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डिनर डिप्लोमेसी में भाजपा को नहीं मना पाए प्रधानमंत्री
नई दिल्ली/कोलकाता/ब्यूरो
Updated Fri, 23 Nov 2012 07:33 AM IST
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एफडीआई रिटेल पर चर्चा के बाद मतदान न कराने के प्रधानमंत्री के प्रस्ताव को भाजपा ने सिरे से खारिज कर दिया है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बृहस्पतिवार को भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरूण जेटली को रात्रिभोज पर आमंत्रित किया था।
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भाजपा नेताओं ने पीएम के इस सुझाव को नकारते हुए साफ तौर पर कहा कि एफडीआई रिटेल पर व्यापक चर्चा पिछले मानसून सत्र में ही हो चुकी है। लिहाजा अब इस मुद्दे पर सिर्फ और चर्चा कराने का कोई मतलब नहीं है।
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जाहिर है कि एफडीआई रिटेल पर भाजपा ने लोकसभा में नियम 184 के तहत चर्चा कराने का नोटिस दिया है। इसमें चर्चा के बाद वोटिंग कराए जाने का प्रावधान है। वहीं, केंद्र सरकार एफडीआई रिटेल पर नियम 193 के तहत चर्चा कराना चाहती है।
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विपक्ष का कहना है कि एफडीआई पर चर्चा मानसून सत्र में हो चुकी है। लिहाजा इस पर सिर्फ चर्चा कराने से बात नहीं बनेगी। यदि सरकार के पास इस मुद्दे पर सभी दलों का समर्थन प्राप्त है तो वह वोटिंग से पीछे क्यों हो रही है।
एफडीआई पर चर्चा के बाद वोटिंग के विपक्ष के प्रस्ताव को टालने के लिए प्रधानमंत्री ने रात्रिभोज के बहाने भाजपा नेताओं को आमंत्रित किया था। भाजपा नेताओं को इससे पहले 17 नवंबर को भी पीएम ने रात्रिभोज पर आमंत्रित किया था। लेकिन उसी शाम शिवसेना प्रमुख बाला ठाकरे के निधन के कारण इसे टाल दिया गया।
अगले दिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कंबोडिया की यात्रा पर रवाना हो गए थे। जहां से वे मंगलवार रात लौटे। 26/11 आतंकी हमले के गुनहगार अजमल कसाब को बुधवार को फांसी दिए जाने के बाद की गहमा-गहमी के बीच बृहस्पतिवार से शुरू हुए शीतकालीन सत्र के पहले दिन दोनों सदनों में विपक्षी दलों के तेवरों को देखते हुए प्रधानमंत्री ने एफडीआई सहित कई अन्य मुद्दों पर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से रात्रि भोज के दौरान विस्तृत गुफ्तगू की।
सरकार बचाने वालों का चेहरा बेनकाब: ममता
केंद्र सरकार के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस की ओर से लोकसभा में लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के खारिज होने के कुछ घंटों बाद ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सरकार को बचाने वाले दलों पर जमकर निशाना साधा।
ममता ने सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट फेसबुक पर लिखा, ‘आज आपने देखा कि लोगों के लिए मेरी प्रतिबद्धता के अनुरूप तृणमूल केंद्र सरकार के खिलाफ लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव लाई। हमारी सीमितताओं के चलते यह खारिज हो गया। मगर हमें लगा था कि एफडीआई सहित केंद्र की अन्य जन विरोधियों के खिलाफ रहने वाले दल इसका समर्थन करेंगे, लेकिन वे विभिन्न बहानों का हवाला देते हुए आगे नहीं आए। अब आपके सामने सरकार बचाने वालों का चेहरा बेनकाब हो गया है।’