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बुलाया गया था बात करने, पर सुनना पड़ा भाषण

Sun, 26 Oct 2014 01:28 PM IST
Updated Sun, 26 Oct 2014 01:28 PM IST
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pm press meet sautik biswas

मई में ऐतिहासिक चुनावी जीत के बाद नरेंद्र मोदी की मीडिया से मुलाक़ात कई वजहों से दिलचस्प रही। पहली बात, कुछ चुनिंदा पत्रकारों को शुक्रवार को टेक्स्ट मैसेज मिला, जिसमें कहा गया था कि यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री के साथ एक 'अनौपचारिक बातचीत' रहेगा।

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बाद में पूछताछ करने पर पता चला कि दिवाली के मौके पर एक अनौपचारिक मुलाक़ात होगी। हमें बीजेपी के अशोक रोड कार्यालय पर सुबह पौने ग्यारह बजे पहुंचने को कहा गया।
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अंततः एक प्रफुल्लित वरिष्ठ पत्रकार ने मुझे बताया, मोदी ने फ़ैसला कर लिया है कि अब कुछ आराम से मीडिया से बात की जाए।

जब मैं कड़ी सुरक्षा वाले स्थान पर पहुंचा तो यह साफ़ हो गया कि यह कोई 'अनौपचारिक बातचीत' नहीं होने जा रही थी, बल्कि एक बड़े शामियाने के नीचे औपचारिक समारोह होने जा रहा है।

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'मोदी ने किया पत्रकारों को संबोधित'

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दो टीवी स्क्रीन और उनके पीछे लगे मोदी और अमित शाह के लैमिनेटेड पोस्टर के आगे कई खाली कुर्सियां रख दी गई थीं। बहुत सारे पत्रकार और टीवी टीमों को निमंत्रित किया गया था।

वे सफ़ेद कपड़े वाली टेबल के चारों ओर बैठ गए थे और मोदी का इंतज़ार कर रहे थे। तो यह तुरंत साफ हो गया था कि यह प्रधानमंत्री के साथ 'अनौपचारिक बातचीत' नहीं होने जा रही थी।

इसके बजाय मोदी अपने अंदाज़ में इसे संबोधित करने वाले थे। और उन्होंने किया। वह क़रीब दोपहर में पहुंचे और पत्रकारों को संबोधित करना शुरू कर दिया।

ये अभियान है मोदी के दिल के क़रीब

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इसमें कोई अचरज की बात नहीं कि उन्होंने स्वच्छ भारत अभियान की बात की, जो उनके दिल के नज़दीक है। उन्होंने इस पर लिखने के लिए पत्रकारों और स्तंभकारों की प्रशंसा की और कहा कि अभियान पर विस्तृत समाचार दरअसल 'एक अच्छा उदाहरण है कि पत्रकारिता एक रचनात्मक भूमिका अदा कर रही है'।

पत्रकारों ने शांति से सुना। मोदी ने कहा, "आपने अपनी कलम को एक झाड़ू में बदल दिया।" ठसाठस भरे टेंट में पत्रकारों के लिए प्रधानमंत्री का संबोधन सुनना अनोखा लग रहा था।

इनमें से बहुतों ने एक भी ढंग की ख़बर स्वच्छ भारत अभियान पर नहीं लिखी थी, लेकिन उन्हें जन स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रभावों पर उपदेश दिया जा रहा था।

मोदी संग सेल्फ़ी ले रहे थे पत्रकार

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तो प्रधानमंत्री मोदी, अपने माहौल में एक बार फिर से आदेशात्मक थे। निस्संदेह कोई सवाल नहीं पूछा गया। क्या यह जाना-पहचाना सा लगा? दस मिनट के भाषण के बाद मोदी भीड़ में शामिल हो गए, पत्रकारों से घुलते-मिलते हुए और तो और सेल्फ़ी के आग्रहों पर उपकृत करते हुए।

पीछे सरकार के कुछ वरिष्ठ मंत्री, जिनमें राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज और अरुण जेटली- जो कुछ देर के लिए आए थे। वो ख़बरों के भूखे पत्रकारों से काले धन के अभियान पर, मोदी की जल्द ही होने वाली विदेश यात्रों पर, ऊर्जा संकट पर और बर्दवान में बम विस्फोट पर कहीं सार्थक चर्चा कर रहे थे।

इससे पहले मंच पर प्रधानमंत्री ने याद किया कि कभी पार्टी कार्यकर्ता के रूप में वह प्रेस कांफ्रेस में कैसे पत्रकार के बैठने का इंतज़ाम किया करते थे और वहां पत्रकारों से आसानी से मिल लिया करते थे।

'मोदी का सबसे मजेदार बयान'

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उत्साह से उन्होंने कहा कि वो भी दिन थे जब वह मीडिया के साथ अपने संबंध मज़बूत करने के तरीक़े ढूंढा करते थे। पता नहीं इससे उनका क्या मतलब था लेकिन मुझे यह शनिवार सुबह का सबसे मज़ेदार बयान लगा।

क्या वह सचमुच प्रेस मीट करने को तैयार थे जहां वह सारे सवाल सुनते और खुलकर उनके जवाब देते? या वह मीडिया से बचते रहेंगे और मुख्यतः सोशल मीडिया और अपने सिंहासन पर ही निर्भर रहेंगे- जहां से वह बोलें और दूसरे सुनें।

मोदी मीडिया से बातचीत करने और खुलने के रास्ते पर आधे बढ़ गए थे। अब भी उन्हें पत्रकारों से खुलकर बात करने के लिए लंबा रास्ता तय करना है। ऐसे व्यक्ति के लिए, जो चाहता हो कि पूरी तरह उसके संदेशों पर नियंत्रण रहे, यह आसान नहीं होगा।

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