पीएम मोदी के बिहार विशेष पैकेज में छेद ही छेद
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के लिए विशेष पैकेज का ऐलान कर सियासत को हवा दे दी है। मगर उनके इस पैकेज में कई छेद रह गए हैं।
कई योजनाओं की राशि को विशेष पैकेज के रूप में परोस दिया गया है, जोकि पहले से ही घोषित थी। ऐलान की राशि को लेकर समय सीमा निर्धारित नहीं की गई है।
सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि कितने समय में यह राशि बिहार को मिलेगी। सबसे ज्यादा राशि राजमार्ग और रेलवे की परियोजनाओं के मद में दिया गया है।
जोकि बजटीय आवंटन का हिस्सा हैं। बक्सर में 1300 मेगावाट के नए विद्युत संयंत्र का ऐलान पैकेज में किया गया है। यूपीए शासन के दौरान ही इस विद्युत संयंत्र की घोषणा हुई थी।
कौशल विकास के लिए नए विश्वविद्यालय खोलने की बात हुई है लेकिन इसके लिए स्थान का नाम तय नहीं हुआ है। जबकि 40 हजार 657 करोड़ रुपये पहले से चल रही परियोजनाओं के लिए है। पिछले सरकार के कामों का सेहरा भी पीएम ने अपने सिर बांधने का प्रयास किया है।
पीएम के ऐलान को बताया चुनावी झुनझुना
सियासी गलियारे में पीएम के इस ऐलान को चुनावी झुनझुना करार दिया जाने लगा है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आम बजट पेश करते हुए संसद में बिहार के विशेष सहायता की बात तो कही थी।
लेकिन सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश के विशेष राज्य के दर्जे की मांग को जेटली ने यह कहते हुए खारिज किया कि 14वें वित्त आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद राज्यों को मिलने वाले विशेष दर्जा और सहायता का प्रावधान नहीं रह गया है। बावजूद उसके सियासी लाभ के मद्देनजर पीएम मोदी ने बिहार को विशेष पैकेज का नाम दिया है।
बिहार के विशेष पैकेज के ऐलान के बाद सियासी जगत में इस बात की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है कि अब हर चुनावी राज्य से इसकी मांग उठेगी। तो यह भी कहा जाने लगा है कि उत्तरप्रदेश चुनाव से पहले भाजपा देश के सबसे बड़े प्रदेश के लिए भी यह दांव खेल सकती है।