फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   pm speech in united nations

'पाक की जमीन से आतंकवाद रुके तभी बातचीत का फायदा'

Sun, 29 Sep 2013 02:20 AM IST
उदय कुमार/संयुक्त राष्ट्र
उदय कुमार/संयुक्त राष्ट्र Updated Sun, 29 Sep 2013 02:20 AM IST
विज्ञापन
pm speech in united nations

एक दिन पहले नवाज शरीफ द्वारा कश्मीर का राग अलापने को डॉ. मनमोहन सिंह ने गंभीरता से लेते हुए शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाक प्रायोजित आतंकवाद का मुद्दा मजबूती से उठाया।

विज्ञापन


दुनिया भर के नेताओं के सामने प्रधानमंत्री ने दो टूक कहा कि पड़ोसी मुल्क की सरजमीं से पोषित हो रहे आतंकवाद पर पूरी तरह रोक लगे, तभी दोनों मुल्कों में बातचीत से कोई सकारात्मक हल निकल सकता है। हालांकि रविवार को शरीफ से होने वाली मुलाकात का उन्हें इंतजार है।
विज्ञापन


पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से रविवार को होने वाली बातचीत से पहले मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत की एकता और अखंडता से कभी कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सभी जान लें कि जम्मू-कश्मीर भी भारत का अभिन्न अंग है।
विज्ञापन
विज्ञापन


हालांकि उन्होंने कहा कि भारत अपने पड़ोसी मुल्क के साथ जम्मू-कश्मीर समेत सभी विवादों को हल करने के लिए प्रतिबद्ध है। लेकिन, दोनों देश शिमला समझौते के तहत सिर्फ द्विपक्षीय बातचीत के जरिए ही अपने मसले हल कर सकते हैं।

बस इसके लिए जरूरी है पाकिस्तानी जमीन और उसके कब्जे वाले हिस्से से भारत में दहशत फैलाने के लिए आतंकियों को वित्त पोषित और प्रशिक्षित न किया जाए। दुनिया के नेताओं का ध्यान आकर्षित करते हुए उन्होंने कहा कि सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद का भारत बड़ा भुक्तभोगी है। इसलिए यहां संयुक्त राष्ट्र में सभी मिलकर संकल्प लें कि आतंकवाद के खिलाफ कड़ी और वैश्विक कार्रवाई जारी रखेंगे।

उन्होंने कहा कि आतंकियों को संरक्षण, प्रशिक्षण और हथियार मुहैया कराने वाले देशों पर कोई रहम नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने नैरोबी और जम्मू की घटनाओं की ओर इशारा करते हुए कहा कि पिछले कुछ दिनों में अफ्रीका से एशिया तक पूरी दुनिया आतंकी घटनाओं से त्रस्त हुई है।

उन्होंने अफगानिस्तान में भारत के हितों को ध्यान में रखते हुए वैश्विक मंच पर कहा कि पड़ोसी देश जल्द ही राजनीतिक, सुरक्षा और आर्थिक मोर्चे पर ऐतिहासिक बदलाव का गवाह बनने जा रहा है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आतंक का दंश झेल चुके इस देश की उन्नति में मददगार बनना चाहिए।

जुबां पर आया राजीव गांधी का नाम
हाल के दिनों में सुरक्षा से जुड़े कई दस्तावेज लीक होने और हैकिंग करके दूसरे देशों में एक महाशक्ति द्वारा ताकझांक की ओर इशारा करते हुए डा. मनमोहन सिंह ने कहा कि साइबर सुरक्षा और परमाणु अप्रसार (एनपीटी) पर वैश्विक सहमति बनाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि 25 साल पहले भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने दुनिया को परमाणु हथियारों से रहित करने के लिए जो व्यापक योजना बनाई थी, उसकी आज भी दुनिया को जरूरत है।

स्थायी सदस्यता के लिए ठोका दावा
पाक प्रायोजित आतंकवाद के अलावा प्रधानमंत्री ने सबसे ज्यादा बल वैश्विक संस्थाओं के सुधार, सुरक्षा परिषद के पुनर्गठन और उसमें भारत को स्थायी सदस्य के रूप में शामिल करने पर रहा।

वैश्विक शांति मिशनों में भारत की सहभागिता और उपमहाद्वीप में उसकी भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि अब भारत जैसे विकासशील देश को भी सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए।


शुक्रवार को जहां अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा ने भारत को भावी स्थायी सदस्य कहकर मनमोहन सिंह का उत्साह बढ़ाया था, वहीं शनिवार को मारीशस के प्रधानमंत्री रामगुलाम ने भारत के दावे का समर्थन किया।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed