परिकर को रक्षा मंत्री बनाने के पीछे ये है मोदी का दांव
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गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर परिकर को अचानक रक्षा मंत्रालय जैसा अहम पद दिए जाने का लगभग तय फैसला अनायास नहीं है। दरअसल पीएम नरेंद्र मोदी राजनीति का बेदाग चेहरा माने जाने वाले परिकर के जरिये यूपीए सरकार की तर्ज पर ही एंटनी दांव आजमाना चाहते हैं।
यूपीए सरकार ने भी रक्षा सौदे में गड़बड़ी संबंधी आरोपों से सरकार की छवि को पाक-साफ बनाए रखने के लिए राजनीति के बेदाग चेहरे को लगातार सात साल तक रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी थी।
एंटनी की साफ छवि के कारण उनके कार्यकाल में हुए आधा दर्जन से अधिक घोटालों और बड़े विवादों के बावजूद विपक्ष उन पर सीधा हमला नहीं बोल पाया था। एंटनी के कार्यकाल के दौरान अगस्तावेस्ट लैंड, टाट्रा ट्रक खरीद, हल्के हेलीकॉप्टर खरीद घोटाले जैसे कई मामले सामने आए थे।
विपक्षी हमलों को थामने की है रणनीति
रक्षा मंत्री के रूप में परिकर को लाना इसलिए भी जरूरी है कि क्योंकि मोदी सरकार जल्द ही कई रक्षा सौदों को मंजूरी देने वाली है। रिकार्ड देखें तो पता चलता है कि रक्षा सौदों को मंजूरी देते वक्त विवाद होते रहे हैं,जिससे निपटने में परिकर सक्षम साबित हो सकते हैं।
पिछले साल अरविंद केजरीवाल की ईमानदार नेता की छवि को मीडिया में महत्व मिलने पर मोदी ने परिकर की साफ-सुथरी छवि की तारीफ कर गोवा के सीएम को आगे किया था।
भाजपा सूत्रों का कहना है कि चूंकि रक्षा क्षेत्र में यूपीए सरकार के दौरान सेना की जरूरतों और मांग के बावजूद कई सौदों को टाला गया, इसलिए मोदी सरकार को इस क्षेत्र के सौदों को तत्काल मंजूरी देनी होगी। इसके अलावा रक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा बढ़ा कर 49 फीसदी किए जाने से व्यापक निवेश की भी संभावना है।