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आरक्षण के मुद्दे पर फंसा पेंच, कोर्ट पहुंचा मामला

Fri, 27 Jun 2014 09:00 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मुंबई
ब्यूरो/अमर उजाला, मुंबई Updated Fri, 27 Jun 2014 09:00 PM IST
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PIL in High Court against the Maratha reservation

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सत्तारूढ़ कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन की ओर से चला गया आरक्षण कार्ड का मुद्दा अब कोर्ट पहुंच गया है।

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मराठों और मुसलमानों को अक्तूबर में अलग से आरक्षण देने के सरकार के फैसले के खिलाफ बांबे हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है।

ये याचिका समाजसेवी केतन तिरोडकर ने नए आरक्षण को संविधान के खिलाफ बताते हुए सरकार के फैसले को चुनौती दी है। महाराष्ट्र सरकार ने दो दिन पहले ही मराठों को 16 फीसदी और मुसलमानों को पांच फीसदी आरक्षण देने की घोषणा की है।
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महाराष्ट्र में पहले से लागू है 52 फीसदी आरक्षण

PIL in High Court against the Maratha reservation

मराठों और मुसलमानों को आरक्षण देने के लिए एक सामाजिक और शैक्षणिक विशेष प्रवर्ग तैयार किया गया है।

नए फैसले में इस प्रवर्ग के लिए शिक्षा और नौकरी में आरक्षण लागू किया जाएगा। पहले से ही यह आशंका थी कि इस मामले में कोर्ट में याचिका दाखिल होगी और राज्य सरकार को जवाब देना पड़ेगा।

इस सवाल पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने भी कहा था कि सरकार कोर्ट में अपना पक्ष रखेगी।

नए आरक्षण से आंकड़ा 73 फीसदी पहुंचा

PIL in High Court against the Maratha reservation

सर्वोच्च न्यायालय ने एक फैसले में 50 फीसदी से अधिक आरक्षण को गैरकानूनी बताया है जबकि महाराष्ट्र में 52 फीसदी आरक्षण पहले से ही लागू है।

अब मराठों को 16 फीसदी और मुस्लिमों को पांच फीसदी अलग से आरक्षण देने से यह आंकड़ा बढ़कर 73 फीसदी हो गया है। महाराष्ट्र में पिछले 20 साल से राजनीति में मराठों का वर्चस्व रहा है।

अधिकृत सूत्रों के अनुसार बीते चार दशक में महाराष्ट्र विधानसभा के लिए कुल 2430 सदस्य चुने गए, जिसमें से करीब 1336 सदस्य मराठा थे।

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