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साईं बाबा मंदिर में हवाई जहाज बना आकर्षण का केंद्र

Sat, 22 Nov 2014 01:02 PM IST
Updated Sat, 22 Nov 2014 01:02 PM IST
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The plane became the center of attraction in sai temple

यह सवाल आपको बचकाने लग सकते हैं, लेकिन भारत की 97 प्रतिशत आबादी के लिए हवाई यात्रा दूर की कौड़ी है, इसलिए हवाई जहाज़ को लेकर उत्सुकता बनी रहती है। दिल्ली के अलीपुर इलाके में साईं बाबा मंदिर में पहुंचने वाले लोग हवाई जहाज़ के बारे में सवाल पूछते हैं...लेकिन क्यों?

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पढ़िए अंकुर जैन की पूरी रिपोर्ट
दिल्ली के प्रॉपर्टी डीलर राकेश दीक्षित ने एक हवाई जहाज़ ख़रीदा है। वह कहते हैं, "मैंने शेखी बघारने के लिए नहीं, साईं बाबा के लिए जहाज़ ख़रीदा है। किसी ने मुझसे कहा कि मैं साईं बाबा ने लिए कुछ करूं तो मैंने एक हवाई जहाज़ खरीदकर उसमें उनका संग्रहालय बनाने के बारे में सोचा।"
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दीक्षित ने नीलामी में एयर इंडिया की 20 साल पुरानी 220-सीटर एयरबस-310, 60 लाख रुपए में ख़रीदी।

वह बताते हैं, "यह जहाज़ मैंने 2012 में लिया, पर उससे पहले मैंने दो बोइंग जहाज़ लिए थे, छोटे संग्रहालय के लिए।"

जहाज़ लेने के लिए उन्होंने साईं बाबा एरोनॉटिक्स ट्रस्ट भी बनाया। अब वह संग्रहालय छोड़ इस जहाज़ में रेस्तरां बना रहे हैं, "मैंने इस पर अभी तक 1.5 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यहाँ इस हवाई जहाज़ को देखने हज़ारों लोग रोज़ इकट्ठा होते हैं। प्रशासन नहीं चाहता कि हाईवे पर संग्रहालय बनाया जाए।"
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लेकिन दीक्षित इस जहाज़ का जो भी करें, दिल्ली में अलीपुर और वहां से गुज़रने वालों के लिए तो यह जहाज़ पिछले दो साल से आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

स्थानीय स्तर पर मरम्मत

The plane became the center of attraction in sai temple

अलीपुर के नज़दीक के नरेला गांव में रहने वाले विजयपाल अक्सर अपने दोस्तों और परिवार के साथ इसे देखने आते हैं। वो कहते हैं, "कई बार जहाज़ देखकर भी मन नहीं भरता। यकीन नहीं आता यह असली है।"

अलीपुर के संदीप सिंह कहते हैं, "जहाज़ आने से पहले हमारे इलाक़े को कोई नहीं जानता था, लेकिन अब सबको पता है। जब यह पहली बार यहां आया तो बच्चे सुबह-शाम खाना भी इसी के पास बैठकर खाते थे और पढ़ते भी यहीं थे।"

जहाज़ के मालिक राकेश दीक्षित बताते हैं, "भीड़ हो या मरम्मत चल रही हो तो लोगों को जहाज़ के अंदर नहीं जाने देते। लेकिन वह बाहर खड़े-खड़े इसे देखा करते हैं। हमें पैसे दे कर बोलते हैं कि असली वाले में तो बैठ नहीं सकते इसी को देखने दो। जब हम कहते हैं कि यह असली है तो मानते ही नहीं।''

राकेश दीक्षित ने एक नीलामी में इस जहाज को 60 लाख रुपए में लिया था।

यह लाइट्स कहां लगाओगे

The plane became the center of attraction in sai temple

उन्होंने जहाज़ की सारी मरम्मत घरों में ट्यूबलाइट और पंखे ठीक करने वाले दयानंद मौर्या और खिड़की दरवाज़े वैल्डिंग करने वाले शेर मोहम्मद से करवाई।

मौर्या बताते हैं, "इस जहाज़ को अलग-अलग टुकड़ों में यहां लाया गया था और हमें इसे बनाने में छह महीने लगे। जब मैं इसके कॉकपिट में लगाने के लिए लाइट्स लेने गया तो दुकानदार ने पूछा कि यह लाइट्स कहां लगाओगे? जब मैंने कहा कि जहाज़ में तो वह ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगा।"

'इंजन, पेट्रोल टैंक कहां है'
जहाज़ का लुत्फ़ मंदिर के पास से रोज़ गुज़रने वाले ट्रक चालक भी उठाते हैं। वह इसे देखने के बाद अपने परिवार को भी दिखाने लाते हैं। सोनीपत के मुनीर इक़बाल जहाज़ देख कर सोचते हैं कि क्या इसमें भी उनके ट्रक की तरह गियर और स्टीयरिंग है?

प्लेन में बाथरूम भी होता है!

The plane became the center of attraction in sai temple

इक़बाल कहते हैं, "मैंने जब जहाज़ को अंदर से देखा तो पता चला इसमें बाथरूम होता है। पर हवा में टर्न कैसे लेते है यह समझ नहीं आता। सबसे अजीब बात है कि पायलट के कमरे से ज़मीन दिखती ही नहीं और उसमें इतने बटन होते हैं कि ड्राइवर इन्हें देख कर ही पागल हो जाए।"

मंदिर में काम करने वाली कौशल्या देवी कहती हैं, "ट्रक वाले तो मुझसे बस एक ही बात कहते हैं अगर यह असली है तो इसका इंजन या पेट्रोल टैंक दिखाओ। मैं कहती हूँ यह तो मैं भी नहीं जानती कि कहां है?"

राकेश दीक्षित का यह जहाज़ भले ही उड़ न सकता हो पर लोगों को यह उड़ने के सपने ज़रूर दिखाता है।

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