कांग्रेस की चुनावी रैलियों से मनमोहन सिंह गायब!
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देशभर में सियासी पारा अपने चरम पर है। सभी राजनीतिक दलों के बड़े नेता इन दिनों चुनावी सभाओं में व्यस्त हैं। कांग्रेस के प्रचार अभियान की बागडोर पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने संभाल रखी है लेकिन यूपीए सरकार का 10 साल तक नेतृत्व करने वाले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह चुनावी परिदृश्य से लगभग गायब से हैं।
विपक्षी नेताओं के हमलों में भी मनमोहन का जिक्र यदा-कदा ही होता है। इतना ही नहीं खुद कांग्रेस प्रत्याशी उनकी अपने यहां रैलियां आयोजित करने से हिचक रहे हैं। 81 वर्षीय मनमोहन सिंह पहले ही कह चुके हैं कि वह तीसरे कार्यकाल के बारे में नहीं सोच रहे हैं।
यूपीए एक और दो की असफलताओं के लिए विपक्षी दल प्रधानमंत्री को ही दोषी ठहराते रहे हैं लेकिन चुनावी मैदान से उनकी गैर मौजूदगी विपक्ष के साथ ही कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी आश्चर्य हो रहा है।
पीएम का प्रचार करना कांग्रेस के लिए घातक
7 अप्रैल को पहले चरण का मतदान होना है। चुनाव आयोग को कांग्रेस की ओर से सौंपी गई लिस्ट में मनमोहन सिंह का नाम मुख्य चुनाव प्रचारकों में शामिल है लेकिन मैदान में इसका उल्टा नजर आ रहा है।
असम को छोड़कर प्रधानमंत्री अभी तक किसी अन्य राज्य में चुनावी रैली करने नहीं गए हैं। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह असम से राज्यसभा सांसद हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री की मात्र 6 से 8 रैलियां ही प्रस्तावित हैं।
पार्टी प्रधानमंत्री को जनता के सामने ज्यादा नहीं आने देना चाहती है क्योंकि प्रधानमंत्री की ज्यादा चुनावी रैलियों के चलते जनता को यूपीए सरकार के भ्रष्टाचार, घोटालों, खस्ताहाल अर्थव्यवस्था की याद ताजा होगी जोकि पार्टी के लिए घातक साबित होगा।
मां-बेटे ही कर रहे रैलियां
67 वर्षीय कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी देशभर में करीब 70 से 80 रैलियों को संबोधित करेंगी। वहीं राहुल गांधी 100 से अधिक चुनावी सभाएं करेंगे।
कांग्रेस उपाध्यक्ष पहले चरण से पहले उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, झारखंड, हिमाचल, छत्तीसगढ़ और केरल में चुनावी रैलियों को संबोधित कर चुके होंगे।
ऐसी अटकलें लगाई जा रही थी कि सोनिया गांधी स्वास्थ्य कारणों के चलते चुनाव प्रचार में ज्यादा सक्रियता से हिस्सा नहीं लेंगी लेकिन उनके निर्धारित चुनाव कार्यक्रम से इन्हें गलत साबित किया। एआईसीसी सूत्रों का कहना है कि सोनिया गांधी हर राज्य में कम से कम दो रैलियों को संबोधित करेंगी।