कूटनीति के नए अंदाज से मोदी ने दिलाई भारत को बढ़त
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बिना किसी तामझाम और बेहद खामोशी से पाकिस्तान की धरती पर अचानक कदम रख कर समग्र वार्ता से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को पाकिस्तान पर कूटनीतिक बढ़त दिला दी है।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) स्तर की वार्ता फिर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के बाद खुद पाकिस्तान पहुंच कर पीएम मोदी ने अपनी कूटनीतिक ‘गुगली’ के जरिये दुनिया को यह संदेश दिया है कि भारत न केवल दोस्ती की नए सिरे से की गई पहल को गंभीरता से ले रहा है, बल्कि वह पाकिस्तान के साथ अपने सभी द्विपक्षीय मामलों को सुलझाने के प्रति भी संजीदा है।
विदेश मामलों के विशेषज्ञ मोदी के इस कदम को कूटनीति के क्षेत्र में उनके एक और नए प्रयोग के तौर पर देख रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम मोदी ऐसे समय में पाकिस्तान से समग्र वार्ता के लिए राजी हुए हैं जब आतंकी संगठन आईएस के बढ़ते खतरे और पेरिस में हुए आतंकी हमले के बाद दुनिया के ताकतवर देश आतंकवाद के खिलाफ नए सिरे से एकजुट हैं।
ऐसे में जाहिर तौर पर पीएम मोदी की पाकिस्तान जा कर बढ़ाए गए दोस्ती के हाथ और इसके बाद होने वाली समग्र वार्ता में पाकिस्तान पर आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव बढ़ेगा।
दोनों देशों में वार्ता के प्रति बदल रहे हालात
पूर्व विदेश सचिव सलमान हैदर इसे पीएम मोदी को बेहतरीन कूटनीतिक कदम मानते
हैं। बकौल हैदर बीते समय से दोनों देशों में वार्ता के प्रति हालात तेजी से
बदले हैं।
मोदी की इस अचानक यात्रा के पीछे समग्र वार्ता के लिए राजी होने
से पहले तनातनी के दौर को पाटने की कोशिश के साथ-साथ दुनिया को यह दिखाना
है कि भारत वाकई पाकिस्तान से ईमानदारी से बातचीत करना चाहता है।
हैदर के
मुताबिक दूसरी तरफ पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ ने भारत से बिना शर्त
बातचीत के बाद आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का संकेत दे कर हमारे पक्ष
को भी समझा है।
पाकिस्तान नीति को सही ट्रैक
फिर इस समय पाकिस्तान की सेना घरेलू और वैश्विक मंच पर भी
आतंकवाद के मामले में दबाव में है। ऐसे मौके पर पीएम मोदी की पाकिस्तान
यात्रा ने एक नया कूटनीतिक अध्याय लिखा है।
एक अन्य पूर्व विदेश सचिव
शशांक भी मोदी की पाकिस्तान यात्रा को बेहद सधा हुआ कूटनीतिक कदम मानते
हैं। शशांक कहते हैं पीएम ने अचानक पाकिस्तान का दौरा कर कूटनीति की गेंद
उसके पाले में डाल दी है। इस यात्रा के जरिये भारत ने दुनिया को साफ संदेश
दिया है कि अगर पाकिस्तान आतंकवाद से वाकई निपटना चाहता है तो भारत पूरी
ईमानदारी से उसके साथ खड़ा है।
बकौल शशांक मोदी की इस यात्रा से समग्र
वार्ता में एक बार फिर से आतंकवाद को सर्वाधिक महत्वपूर्ण जगह मिलेगी। भारत
के लिए इसका कूटनीतिक लाभ यह है कि यही एक मुद्दा है जो कि पाकिस्तान की
दुखती रग है।
पीएम मोदी इससे पहले पाकिस्तान के साथ विदेश सचिव स्तर के
साथ-साथ एनएसए स्तर की वार्ता को टालने के लिए दरअसल आतंकवाद को मुख्य
एजेंडे में लाने की कवायद में जुटे थे।
अब जबकि दोनों पक्षों की ओर से
बार-बार आतंकवाद को सबसे प्रमुख मुद्दा मानने में रजामंदी दिखती है, ऐसे
में नई सरकार की पाकिस्तान नीति को सही ट्रैक मिलने की बात मानी जा सकती
है।