यूपी: छिड़ने वाला है महासंग्राम, मोदी-अखिलेश होंगे आमने सामने
डेढ़ साल बाद प्रदेश में विधानसभा का चुनाव होना है मगर राजनीतिक पार्टियां अभी से तैयारी में जुट गई हैं। भाजपा की मानें तो विकास, सुशासन, महंगाई और भ्रष्टाचार चुनावी मुद्दा होगा। यूपी चुनाव में भी मोदी भाजपा का चेहरा होंगे जबकि सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी का चेहरा युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव होंगे।
प्रधानमंत्री मोदी का संसदीय क्षेत्र होने के नाते काशी ही चुनाव के केंद्र में होगी। वहीं बनारस से सटे जिले आजमगढ़ से सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव सांसद हैं। सबकी निगाहें इन दोनों क्षेत्रों के विकास पर अभी से जम गई हैं। जापानी प्रधानमंत्री शिंजो अबे के दौरे के बाद से बनारस में विकास को लेकर बहस तेज हो गई है।
चुनावी तैयारियों के मद्देनजर विरोधी दल मोदी को घेरने की रणनीति में जुट गए हैं। बिहार चुनाव में मिली करारी हार के बाद भाजपा अब फूंक-फूंककर कदम रख रही है। पार्टी ने यूपी चुनाव का जो रोडमैप एक साल पहले तैयार किया था, अब उसमें बदलाव की तैयारी है। विरोधियों के हमलावर रुख और विकास का काम धरातल पर नजर न आने की वजह से पार्टी को रणनीति में बदलाव करना पड़ रहा है।
पीएम मोदी ने पिछली चुनावी रैलियों में यहां गुजरात मॉडल की खूब वकालत की थी। 2014 में हुए संसदीय चुनाव में इसका लाभ भी मिला था। अब पीएम के संसदीय क्षेत्र को उन सभी पहलुओं से विकास की कसौटी पर परखा जाएगा। माना जा रहा है कि काशी के विकास की तस्वीर भाजपा की चुनाव राह में अहम होगी।
मोदी भाजपा तो सत्तारूढ़ सपा का चेहरा होंगे अखिलेश
पीएम के क्षेत्र में विकास नजर आता है तो इसे मॉडल बनाकर भाजपा अन्य शहरों में प्रचार कर सकेगी। ऐसा न होने पर विरोधी यूपी में पीएम को घेरने के लिए इसे हथियार बना सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में कई योजनाओं की घोषणा तो हुई हैं लेकिन जमीन पर अब तक ये योजनाएं उतर नहीं पाई हैं।
हालांकि आदर्श गांव जयापुर की तस्वीर बदली है। भाजपा की चिंता इस बात की है कि विकास की योजनाएं तो तैयार हैं मगर काम नजर नहीं आ रहा। जनता को यदि काम नहीं दिखा तो सारा खेल बिगड़ जाएगा।
सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव आजमगढ़ से सांसद हैं। प्रदेश सरकार ने आजमगढ़ के लिए विकास की ढेरों योजनाएं घोषित कर रखी हैं। कई योजनाओं पर अमल हो भी गया है।
जिले को निर्बाध बिजली मिल रही है। सड़कें चमचमा रही हैं। मेडिकल कॉलेज की सौगात मिल ही चुकी है। ऐसे में विधानसभा चुनाव में मोदी और मुलायम के संसदीय क्षेत्र की तुलना होना लाजिमी है।