पीएमओ की निगरानी में 'स्मार्ट' बनेगा बनारस
प्रधानमंत्री कार्यालय की विशेष निगरानी में वाराणसी को स्मार्ट सिटी के रूप में तब्दील किया जाएगा। इसके लिए पांच साल की समय सीमा तय की गई है। जबकि अगले तीन साल में शहर के सौंदर्यीकरण का काम पूरा कर लिया जाएगा।
शहरी विकास मंत्रालय ने इसका ब्लू प्रिंट तैयार कर लिया है। लेकिन इस पर अंतिम निर्णय पीएमओ का होगा। उम्मीद की जा रही है कि मोदी सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के पहले चरण को इस माह कैबिनेट की मंजूरी मिल सकती है।
सूत्रों के मुताबिक वाराणसी को संवारने के एजेंडे पर पीएमओ से विशेष मदद ली जा रही है। स्मार्ट सिटी के रूप में इस ऐतिहासिक शहर को बदलने की प्रक्रिया पर पीएमओ की पूरी निगरानी भी रहेगी।
बताया जा रहा है कि पीएमओ के निर्देश पर ही पांच साल में वाराणसी को स्मार्ट सिटी के रूप में पेश करने की तैयारी है। इसके लिए निजी क्षेत्र से भी काफी हद तक मदद ली जाएगी।
प्रस्ताव को जल्द मिल सकती है कैबिनेट की मंजूरी
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पहले चरण में दो दर्जन से अधिक शहरों का कायाकल्प हो सकता है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चुनाव क्षेत्र वाराणसी भी शामिल है।
उन्होंने कहा कि सितंबर अंत तक स्मार्ट सिटी तैयार करने के प्रस्ताव को कैबिनेट में पेश किया जाएगा। वाराणसी को स्मार्ट सिटी में तब्दील करने के लिए राज्य सरकार से भी केंद्र को सहयोग प्राप्त हो रहा है। लेकिन वाराणसी के ब्लू प्रिंट को पीएमओ की हरी झंडी मिलने के बाद ही कैबिनेट ले जाया जाएगा।
मंत्रालय ने यहां एलिवेटेड रोड, आवागमन के लिए मेट्रो की व्यवस्था, बिजली व पानी, सफाई की बेहतर सुविधा और तकनीक के इस्तेमाल से हाई-टेक सिटी बनाने का खाका तैयार किया है।
सरकार ने इसके लिए सभी पक्षकारों से सलाह, विशेषज्ञों की राय और अंतरराष्ट्रीय अभ्यासों को ध्यान में रखकर अपनी तैयारी की है।