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इन्होंने जीता पीएम मोदी का मन, जानिए कौन हैं ये?

Mon, 30 Nov 2015 12:15 PM IST
Updated Mon, 30 Nov 2015 12:15 PM IST
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PM Modi talks his works 'Man Ki Baat'.

शिवली (कानपुर देहात) के अपने घर में छोटे से सोलर प्लांट की स्थापना करने वाली शिवली क्षेत्र के बैरी दरियाव गांव निवासी नूरजहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ में आकर देश भर में छा गई हैं। वे सोलर लालटेनों को चार्ज करके पांच गांवों के 50 घरों में उजाला करती हैं। इसी काम के लिए प्रधानमंत्री ने नूरजहां की सराहना की है। नूरजहां की इस उपलब्धि पर पूरा गांव खुद को सम्मानित महसूस कर रहा है।

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70 वर्षीय नूरजहां ने तीन साल पहले श्रमिक भारती संस्था के सहयोग से अपने घर के बाहरी कमरे में छोटा सोलर प्लांट स्थापित किया था, जिसमें पांच पैनल घर की छत पर लगे हैं। वह इसी सोलर प्लांट से सोलर लालटेन चार्ज करके गांव वालों को बांटती हैं।
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नूरजहां ने कहा कि उनके आसपास के गांवों में शाम को बिजली मिलना बड़ा मुश्किल है। इसलिए वह 50 घरों में इन्हीं सोलर लालटेन से उजाला फैलाती हैं। सुबह लोग यहां लालटेन लगा जाते हैं और शाम को अपने घर ले जाते हैं। इसके बदले वह 100 रुपये महीना प्रति लालटेन लेती हैं। एक बार लालटेन चार्ज होने पर 6-7 घंटे तक रोशनी देती है।
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बेहद गरीबी के बीच गुजर-बसर कर रहीं नूरजहां का कहना है कि साधन-संसाधन मिलें तो वह हजारों घरों में इसी तरह की रोशनी फैलाना चाहती हैं। श्रमिक भारती संस्था के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राकेश पांडेय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने उनके काम तारीफ की है, जो हमारे लिए सम्मान की बात है।

आम से खास हो गईं नूरजहां

PM Modi talks his works 'Man Ki Baat'.

नूरजहां का नाम पीएम के मुंह में आते ही वे आम से खास हो गईं। पत्रकार व टीवी चैनल वाले सुबह से शाम तक नूरजहां के घर जमे रहे।

पीएम को धन्यवाद देते रहे घरवाले
प्रधानमंत्री के मुंह से काम की तारीफ सुनने वाली नूरजहां गदगद हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सबसे पहले धन्यवाद दिया। उनके बेटों शमशाद, इसहाक अली ने कहा कि उनके लिए बेहद खुशी का दिन है। उनको मौका मिला तो वह इस काम को और आगे ले जाएंगे।

नूरजहां के घर नहीं है रसोई गैस
गरीबी में गुजर-बसर करने वाली नूरजहां के घर रसोई गैस नहीं है। वह बहुओं के साथ मिलकर चूल्हे में कंडों व लकड़ियों से खाना बनाती हैं। नूरजहां ने गरीबी में गुजर-बसर कर पांच बच्चों को पाला पोसा है। बीस साल पहले उनके पति सज्जाखी की मौत हो गई पर नूरजहां ने हिम्मत नहीं हारी।

उनके बेटों शमशाद, इसहाक ने कहा कि गरीबी व अभाव के चलते वह पढ़ लिख नहीं पाए। साधनों का बहुत अभाव था इसीलिए मां ने लालटेन चार्ज करने का काम करना शुरू किया, ताकि दूसरों के बच्चे इसकी रोशनी में पढ़कर आगे बढ़ सकें। बेटे शमशाद ने बताया कि वह पांचों भाई मजदूरी कर पेट पालते हैं।

भाजपाइयों ने सम्मानित किया
शिवली। भाजपा कानपुर नगर के जिलाध्यक्ष सुरेंद्र मैथानी और तमाम भाजपाई बैरीदरियांव पहुंचे और नूरजहां का शाल व नरेंद्र मोदी के फोटो वाली घड़ी भेंटकर सम्मान किया। उन्होंने कहा कि वह नूरजहां की बदहाली दूर करने के लिए प्रयास करेंगे। इस मौके पर मनीष त्रिपाठी, दीपक सिंह, पार्षद सुमित सरोज, गौरव मिश्रा, आशीष शुक्ला आदि मौजूद रहे।

ये हैं नूरजहां
- निवास- कल्यानपुर शिवली रोड किनारे बैरी दरियाव
- पति सज्जाखी की बीस साल पहले मृत्यु हो चुकी है।
- बेटे- निसार, नौशाद, शमशाद, इसहाक अली, नाजिम अली। एक लड़की नफीसा।
- तीन साल पहले घर के सोलर प्लांट से लालटेन चार्ज कर बांटने का काम शुरू किया।

जावेद बने मोदी के मन की बात का हिस्सा

PM Modi talks his works 'Man Ki Baat'.

