फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   pmo india

सत्ता से अदालत के गलियारे तक पीएमओ की है नजर

Sat, 16 Aug 2014 08:16 AM IST
Updated Sat, 16 Aug 2014 08:16 AM IST
विज्ञापन
pmo india

इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कामकाज का तरीका कहें या फिर सतर्कता। मंत्रालयों में ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित मामलों पर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की नजर है। महत्वपूर्ण मुकदमों में किसे पेश होना है।

विज्ञापन


यह तय करने में संबंधित मंत्रालयों का ही नहीं, बल्कि पीएमओ का भी दखल है।

इसके चलते उच्च स्तर के विधि अधिकारियों की मनमानी खत्म हो गई है। यदि कोई इनकार करता है तो उसे मंत्रालय नहीं, सीधे तौर पर पीएमओ निर्देशित करता है।

पीएमओ करता है सीधे हस्तेक्षेप

pmo india

प्रधानमंत्री कार्यालय ने सर्वोच्च अदालत में लंबित केंद्र सरकार के एक महत्वपूर्ण मामले में हाल ही में पत्र लिखकर एक उच्च विधि अधिकारी को पेश होने को कहा, जिसके बाद इनकार की कोई गुंजाइश नहीं बच गई।

जबकि पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के सूत्रों की माने तो मंत्रालय के सचिव को उच्च विधि अधिकारी ने सीधे तौर पर इस मामले में पेश होने से इनकार कर दिया था। सचिव ने पीएमओ को इनकार के बारे में सूचित किया, जिसके बाद पीएमओ ने सीधे हस्तक्षेप किया।

इसके बाद उच्च विधि अधिकारी को मामले में पेश होना पड़ा। यह मसला प्रति पूरक वनीकरण कोष प्रबंधन और योजना प्राधिकरण (कैंपा) आदेश -2014 के मसौदे का है।

इसमें पर्यावरण मंत्रालय ने शीर्षस्थ अदालत से आग्रह किया है कि सरकार कैंपा का मसौदा तैयार कर चुकी है। अब इस संबंध में अधिसूचना जारी करने के लिए अदालत अनुमति प्रदान करे।

विज्ञापन
विज्ञापन

अदालत के गलियारों तक सक्रिय

pmo india

सर्वोच्च अदालत में 11 अगस्त को हुई मामले की सुनवाई में अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी, सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार व अन्य विधि अधिकारी पेश हुए थे। हालांकि अदालत ने सुनवाई को आठ सितंबर तक के लिए टाल दिया।

इस मामले में उच्च विधि अधिकारी को लिखा गया पीएमओ का पत्र यह स्पष्ट करता है कि मोदी के नेतृत्व वाला कार्यालय सियासत से अदालत के गलियारों तक सक्रिय है। उसकी पैनी निगाह हरेक हरकत पर है। यही वजह है कि कैंपा मामले में पेश होने से मंत्रालय को ना कहने वाले उच्च विधि अधिकारी को पीएमओ ने पत्र लिखने में देर नहीं लगाई।

गौरतलब है कि मंत्रालय ने आवेदन में अदालत से कहा है कि वर्ष 2001 से प्रति पूरक कोष 200 करोड़ रुपये था, जो बढ़कर तीस हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा हो गया है और खर्च नहीं किया गया है। कैंपा को नियमित तौर पर क्रियान्वयन में लाने के लिए एक नियमित संस्थान का गठन किया जाएगा। जो राष्ट्रीय स्तर पर और हरेक राज्य व केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर विधायी तौर पर तत्काल गठित किया जाना जरूरी है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed