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कहां-कहां मिली खजाने की अकूत संपदा

Fri, 18 Oct 2013 04:35 PM IST
Updated Fri, 18 Oct 2013 04:35 PM IST
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Place where treasury found in india

भारतीय पुरातत्व विभाग ने उत्तर प्रदेश के उन्नाव ज़िले में आज से खुदाई शुरू कर दी है। यह खुदाई कथित रूप से शोभन सरकार नामक एक साधु के एक सपना देखने पर आधारित है।

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इस साधु ने सपना देखा था कि राजाराव रामबक्श के किले के खंडहर में एक हज़ार टन सोना दबा हुआ है। जबकि भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने यहाँ जमीन के नीचे भारी मात्रा में किसी धातु के दबे होने की पुष्टि की है।
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भारत में पहले भी इस तरह खज़ाने मिलने की बात जब-तब सामने आती रही हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ चर्चित मामलों के बारे में।

श्री पद्मानाभास्वामी मंदिर
फरवरी, 2012 के में केरल के तिरुवनंतपुरम में 16वीं सदी के श्री  पद्मानाभास्वामी (विष्णु) मंदिर के दो भूमिगत तहखानों से अरबों रुपए के कीमती हीरे, सोना और चांदी बरामद हुई थी।
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इस मंदिर को 16वीं सदी में त्रावनकोर के राजाओं ने बनवाया था। स्थानीय लोकगाथाओं में ज़िक्र है कि मंदिर की दीवारों और तहखानों में राजाओं ने ख़ासे हीरे- जवाहरात छिपा दिए थे।

देश में भगवान विष्णु के मशहूर मंदिरों में शुमार इस मंदिर में नौ सौ अरब रुपए की कीमत का खज़ाना होने की बात कही जा रही थी।

रिपोर्टों के मुताबिक मंदिर के खज़ाने को सूचीबद्ध करने के लिए विशेष रुप से विकसित किए गए डिवाइस का इस्तेमाल किया गया था।

माना जाता है कि श्री पद्मानाभास्वामी (विष्णु) मंदिर के चार में से दो तहखानों को पिछले 130 वर्षों से खोला नहीं गया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सात सदस्यों की एक समिति को इनमें दाख़िल होने और वहाँ मौजूद चीज़ों का आकलन करने का आदेश दिया था।

अनाधिकारिक आकलन के मुताबिक चार दिन के निरीक्षण में पाई गई चीज़ों की कीमत करीब 25 अरब रुपए थी। लेकिन इतिहासकारों का कहना है कि इन चीज़ों की असल कीमत बता पाना बहुत ही मुश्किल है।

हैदराबाद में खज़ाना


फरवरी, 2012 ही में हैदराबाद में पुरातत्व विभाग ने कथित ख़जाने की खोज में एक स्कूल के पास से अंधाधुंध खुदाई की लेकिन  खज़ाना मिलना तो दूर एक कौड़ी भी नहीं मिली।

जिस पहाड़ी पर खुदाई की जा रही थी उसे नौबत पहाड़ के नाम से जाना जाता है जिस पर मशहूर बिरला मंदिर बना हुआ है। राज्य सचिवालय भी इस मंदिर से नजदीक ही है।

चन्ना रेड्डी की अगुआई में बड़ी गंभीरता से खुदाई कर रहे पुरातत्व विभाग के अधिकारियों को भरोसा था कि यहाँ एक गुफा और ख़जाना निकलेगा।

लेकिन स्थानीय लोग और अन्य पुरातत्व विशेषज्ञ इस प्रयास का मज़ाक उड़ा रहे थे। उनका कहना था कि इस जगह पर कभी कोई गुफा नहीं थी।

खुदाई वाली जगह पर वानपर्ति संस्थान का मालिकाना हक़ है। इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज की संयोजक अनुराधा रेड्डी इस खुदाई से नाराज़ भी हुईं थीं।

आंध्र प्रदेश के पुरातत्व विभाग के मंत्री वट्टी वसंत कुमान ने भी खुदाई वाली जगह का मुआयना किया था। अधिकारियों ने खुदाई की जगह तीन बार बदली लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिला।

बिहार के भरतपुरा में खज़ाना

बिहार के भरतपुरा गाँव में दिख रहे ऊंचे टीले पर निजी मकान के एक हिस्से में दुर्लभ पांडुलिपियों के अलावा अति प्राचीन सिक्कों और कलाकृतियों का अदभुत संग्रह हो सकता है।

भरतपुरा लाइब्रेरी के नाम से जाने जा रहे इस छोटे-से संग्रहालय की सुरक्षा तब से बढ़ा दी गई, जब चार दशक पहले यहाँ से चुराई गई कुछ बहुमूल्य कृतियों को सीबीआई ने बड़ी मुश्किल से बरामद किया था।

जयगढ़ का खज़ाना


ऐसा माना जाता है जयपुर के राजा मान सिंह प्रथम ने अपना अकूत खज़ाना सम्राट अकबर से बचाकर जयगढ़ के किले में छिपा दिया था।

स्थानीय पूर्वजों के अनुसार राजा मान सिंह ने यह खज़ाना भूमिगत कुंओं में छिपा दिया था। कहा जाता है पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल के वक्त जयगढ़ के किले में खुदाई का आदेश दिया था।

उस वक्त विपक्षी दलों ने इंदिरा गाँधी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने दिल्ली-जयपुर मार्ग जनता के लिए बंद कर दिया था और किले में मिले खज़ाने को सेना के ट्रकों में लादकर प्रधानमंत्री निवास ले जाया गया था।


हालाँकि अभी तक इस बारे में कोई पुष्ट जानकारी नहीं मिली है कि मानसिंह का खज़ाना था भी या नहीं, और अगर था तो यह अभी भी जयगढ़ के किले में ही छिपा है या निकाल लिया गया है?
कोल्हापुर के महालक्ष्मी मंदिर का खज़ाना

जनवरी 2010 में महाराष्ट्र के कोल्हापुर में स्थित महालक्ष्मी मंदिर के महाखज़ाने ने सबकी आँखें चौंधिया दीं थीं।

करीब 900 साल पुराने इस मंदिर में खज़ाने की गिनती के दौरान बेशुमार करोड़ों के हीरे- जवाहरात औऱ आभूषण पाए गए थे।

कहा जाता है कि मंदिर में कोंकण के राजाओं, चालुक्य राजाओं, आदिल शाह, शिवाजी और उनकी मां जीजाबाई तक ने चढ़ावा चढ़ाया था।

यह मंदिर 27 हजार वर्गफीट में फैला हुआ है। आदि शंकराचार्य ने महालक्ष्मी की मूर्ति की मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा की थी।

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