सिलिकॉन वैली से पीएम मोदी लाएंगे ये 8 चीजें?
सिलिकॉन वैली जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री होने के नाते मोदी के पास मौका है कि वह यह समझें कि क्यों सिलिकॉन वैली इनोवेशन के मामले में दुनिया में सबसे आगे है और यहां से एक निर्भीक नजरिया लेकर वापस जाएं। मुझे उम्मीद है कि इसके साथ ही भारत की प्रगति भी तेज गति से होगी।
सिलिकॉन वैली के ज्यादातर भारतीय खुद को अमेरिकी नागरिक मानते हैं लेकिन उन्हें अपनी विरासत पर भी गर्व है। वे भारतीय पेशेवरों के लिए एक मिसाल की तरह हैं। जैसा दिखता है अमेरिका ऐसा समाज नहीं, जहां बुद्धिमत्ता का राज हो और सभी का स्वागत किया जाता हो। इसकी अनेक समस्याएं भी हैं।
अगर दुर्भाग्यवश मोदी राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी दौड़ में लगे डोनाल्ड ट्रंप से मिलें, तो उन्हें भारत के उन नेताओं की याद आएगी जो नस्लवाद और धार्मिक भावनाएं भड़काकर लोकप्रियता हासिल करते हैं।
अमेरिका में नासमझी है, भेदभाव है और पूर्वाग्रह है लेकिन इन सबसे ऊपर इनके पास एक आदर्श है- ग्रेट अमेरिकन ड्रीम। यहां हर व्यक्ति को सफलता हासिल करने का मौका मिलता है, उसकी पृष्ठभूमि, विरासत और धर्म कुछ भी हो।
जो असाधारण सफलता हासिल कर लेता है उसे प्रसिद्धि भी मिलती है। इसीलिए सुंदर पिचाई और सत्या नडेला जैसे लोग गूगल और माइक्रोसॉफ्ट के प्रमुख हैं और अमेरिका में राष्ट्रीय हीरो हैं।
सिलिकॉन वैली से मोदी ले सकते हैं ये 8 चीजे
1- स्मार्ट सिटी
मोदी केवल साफ और ज्यादा सक्षम शहरों के बारे में बोलते रहे हैं, लेकिन मध्य पूर्व में शुरू हुई महंगी परियोजनाओं पर वे ख़ामोश हैं। ऐसे महत्वाकांक्षी और तकनीक के माध्यम से जुड़े शहर कम खर्च में भी बनाए जा सकते हैं।
ट्रैफिक पैटर्न, हवा की क्वालिटी, शोर, रेडिएशन स्तर, पानी की क्वालिटी मापने, कूड़े के प्रबंधन, ट्रैफिक जाम, सुरक्षा और शहर के संचालन के लिए जरूरी सेंसर्स अब सस्ती हैं और आसानी से उपलब्ध हैं।
सिलिकॉन वैली में कई स्टार्ट अप इन तकनीकों को बना रहे हैं और किकस्टार्टर और इंडिगोगो जैसी वेबसाइट्स से इसके लिए जरूरी पैसा जुटा रहे हैं।
भारत के पास अभी इस तरह की फंडिंग का कोई ढांचा नहीं है, इसलिए हो सकता है कि नई तकनीक से आधारभूत ढांचे को बनाने के लिए सरकार को ही स्टार्ट अप को पैसा देना पड़े।
2-अर्थव्यवस्था में साझेदारी
उबर ने भारतीय उद्यमियों को बताया है कि भारत के भीड़-भाड़ वाले शहरों में ऐप-आधारित टैक्सी सेवा संभव है। लेकिन उबर ने धनी ग्राहकों पर अपना दांव खेला और कई चीजें गलत कीं। ऑटो, साइकिल रिक्शा और बसों में यात्रा उपलब्ध कराने की चुनौती कहीं बड़ी है।
असंगठित क्षेत्र के कर्मचारी उपलब्ध कराने में जैसे मजदूर, टेक्नीशियन, घर में काम करने के लिए मेड, पेंटर, खेतों में ट्रैक्टर, मोटरसाइकिल किराए पर लगाना और ऐसी अन्य चीजों में भी तकनीक का इस्तेमाल हो सकता है।
कुछ उद्यमी तकनीक इसमें हाथ आजमाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन उन्हें बोझिल नियमों को आसान करने में सरकार की सहायता की जरूरत है।
3-हेल्थ ऐप्स, उपकरण और जीनोमिक्स
सस्ते सेंसरों को स्मार्टफोन और टैबलेट्स से जोड़ कर ऐसे स्वास्थ्य उपकरण बनाए जा सकते हैं जिनसे वैसे ही नतीजे हासिल किए जा सकें जैसे पश्चिमी अस्पताल करते हैं।
अमेरिका में इन विषयों पर कई भारतीय कंपनियां काम कर रही हैं और कई भारतीय कंपनियों ने पहले ही व्यावहारिक और बेहतर तकनीक विकसित कर ली है।
के चंद्रशेखर की कंपनी फोरस हेल्थ ने 3नेत्र नाम का एक पोर्टेबल आई-स्क्रीनिंग उपकरण विकसित किया है। इससे कैटेरेक्ट, डायबिटिक रेटिनोपैथी और कॉर्निया जैसी आंख की बीमारियों का पता लगाया जा सकता है।
