तो क्या मुस्लिम वोटों को सपा से दूर कर देंगे मोदी?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पीएम बनने से ठीक पहले तक राजनीति में मुलायम सिंह यादव के धुर विरोधी रहे नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सपा मुखिया की सार्वजनिक मंच से तारीफ कर एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश की है।
मुसलमानों के हितैषी होने का दावा करने वाले मुलायम की सराहना कर खुद की मुस्लिम विरोधी छवि को उनके सहारे संवारने की भी कोशिश मानी जा रही है। इसके अलावा बिहार चुनाव में लालू-नीतिश से सपा के अलगाव और यूपी में मुस्लिम मतदाताओं को सपा से दूर करने का भी दांव माना जा रहा है।
सरसावा में तपती धूप में गर्म हवाओं की गश्त के बीच के पीएम के सियासी दांव ने राजनीति में उबाल ला दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस को कोसते हुए सपा मुखिया को लोकतंत्र का रक्षक करार दिया। संसद के मूल्यों के लिए मुलायम के प्रयासों की जमकर सराहना की।
ये भी हो सकती है कवायद
इतना नहीं, मां-बेटे पर सियासी हमला कर रहे प्रधानमंत्री ने सपा मुखिया का
नाम बेहद सम्मानजनक शब्दों में लिया। ऐसे सियासी गलियारे के जानकार इसके
गूढ़ मायने निकालने में जुट गए हैं। माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में
भाजपा और नरेंद्र मोदी लगातार सपा मुखिया सहित सभी विपक्षी दलों के निशाने
पर रहे थे।
मगर, यूपी में परिणाम भले ही भाजपा के पक्ष में आएं, मगर सपा ने
मुस्लिम मतों को हासिल कर उनके हितैषी होने के दावे को मजबूत कर लिया था।
ऐसे में पीएम खुद के मुस्लिम विरोधी छवि को मुलायम के सहारे सुधारने की
कवायद में हो सकते हैं।
यही कारण है कि तमाम सियासी वैमनस्यता को भूलकर
मोदी कुछ महीने पहले सैफई में सपा सांसद और मुलायम के पोते तेज प्रताप यादव
के शादी समारोह में भी पहुंचकर उनसे नजदीकी के संकेत दिए थे।
सपा ने दिया भाजपा का साथ
हालांकि इसके
बाद से सपा का रुख भी भाजपा के प्रति नरम रहा है और संसद के गतिरोध से
लेकर ललित मोदी प्रकरण पर सपा ने भाजपा का साथ दिया।
बिहार चुनाव में एक
बार फिर भाजपा और सपा के बीच तल्खी बढ़ने की आशंका थी, मगर गठबंधन टूटने के
बाद अब भाजपा मुलायम से नजदीकी बढ़ाकर लालू और नीतिश को बिहार में मुलायम
से दूर रखना चाहती है।
मुलायम की तारीफ से लोग उनके भाजपा से नजदीकी का
कयास लगाएंगे। अगर, मुस्लिम मतदाताओं को भाजपा से सपा की नजदीकी का आभास
हुआ तो वे एकजुट होने की बजाय अलग-अलग पार्टियों में बिखरेंगे और उसका सीधा
लाभ भाजपा को हो सकता है।
मोदी का विरोध था सपा की ताकत
हालांकि कांग्रेस और बसपा मुस्लिम मतदाताओं को
रिझाने के लिए इसे मुद्दा भी बना सकते हैं। कुल मिलाकर मुलायम की तारीफ कर
भले ही मोदी ने उन्हें लोकतंत्र का हितैषी करार दिया हो, मगर यह सियासी
दांव सपा के लिए भारी पड़ सकता है।
लोकसभा
चुनाव में मुलायम सिंह यादव ने नरेंद्र मोदी की जमकर मुखालफत की थी। मोदी
का मुखर विरोध ही सपा की ताकत बना था और ज्यादातर लोकसभा सीटों पर सपा ने
भाजपा को कड़ी टक्कर दी थी।
इससे अलग प्रचंड मोदी लहर में भी मुलायम अपने
सियासी दांव की वजह से पांच सीटें बचा ले गए थे। ऐसे में अब आगामी विधानसभा
चुनाव में सपा ही भाजपा के लिए चुनौती बन सकती है। ऐसे में पीएम मोदी का
यह सियासी तीर सपा को गहरे जख्म दे सकता है।