पीएम ने कुवैती छात्रा को लिखी चिट्ठी, पढ़िए क्या लिखा?
जम्मू कश्मीर के बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए दो लाख रुपये से अधिक धनराशि जुटाने वाली भारतीय छात्रा को प्रधानमंत्री ने व्यक्तिगत तौर पर पत्र भेजकर सराहा है। 16 वर्षीय डी रोहणी प्रत्युशा कुवैत स्थित भारतीय विद्या भवन में कक्षा 12 की छात्रा हैं।
उन्होंने स्कूल के समय के बाद बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए 2.15 लाख रुपये की इकट्ठा कर प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा किया है। रोहणी ने इस धनराशि को कुवैत स्थित भारतीय दूतावास के माध्यम से भेजा है।
पीएम नरेंद्र मोदी ने उन्हें भेजे पत्र में लिखा, "दूसरों की सहायता करना दुनिया का सबसे नेक काम है। खास कर उन लोगों की सहायता जो किसी आपदा के शिकार हुए हैं।"
उन्होंने प्रत्युशा के नेतृत्व और संगठनात्मक योग्यता की जमकर सराहना की। पिछले महीने जम्मू-कश्मीर में आई बाढ़ से हजारों लोग बेघर हो गए थे।
भारतीय छात्रा ने जुटाए 2.15 लाख रुपये
डी आर प्रत्युशा कुवैत में भारतीय विद्या भवन की 12वीं की छात्रा है। उसने जम्मू कश्मीर के बाढ़ पीड़ितों के लिए 1001 कुवैत दीनार प्रधानमंत्री राहत कोष के लिए एकट्ठा किया। उसने ये राशि अपनी कोशिशों से कुवैत के लोगों से जुटाई।
प्रत्युशा ने कुवैत स्थित भारतीय दूतावास में सवा दो लाख की राशि जमा कराई। उसने ये राशि कश्मीर में बाढ़ पीड़ितों को सहयोग के लिए जुटाई। प्रत्युशा से जब पूछा गया कि आखिर उसने जम्मू-कश्मीर बाढ़ पीड़ितों के लिए ये कदम क्यों उठाया?
प्रत्युशा ने बताया कि एक बार गर्मी की छुट्टियों में वो जम्मू-कश्मीर गई थी। वहां के लोगों को करीब से जानने और समझने का उसे मौका मिला। उसके बाद जब उसे पता चला कि इस बार बाढ़ से वहां के हालात खराब हो चले हैं तो उसने उन लोगों के सहयोग की योजना बनाई।
जम्मू कश्मीर बाढ़ पीड़ितों के लिए जुटाई राशि
इसके लिए उसने कुवैत में बाढ़ पीड़ितों के लिए फंड जुटाना शुरू किया। उसने इसके लिए कुवैत स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क किया। उनके सहयोग से उसने अपनी कोशिशें शुरू की।
निजी स्तर पर उसने लोगों को इससे जोड़ने के की कोशिश की। पहले उसने अपने दोस्तों को इसके लिए एकजुट किया। फिर दूसरे लोगों के बीच इसे लेकर गए। आखिरकार उसे अपने प्रयासों में कामयाबी मिली।
अपने इन प्रयासों पर उसका कहना था कि हम सभी भारतीय हैं और हमें भारतीय होने पर गर्व है। हम यही चाहेंगे कि भले ही हम अपने देश से दूर हों लेकिन हमारा ये फर्ज बनता है कि हम भारत में रह रहे अपने भाई-बहनों के लिए कुछ कर सकें।
उसके प्रयासों के चलते ही खुद प्रधानमंत्री भी उससे खासे प्रभावित हुए और उन्होंने उसको बाकायदा पत्र लिखकर उसके उठाए गए कदम की सराहना की।