कनव कोहोल ने 33 सेंसर वाला स्वास्थ्य स्लेट बनाया है, जो ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, दिल की धड़कनों, हीमोग्लोबिन, पेशाब में प्रोटीन के अलावा एचआईवी, सिफलिस, डेंगू और मलेरिया जैसे रोगों की जांच कर सकता है।
अनु आचार्य की कंपनी मैपमाईजीनोम जीनोम के आंकड़ों का विश्व स्तरीय विश्लेषण कर रही है जिससे किसी व्यक्ति की सेहत के जैनेटिक आधार का पता चल सके।
इसमें लक्षण, लाइफस्टाइल, दवाओं की प्रतिक्रिया, वंशागत स्थिति और बीमारियां शामिल हैं। टेलिमेडिसिन से भी दूर-दराज के गांवों को स्वास्थ्य विशेषज्ञों से जोड़ने के क्षेत्र में भी बहुत संभावनाएं हैं।
4-ऐप-आधारित सार्वजनिक सेवाएं
रेलवे टिकट बुक करना हो, ट्रेन के समय पर नजर रखनी हो, सरकार की उत्पादकता के आंकड़ों का विश्लेषण करना हो- सरकारी काम के हर हिस्से को निरीक्षण के बाद और ऑटोमेट कर बढ़िया बनाया जा सकता है।
प्रशासन के आधुनिकीकरण में उद्यमी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं और तकनीक का इस्तेमाल कर कुशलता बढ़ाने में और भ्रष्टाचार कम करने में मदद कर सकते हैं।
5-शिक्षा
चाहे सरकार कितनी भी कोशिश करे गांव और शहरों में सरकारी स्कूलों में 10 करोड़ बच्चों को उचित सुविधाओं के साथ शिक्षा देना मुश्किल काम है। इसका एकमात्र उत्तर तकनीक में है।
स्मार्टफोन बाजार को देखें तो भारत दुनिया का सबसे तेज बढ़ने वाला देश है और जल्दी है सबके हाथ में एक फ़ोन जरूर होगा। इनका इस्तेमाल शिक्षा में किया जा सकता है।
शिक्षा से जुड़े हजारों ऐप हैं जो बच्चों को पढ़ाने में फायदेमंद हो सकते हैं। भारतीय उद्यमी इन ऐप को देशी भाषाओं में उपलब्ध करा सकते हैं। वे बच्चों के लिए एक उचित प्लेटफार्म बना सकते हैं जिससे शिक्षा में मदद हो।
अगर बच्चों को किताब पढ़ने की इच्छा न हो तो वह पारंपरिक तरीकों से पढ़ाई कर सकते हैं या फिर वीडियो के जरिए, या फिर गेम्स के माध्यम से भी पढ़ाई कर सकते हैं।डिजिटल ट्यूटर के जरिए शिक्षा के स्तर को भी बनाए रखा जा सकता है।
अमीर और गरीब बच्चों के लिए समान शिक्षा की दिशा में काम किया जा सकता है। प्रधानमंत्री को इस तरह की परियोजनाओं के लिए धन मुहैया कराने के विषय में सोचना चेहिए।
6-स्वच्छ पानी
भारत जैसे विकासशील देश में मौतों की बड़ी वजह दूषित पानी से होने वाली बीमारियां हैं। धनी लोग बोतलबंद पानी पर हजारों रुपए खर्च कर रहे हैं लेकिन यह पानी भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं।
चिली में विकसित की गई तकनीक इस समस्या का समाधान हो सकती है। एडवांस्ड इनोवेशन सेंटर, चिली ने पानी को प्लाजमा स्टेट में बदलने के लिए विद्युत तरंगो का इस्तेमान किया है और इलेक्ट्रोपोरेलन, ऑक्सिडेशन, आयनाइजेशन, यूवी और आईआर रेडिएशन के जरिए पानी के साफ करने की तकनीक बनाई है।
2011 में सेंटियागो में इसका परीक्षण हुआ है और तब से अब तक इसने बढ़िया काम किया है। अमरीका में भी इसके कार्यान्वयन पर काम चल रहा है और इसे अमरीकी उच्च मानदंडों पर खरा पाया गया है।
खेती और जिज्ञासा
7-खेती
मिट्टी में नमी और पानी की जरूरत के लिए सेंसर का इस्तेमाल किया जा सकता है और खेती में अधिक पैदावार के विषय में सोचा जा सकता है। ख़ास
तकनीक लगा कर डेरी और फार्म में भी पैदावार में वृद्धि देखी जा सकती है। इन्हें आसान बनाने के लिए किसानों को स्मार्टफोन्स से जोड़ा जा सकता है।
8- जिज्ञासा
सिलिकॉन वैली में बच्चे 3डी प्रिंटर के साथ खेलते हैं, वे रोबोट बनाने की केशिश करते है और सेंसर के साथ काम करते हैं। इस तरह के उपकरण काफ़ी
सस्ते हैं। काफी कम खर्चे में इस तरह के उपकरण मुहैया कराए जा सकते हैं और उनमें जिज्ञासा का विकास किया जा सकता है।