वेदांता को हिस्सेदारी बेचने के खिलाफ याचिका दायर
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सरकारी कंपनी हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड में सरकार की हिस्सेदारी वेदांता समूह को बेचने के 12 साल बाद सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर इस सौदे को निरस्त करने का अनुरोध किया गया है।
पिछली एनडीए सरकार के समय यह सौदा हुआ था। जस्टिस विक्र मजीत सेन और शिवकीर्ति सिंह की बेंच के समक्ष याचिकाकर्ता वकील मनोहर लाल शर्मा ने इस मामले का उल्लेख किया, लेकिन अदालत ने इस पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया।
गलत तरह से लिया गया था निर्णय
अदालत ने इस मामले को ग्रीष्मावकाश के बाद सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि कंपनी की कीमत कम आंकी गई और इसे कौड़ियों के दाम पर वेदांता समूह को बेच दिया गया।
याचिका में अनुरोध किया गया है कि अप्रैल 2002 और अगस्त, 2003 में विनिवेश मंत्रालय द्वारा हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के इक्विटी शेयर बेचने के सौदे को गैरकानूनी घोषित किया जाए।
वेदांता समूह की कंपनी स्टर्लाइट अपार्च्युनिटीस एंड वेंचर्स की हिंदुस्तान जिंक में करीब 64 फीसदी हिस्सेदारी है। इस कंपनी ने 2002 में हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के 26 फीसदी शेयर खरीदे थे। लेकिन बाद में कंपनी ने 20 फीसदी शेयर और खरीद लिये। कंपनी ने इसके बाद 2003 में 18.92 फीसदी अतिरिक्त शेयर ले लिए थे।