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जनता से मंत्रियों की संपत्ति छुपाएंगे मोदी

Fri, 27 Feb 2015 03:19 PM IST
Updated Fri, 27 Feb 2015 03:19 PM IST
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PMO to block public access to minister's assests

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मशहूर बयान 'ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा' भी चुनावी जुमला बन सकता है। केंद्र सरकार के मंत्रियों की संपत्ति का ब्योरा पाना जल्द ही 'असंभव' होने वाला है।

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दरअसल प्रधानमंत्री कार्यालय ने मंत्रियों की संपत्तियों की घोषणाओं के सार्वजनिक अभिगमन पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया, तात्पर्य यह कि अब मंत्रियों की संपत्तियों का ब्योरा आम आदमी की पहुंच से बाहर हो जाएगा। केंद्र सरकार के मंत्रियों की संपत्ति का ब्योरा 2010 से ही ऑनलाइन किया जाता रहा है।
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पीएमओ के नए फैसले के मुताबिक संपत्तियों के ब्योरे को ऑनलाइन तो किया जाएगा लेकिन उसे देखने के लिए यूजनरनेम और पासवर्ड की आवश्यकता होगी और वह केवल अधिकृत कर्मचारियों को ही दिया जाएगा।
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अंतिम बार 11 फरवरी का अपडेट हुई थी जानकारी

PMO to block public access to minister's assests

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार के मंत्रियों की संप‌त्तियों का ब्योरा हाल के दिनों तक वेबसाइट पर उपलब्ध था। प्रधानमंत्री कार्यालय की वेबसाइट pmindia.gov.in की वेबसाइट संप‌त्तियों का विवरण अंतिम बार 11 फरवरी, 2015 तक अपडेट किया गया था। माना जा रहा है‌ कि उन जानकारियों का उसी समय पासवर्ड प्रोटेक्टेड किया गया।

नेशनल कैंपेन फॉर पीपल्स राइट टू इन्फार्मेशन की सदस्य अंजली भारद्वाज ने बताया कि हमारा मानना है कि प्रधानमंत्री ना पारदर्शिता चाहते और ना लोगों को सूचनाएं देना।

उन्होंने कहा कि चिंता की बात ये है कि अब कोई ऐसा भी नहीं होगा जिससे शिकायत की जा सके। मुख्य सूचना आयुक्त प्रधानमंत्री कार्यालय के बारे में निर्णय लेता है, उसकी अनुप‌स्थिति में सरकार के खिलाफ शिकायत भी नहीं दर्ज कराई जा सकती। गौरतलब है कि मुख्य सूचना आयुक्त का पद अगस्त, 2014 से खाली पड़ा है।

सूचना आयोग के पास पेंडिंग हैं 37,000 केस

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आरटीआई कार्यकर्ता एससी अग्रवाल का कहना है कि प्रधानमंत्री कार्यालय के फैसले से पारदर्शिता को झटका लगा है। उन्होंने कहा कि लगातार ऐसे फैसले लिए जा रहे हैं, ‌जिससे सूचना के अधिकार के कानून रास्ते में रोड़ा खड़ा हो रहा है।

सूचना आयोग के पास इस समय 37,000 केस पेंडिंग हैं, आयोग में खाली पड़े पदों के कारण इनके जल्‍द निपटारे की संभावना भी नहीं है। उल्लेखनीय है कि मंत्रियों की सं‌पत्तियों का सार्वजनिक करने का प्रावधान अग्रवाल की यचिका के बाद ही किया गया था।

उनकी याच‌िका पर मुख्य सूचना आयुक्त ने आदेश दिया था संभी मंत्रियों व उनके परिवार के सदस्यों की संपत्तियों, देनदारी और व्यावसायिक हितों का पूरा ब्योरा सार्वजनिक किया जाए।

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