

ये सब करने के बाद आपको 1 करोड़ रु. तक का फंड बैंक से बिना कुछ गिरवी रखे मिल सकेगा। एक स्टार्टअप शुरू करने के लिए आपको अपना प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार रखना होगा एवं उत्पाद के लिए पर्यावरण व श्रम मंत्रालय से एनओसी भी लेना होगा।

इतना कुछ करने के बाद अगर आपको अपने स्टार्ट अप में थोड़ी सी भी सफलता मिली तो विदेशी निवेशक या वेंचर कैपिटलिस्ट मिल जाते हैं।

यहां से मिलती है मदद

points on start up india action plan

स्टार्टअप शुरू करने के लिए आपको देश में कई जगहों से मदद भी मिल सकती है। जिसमें इंडियन एंजिल नेटवर्क इनक्यूबेटर शामिल है। यह भारत सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी का एंटरप्रिन्योशिप कार्यक्रम है। यहां बेहतरीन आइडिया मिलने पर किसी भी वेंचर को 18-24 माह तक इनक्यूबेट किया जाता है।

वहीं टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर से आपको आईआईटी दिल्ली द्वारा केवल तकनीकी कारोबार को बढ़ाने में मदद दी जाती है। आईआईटी किसी भी अच्छे बिजनेस आइडिया को वेंचर कैपिटलिस्ट की मदद से आगे बढ़ाती है। स्टार्टअप में आपकी मदद टीलैब्स भी कर सकता है जो टाइम्स इंटरनेट लिमिटेड का एसेलेरेटर है जो 10 फीसदी हिस्सेदारी के बदले 10 लाख रुपए तक फंड करता है। 13 माह के इस प्रोग्राम पर कारोबार जगत की बड़ी हस्तियां सलाह देती हैं।

कुछ ऐसा ही काम सोसायटी फॉर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप भी करती है जिसमें आईआईटी मुंबई द्वारा अपने ही छात्रों के किसी भी शोध पर काम कराया जाता है। इसे सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी का भी सपोर्ट मिलता है। ऐसी किसी मदद के लिए आप सिडबी इनेवेशन एंड इनक्यूबेशन सेंटर का रुख भी कर सकते हैं। यह सेंटर आईआईटी कानपुर का यह प्रोग्राम लघु उद्योग विभाग से सहयोग से चलता है। यह तकनीकी आधारित आइडिया को सपोर्ट करके उन्हें कारोबार की शक्ल देने में मदद करता है।

स्टार्टअप के लिए अगर आपको मदद चाहिए तो आप अनलिमिटेड इंडिया, मुंबई भी जा सकते हैं जहां विशेषज्ञों की देखरेख में इनक्यूबेशन के साथ कारोबार शुरू करने के लिए पैसा भी दिया जा सकता है। 3 टियर फंडिंग में 80 हजार से 20 लाख तक की फंडिंग यहां से हो सकती है।

लेकिन ये है कड़वी सच्चाई

points on start up india action plan

लेकिन इतना कुछ होने के बाद भी एक स्टार्ट अप के सामने कई विफलताए हैं। फार्च्यून द्वारा किए गए एक सर्वे में स्टार्ट अप की विफलता के कारण गिनाए गए हैं।

इस सर्वे के मुताबिक 100 में से 90 स्टार्ट अप विफल रहते हैं, वहीं 42 फीसदी स्टार्ट अप ऐसे होते हैं जिनके प्रोडक्ट की बाजार में जरूरत ही नहीं थी।

इन विफलताओं के बावजूद भी भारत में स्टार्ट अप के हालात बेहतर है।

साल-दर-साल बढ़ता ग्राफ

points on start up india action plan

भारत में हर माह 500 से 800 स्टार्ट अप शुरू होते हैं। इनमें से 28 फीसदी स्टार्ट अप देश में बंगलुरू शहर के भीतर हैं। भारत में स्टार्ट अप की दर 270 फीसद से आगे है। इनमे से 70 फीसदी निवेश घरेलू जरूरतों के स्टार्ट अप में हुआ। भारत में फिलहाल स्टार्ट अप शुरू करने वाले 13 प्रमोटर्स ऐसे हैं जिनकी उम्र 36 साल के कम की है।

इन स्टार्ट अप्स की मदद से अगले 5 साल की 3 लाख नौकरियों के खड़े होने की उम्मीद है। वहीं नैस्कॉम का मानना है कि  2020 तक 11,500 स्टार्ट अप शुरू होंगे। स्टार्ट अप के जरिए भारत ने 240 करोड़ डॉलर की फंडिंग आकर्षित की है। भारत में स्टार्ट अप का ग्राफ साल-दर साल बढ़ता जा रहा है।

साल 2010 में देश में जहां मात्र 480 स्टार्ट अप थे वहीं 2011 में यह संख्या बढ़कर 525 हो गई थी। 2012 में 65 स्टार्ट अप का इजाफा हुआ, जिसके बाद कुल 590 स्टार्ट अप हो गए। 2013 के भीतर भारत में स्टार्ट अप की संख्या 680 हो गई। 2014 में जहां स्टार्ट अप की संख्या 805 तक पहुंच गई वहीं इसकी मदद से 65,000 लोगों को रोजगार मिला। 2015 में स्टार्ट अप की संख्या बढ़कर 1200 हो गई जिसके माध्यम से 80,000 लोगों को रोजगार मिला।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed