प्रधानमंत्री के ये 3 तोहफे, बदल देंगे शहरों की तस्वीर
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को शहरी भारत से जुड़ी तीन प्रमुख योजनाओं को हरी झंडी दिखाई। इस दौरान आवासीय योजना के लोगो का भी अनावरण किया गया है। इस लोगो को अंतिम रूप देने में प्रधानमंत्री ने खुद भूमिका निभाई है।
योजनाओं की शुरूआत करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस योजना से गरीब को घर ही नहीं मिलेगा बल्कि उसके जीवन में बदलाव आएंगे और उसके जीवन में उत्थान होगा।
पीएम ने साथ पूर्व यूपीए सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 25-25 जून की यह तारीख ऐतिहासिक है। इसी दिन इमरजेंसी लगाकर देश को जेल में बदल दिया गया था। आज 40 वर्ष बाद हर नागरिक फूले-फूले यही यह सरकार कामना करती है।
उन्होंने कहा कि जयप्रकाश नारायण की स्मृति में राष्ट्रीय स्मारक बनाया जाएगा। मोदी ने कहा स्मार्ट सिटी योजना न केंद्र और न ही राज्य सरकार की योजना है इसे जनता को ही पूरा करना है।
साथ ही मोदी ने सरकारी योजनाओं को आम जनता तक पहुचाने के लिए मीडिया की तारीफ की। प्रधानमंत्री ने सौ स्मार्ट शहर, 500 शहरों के लिए अटल मिशन फार रिजूवनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (एएमआरयूटी) और शहरी क्षेत्र में 2022 तक सभी के लिए घर की परियोजना की क्रियान्वयन गाइडलाइन भी जारी की। इन तीनों परियोजनाओं की गाइडलाइन तैयार करने से पहले एक साल तक राज्यों और स्थानीय शहरी निकायों से गहन मंत्रणा की गई है। प्रधानमंत्री ने इसमें व्यक्तिगत रुचि ली है।
क्या है स्मार्ट सिटी
ये शहर बनेंगे स्मार्ट
जो शहर स्मार्ट बनेंगे उसमें यूपी के लखनऊ,वाराणसी,इलाहाबाद,फैजाबाद,अमेठी,कानपुर और आगरा शामिल है। वहीं हरियाणा में फरीदाबाद,गुड़गांव,पानीपत और अंबाला में से दो शहर हैं।पंजाब में लुधियाना,अमृतसर,पटियाला, और जालंधर में से तीन रहेंगे। इसके अलावा उत्तराखंड में देहरादून रुड़की,हरिद्वार होंगे। हिमाचल में शिमला शामिल है।
नए शहरी युग की घोषणा हैं तीनों परियोजनाएं
शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू का कहना है कि ये तीनों परियोजनाएं नए शहरी युग की घोषणा हैं।
टीम इंडिया का सफर बृहस्पतिवार से शुरू हो जाएगा। इन योजनाओं को पूरा करने में राज्य और स्थानीय निकायों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने कहा कि इनमें निजी भागीदारी के लिए भी बहुत संभावनाएं होंगी।
तीनों योजनाओं के लिए केंद्र सरकार करीब चार लाख करोड़ रुपये देगी। स्मार्ट सिटी और अमरुत योजनाओं के लिए अगले पांच साल में केंद्रीय बजट से क्रमश: 48 हजार करोड़ और 50 हजार करोड़ रुपये दिए जाएंगे।
वहीं आवासीय योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए दो करोड़ सस्ते घर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सात सालों में तीन लाख करोड़ रुपये दिए जाएंगे।