आरएसएस ने मोदी सरकार को कितने नंबर दिए?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मोदी सरकार की समीक्षा करने वाले उन्हें अलग-अलग नंबर देते हैं। लगता है कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को उसके 14 महीने के प्रदर्शन पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) ने फिलहाल पास कर दिया है।
अगर आरएसएस के बयान पर गौर करें तो शायद उसने मोदी सरकार को 10 में से 6 नंबर दिए हैं। संघ के नेता दत्तात्रेय होसबोले के शब्दों से लगता है कि संघ सरकार के काम से खुश है।
दिशा ठीक है, नीयत ठीक है। समय कम है, काम बहुत बाकी है।मतलब साफ था कि अब तक का रिपोर्ट कार्ड ठीक है, लेकिन जबरदस्त नहीं। लेकिन क्या आरएसएस औपचारिक रूप से सरकार की समीक्षा कर सकता है? अपनी राय देना, अपने विचार रखना एक बात है।
'लोकतंत्र और संविधान का अपमान'
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के दौर में आरोप लगाया जाता था कि कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी रिमोट कंट्रोल से सरकार चलाती हैं। उसी तरह से अब आरएसएस पर ये इल्जाम लगाया जा रहा है कि संघ नरेंद्र मोदी सरकार को रिमोट कंट्रोल से चला रहा है।
दिल्ली में आरएसएस और भाजपा की को-ऑर्डिनेशन कमेटी की तीन दिवसीय बैठक ने इस इल्जाम को और भी हवा दी है। विपक्ष ने कहा कि आरएसएस ने मोदी सरकार की क्लास लेने के लिए बैठक बुलाई थी।
विपक्षी पार्टियों का यह भी कहना था कि मोदी सरकार को जनता की बजाय आरएसएस के सामने हिसाब देने का मतलब 'लोकतंत्र और संविधान का अपमान' है।
आरोप को आरएसएस ने किया खारिज
ये बैठक बेमिसाल थी। आरएसएस के एक पुराने प्रमुख प्रचारक ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के दौर में आपस में चर्चा तो होती थी, लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ कि भाजपा का मंत्रिमंडल तीन दिनों तक आरएसएस को अपनी सरकार के प्रदर्शन का हिसाब दे।
दिलचस्प बात ये है कि आरएसएस ने इस आरोप को पूरी तरह से खारिज नहीं किया। बैठक के अंत में संघ के नेता दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि ये सरकार की कोई समीक्षा बैठक नहीं थी।
लेकिन एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "14 महीने (सरकार को) हुए हैं। और भी समय है। बहुत सारे काम करने हैं। दिशा ठीक है। उपलब्धि अच्छी है। आगे बढ़ेंगे, 100 प्रतिशत संतुष्टि कभी नहीं होती। लेकिन दिशा ठीक है।"
होसबोले ने स्वीकार किया कि सरकार के मंत्री आए थे और उन्होंने अपनी बात रखी। मंत्रियों ने शासन के कामकाजों से संघ को अवगत कराया।
मोदी ने कहा समीक्षा नहीं संघ का 'इनपुट' था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संघ की बैठक में हिस्सा लिया था। उन्होंने अंत में दोहराया कि यह समीक्षा नहीं थी बल्कि संघ का 'इनपुट' था।
साफ जाहिर है कि आरएसएस मोदी सरकार को अपनी गिरफ्त में लेना चाहता है। अहमदाबाद में संघ के एक पुराने प्रचारक ने कहा कि संघ सरकार की कई नीतियों से खुश नहीं था।
उनका कहना था कि नरेंद्र मोदी की अपने सभी सहयोगियों को साथ लेकर न चलने की अदा संघ को पसंद नहीं है। उन्होंने कहा, "संघ की सोच ये है कि एक लीडर रास्ता निकाले और बाकी लोग उसके पीछे आएं।
मोदी का अकेले काम करने के तरीके से संघ खुश नहीं है।" "संघ चाहता है कि मोदी सभी मंत्रियों और सहयोगियों को साथ लेकर चलें।"
कई मुद्दों पर चर्चा हुई
संघ की बैठक में एजेंडे पर कई अहम मुद्दे थे। शिक्षा, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, विकास मॉडल और चरित्र निर्माण। राजनाथ सिंह, स्मृति ईरानी और मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों ने आरएसएस और संघ परिवार में शामिल दूसरे संगठनों को 14 महीने में अपने काम का हिसाब दिया।
आरएसएस के क़रीब रहे एक नेता के अनुसार, ये आरएसएस के हित में नहीं होगा। उन्होंने कहा, "यह बैठक संघ के सत्ता से क़रीब जाने का संकेत है।""डर इस बात का है कि कहीं संघ राष्ट्र के 'रखवाले' से केवल पार्टी का 'रखवाला' बन कर न रह जाए"
आरएसएस का यह कदम सरकार के कामों में दखल बताया जा रहा है। आरएसएस के इस कदम की दो वजह हो सकती हैं, एक यह कि पहली बार उसकी वैचारिक सियासी पार्टी भाजपा को संसद में पूर्ण बहुमत मिला है।
दूसरे ये कि संघ परिवार में यह बात स्वीकार की जाती है कि भाजपा को 90 सीटें ऐसी मिली हैं जिनमें जीत उन लोगों की हुई जिनका संघ से संबंध था।