अनंतनाग जिले के जावेद टाक रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात का हिस्सा बने। बिजबिहाड़ा में 1997 में आतंकी हमले में पांव गंवाने वाले जावेद भले ही व्हील चेयर पर आ गए, पर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। संघर्ष करते रहे।

जावेद ने अपने स्वयंसेवी संगठन के जरिये विकलांगों के कल्याण के लिए काम करना शुरू कर दिया। वे एक स्कूल का भी संचालन कर रहे हैं। मोदी के मन की बात का हिस्सा बनने के बाद प्रसन्नचित जावेद का कहना है कि हौसला हो तो कुछ भी असंभव नहीं।

बिजबिहाड़ा में घर के बाहर किए गए आतंकी हमले में पांव गंवाने के बाद जावेद ने हिम्मत नहीं हारी। परिवार वालों की मदद से हेल्प लाइन नाम का एक स्वयंसेवी संगठन खड़ा किया। फिर जुट गए बच्चों को पढ़ाने के अभियान में।

पहले इस इलाके के लोग बच्चों को स्कूल नहीं भेजते थे, लेकिन, जावेद के प्रोत्साहन से अब लोगों ने बच्चों को स्कूल भेजना शुरू कर दिया है। जावेद कहते हैं कि उनका सपना पुलिस अफसर बनने का था। रविवार को मोदी के मन की बात का हिस्सा बनने के बाद उन्हें लगा कि उनका सपना पूरा हो गया है।

प्रधानमंत्री ने जब उनका नाम लिया तो उन्हें बेहद खुशी हुई और लगा कि उनकी मेहनत रंग लाई है। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम भी उन्हें सम्मानित कर चुके हैं। इसके साथ ही सेना, सीआरपीएफ तथा जम्मू-कश्मीर पुलिस ने भी समय-समय पर उनकी मदद करती रहती है।

सात साल से जैविक खेती कर रहे हैं लखविंदर

PM Modi talks his works 'Man Ki Baat'.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात में नूरमहल के गांव दिव्यग्राम के किसान लखविंदर सिंह का जिक्र किया। इससे पिछले सात साल से जैविक खेती करने वाले लखविंदर दोगुने जोश में थे। लखविंदर दिव्य ज्योति संस्थान से जुड़ा हुआ है।

अमर उजाला से बातचीत में लखविंदर सिंह ने कहा कि उनकी जमीन उनकी मां है। वह अपनी मां पर जहरीली दवाओं का इस्तेमाल नहीं कर सकते। जिस दिन यह विचार दिमाग में आया कि यह तो मां है.. इसको कीटनाशक कितना दर्द देते होंगे, उस दिन जिंदगी में यू टर्न ले लिया।

तब से आज तक उन्होंने कभी अपने खेतों में पेस्टीसाइड का इस्तेमाल नहीं किया। वह सात साल से अपनी 200 एकड़ जमीन में जैविक खेती कर रहे हैं। वह अपने खेतों में गेहूं, हल्दी, चने, मसूर, मौसमी सब्जियां और गन्ना उगाते हैं।

वह गोबर, गोमूत्र, बेसन और गुड़ की खाद बनाकर पानी के जरिए खेतों में डालते हैं। लखविंदर सिंह के पास अपनी करीब 750 देसी गाय भी हैं। उनका कहना है कि पंजाब में कैंसर की बीमारी बढ़ने का असली कारण कीटनाशक और केमिकल या इंजेक्शन लगीं सब्जियां हैं।

फसलों की पहले ही हो जाती है बुकिंग

PM Modi talks his works 'Man Ki Baat'.

लखविंदर सिंह जो भी फसल उगाते हैं, उसके लिए पहले से ही बुकिंग हो जाती है। उनका कहना है कि जैविक खेती कुछ मंहगी होने के कारण उनको कनक की फसल आम फसल से डेढ़ गुना मंहगी बेचनी पड़ती है लेकिन इसके बावजूद उनकी फसलों की पहले से ही बुकिंग हो जाती है।

उनकी फसलों की गुणवत्ता को देखकर उनके पास 100 के करीब जमींदार आ चुके हैं, जो उनसे बीज ले जाकर जैविक खेती की शुरुआत कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि उनके पास किसान और जमींदार जैविक खेती की ट्रेनिंग के लिए भी आते हैं। उसका मिशन पंजाब में जैविक खेती को पूरी तरह से फैलाना है।

जमीन को आग लगाना ठीक नहीं
किसान लखविंदर सिंह का कहना है कि जो किसान फसल उगाने के बाद जमीन को आग लगा देते हैं, उनकी जमीन की उपजाऊ शक्ति नष्ट हो जाती है। जमीन के 6 इंच नीचे तक सूक्ष्म जीवाणु होते हैं। यह जीवाणु काफी ताकतवर और फसल के लिए फायदेमंद होते हैं। किसान खेतों में आग लगा और पेस्टीसाइड का इस्तेमाल करके इन्हें नष्ट कर देते हैं। इस कारण उनकी फसल में विटामिन कम और बीमारियां ज्यादा होती हैं।

---कोट---
जैविक खेती में मेहनत ज्यादा लगती है जिसके कारण किसान इसकी तरफ ज्यादा ध्यान न देकर कनक और धान की फसल में ही उलझे रहते हैं।
लखविंदर सिंह, किसान

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