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'रोज एक कानून खत्म करना चाहते हैं मोदी'

Sun, 05 Apr 2015 02:10 PM IST
Updated Sun, 05 Apr 2015 02:10 PM IST
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pm narendra modi in judiciary meet

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यायपालिका को अपना कर्तव्य निभाने में संतुलन और सजगता का ध्यान रखने की नसीहत दी है। उन्होंने न्यायपालिका को धारणाओं के आधार पर फैसले देने से बचने को कहा है और उसे अपने आत्ममूल्यांकन के लिए कोई आतंरिक व्यवस्था कायम करने की सलाह दी है क्योंकि लोग न्यायाधीशों को भगवान के बाद दूसरा स्थान देते हैं। उन्हें शायद ही राजनीतिक नेताओं की तरह आलोचना का सामना करना पड़ता है।

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प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर राजनेता या सरकार कोई गलती करती है तो न्यायपालिका के पास उस नुकसान की भरपाई करने का अवसर होता है लेकिन न्यायपालिका गलती करे तो सब कुछ खत्म हो जाने का खतरा पैदा हो जाता है। कानून का शासन सुनिश्चित करने और आम आदमी को न्याय दिलाने की ईश्वरीय भूमिका का निर्वहन करने के लिए न्यायपालिका को सशक्त और समर्थ बनाना होगा।
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देशभर के शीर्ष न्यायाधीशों केसम्मेलन को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि न्यायपालिका शक्तिशाली हो रही है, लिहाजा जरूरी है कि वह परिपूर्ण बने ताकि लोगों की उम्मीदों पर खरी उतर सके। मोदी ने कहा कि कानून और संविधान के आधार पर फैसला देना आसान होता है लेकिन धारणा के आधार पर फैसला देने में सचेत रहने की जरूरत है। धारणा अक्सर फाइव स्टार कार्यकर्ताओं द्वारा संचालित होती है।
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नेताओं के ऊपर है सबसे ज्यादा दबाव

pm narendra modi in judiciary meet

देश के24 हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों और मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर आप किसी को मौत की सजा सुनाते हैं तब भी बाहर आकर वह कहता है कि उसे न्यायपालिका पर विश्वास है। यहां आलोचना की काफी कम आशंका होती है। समय का तकाजा है कि आत्म मूल्यांकन केलिए आंतरिक तंत्र विकसित किया जाए जहां राजनीतिज्ञों और सरकार की कोई भूमिका न हो। अगर ऐसा तंत्र सामने नहीं आता है और न्यायपालिका पर तनिक भी भरोसा डगमगाता है तो इससे देश को नुकसान होगा।

मोदी ने कहा कि राजनेता आजकल निशाने पर होते हैं। उनकी काफी जांच पड़ताल होती है। पहले जो बातें गॉसिप कॉलम में भी नहीं आती थीं, वे आज ब्रेकिंग न्यूज बन रही हैं। उन्होंने सरकार द्वारा गठित ट्रिब्यूनल की व्यवस्था के प्रभाव व कार्यकुशलता का आकलन करने के लिए समग्र समीक्षा की बात कही।

मोदी की दो टूक

pm narendra modi in judiciary meet

1. अगर आप किसी को मौत की सजा सुनाते हैं तब भी बाहर आकर वह कहता है कि उसे न्यायपालिका पर विश्वास है। यहां आलोचना की काफी कम आशंका होती है। समय का तकाजा है कि आत्म मूल्यांकन केलिए आंतरिक तंत्र विकिसत किया जाए जहां राजनीतिज्ञों और सरकार की कोई भूमिका न हो।

2. कानून और संविधान के आधार पर फैसला देना आसान होता है लेकिन धारणा के आधार पर फैसला देने में सचेत रहने की जरूरत है। धारणा अक्सर फाइव स्टार कार्यकर्ताओं द्वारा संचालित होती है।

3. राजनेता आजकल निशाने पर होते हैं। उनकी काफी जांच पड़ताल होती है। पहले जो बातें गॉसिप कॉलम में भी नहीं आती थीं, वे आज ब्रेकिंग न्यूज बन रही हैं। लोग हम पर नजर रखते हैं लेकिन न्यायपालिका के पास यह सौभाग्य नहीं।
 
हर दिन खत्म होगा एक अप्रचलित कानून: पीएम
अप्रचलित कानून को समाप्त करने केप्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ कानून सही ढंग से तैयार नहीं किए गए हैं। उनमें स्पष्टता का अभाव है। यही कारण है कि उनकी अलग-अलग तरह से व्याख्या की जाती है। कानून का मसौदा तैयार करते समय विशेष ध्यान देने की जरूरत है। 1700 अप्रचलित कानूनों की पहचान की गई है,जिन्हें खत्म किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वह अपने कार्यकाल में प्रतिदिन एक कानून खत्म करने की उम्मीद करते हैं। लोगों में कानून का बोझ बढ़ गया है। लोगों पर से यह बोझ कम करने की दरकार है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने 700 से अधिक कानून को खत्म किया है।

परिवार का मामला है, सुलझा लेंगे : चीफ जस्टिस
देश के मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू ने गुड फ्राइडे पर जजों का सम्मेलन आयोजित करने के विरोध से पैदा विवाद को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया और कहा कि यह परिवार का मामला है, इसे सुलझा लिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस जोसफ कुरियन ने गुड फ्राइडे पर न्यायाधीशों के सम्मेलन के आयोजन को देश के धर्मनिरपेक्ष माहौल के लिए चिंताजनक करार दिया था। जस्टिस दत्तू ने कहा कि सम्मेलन में सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों को बुलाया जाता है लेकिन सिर्फ शीर्ष तीन जजों का मौजूद रहना ही अनिवार्य होता है। उन्होंने जस्टिस जोसफ से जुड़े विवाद को हल्के में लेते हुए क हा कि शुक्रवार और शनिवार को आयोजित कार्यक्रम कोई सम्मेलन नहीं बल्कि बैठक था। जजों ने इसमें न्यायपालिका से जुड़े मुद्दे और समस्याओं पर आपस में बातचीत की।

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