बर्लिन में पीएम मोदी, भारत की तरक्की का दिया नया मंत्र
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जर्मनी के बर्लिन शहर में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि हमें दुनिया को देने वाला देश बनना होगा, न कि दुनिया से लेने वाला देश।
उन्होंने कहा कि विनिर्माण हब बनने के लिए जीरो डिफेक्ट और जीरो इफेक्ट पर जोर देना होगा। उन्होंने कहा कि हमने ऐसा कर दिखाया है। आज आईटी सेक्टर में हमारा दबदबा है।
उन्होंने कहा कि यहां के भारतीयों से पूरे देश को उम्मीद है। यहां बसे भारतीय दोनों देशों के बीच सेतु का काम करें। भारत तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था है। इसे दुनिया में तेजी से तरक्की के लिए तीन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा जोर देना होगा। एक तिहाई हिस्सा कृषि क्षेत्र, निर्माण क्षेत्र में और एक तिहाई हिस्सा सेवा क्षेत्र में देना होगा।
पीएम ने कहा कि देश के विकास में रेलवे बड़ी भूमिका निभा सकता है। इसके लिए रेलवे के नए मॉडल विकसित करने होंगे।
'प्रकृति का रखना होगा ख्याल'
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि आज दुनिया में पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के लिए दुनिया हमें जिम्मेदार ठहराती है। मगर, हमारा इतिहास है कि हम जितना प्रकृति का सम्मान करते हैं, उतना शायद ही कोई और करता हो। जो समाज सूर्य, नदी, पर्वत, वृक्षों के रूप में प्रकृति की पूजा करता रहा हो, वह कभी प्रकृति के खिलाफ नहीं जा सकता है। इसलिए किसी को इस बारे में हमें बताने की जरूरत नहीं है। भारत अक्षय ऊर्जा के लिए काम करने पर जोर दे रहा है।
मोदी ने कहा कि जर्मनी की कंपनियां अगर सोलर पैनल निर्माण में अपने अनुभव हमारे साथ साझा करती हैं तो इसका हमारे साथ-साथ पूरी दुनिया को फायदा होगा। हमारे डीएनए में रियूज और रिसाइकिल की आदत है। घर में पुराने कपडे़ का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करना इसका उदाहरण है। हिंदुस्तान की संस्कृति में, जीवन में ये परंपराओं के रूप में मौजूद हैं।