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अच्छे दिनों पर मोदी सरकार को घसीटा

Thu, 26 Jun 2014 07:18 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 26 Jun 2014 07:18 PM IST
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PIL against PM Modi and Bjp asks about ache din

नरेंद्र मोदी सरकार ने अपना एक महीना पूरा कर लिया है, लेकिन इस एक महीने में मोदी सरकार के कार्यकाल को लेकर कई सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं।

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लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी और मोदी के नारे 'अच्छे दिन आने वाले हैं' को लेकर पीआईएल दायर की गई है।

जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी पर वादे तोड़ने के आरोप लगाए गए हैं।

बंबई हाईकोर्ट में याचिका

PIL against PM Modi and Bjp asks about ache din

मुंबई की संस्था ऑल इंडिया एंटी करप्शन और सिटिजन वेलफेयर कोर कमेटी के संस्थापक वकील एमवी होलमाघी की ओर से ये पीआईएल दायर की गई है। जिसमें उन्होंने मोदी सरकार पर 'अमानत में खयानत' का आरोप लगाया है।

उनका कहना है कि अच्छे दिन का सपना दिखा कर नई सरकार ने रेलवे के किराये और माल-भाड़े में बढ़ोतरी कर दी है।

पीआईएल दाखिल करने वाले वकील होलमाघी ने बुधवार को बंबई हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अभय ओका और ए चंदूरकर की खंडपीठ के सामने पेश अपनी याचिका में इन बातों का उल्लेख किया है।

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'अच्छे दिन...' पर घिरी सरकार

PIL against PM Modi and Bjp asks about ache din

बेंच ने शिकायतकर्ता वकील से कहा कि मंगलवार को ही रेलवे किराये में बढ़ोतरी के मुद्दे पर पहले से दायर एक पीआईएल को अस्वीकार किया जा चुका है।

हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में नई सरकार के किए कार्यों का रिकॉर्ड मांगने की अपील की गई है। साथ ही ये भी कहा गया है कि अगर सरकार अपने किए वादे पूरे करने की स्थिति में नहीं है तो उसे इस्तीफा दे देना चाहिए।

याचिकाकर्ता के मुताबिक, "बीजेपी के वादे के अनुरूप ही अच्छे दिन के लिए देश की जनता ने वर्तमान सरकार को भारी बहुमत दिया।"

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मोदी सरकार के एक महीने पूरे

PIL against PM Modi and Bjp asks about ache din

लेकिन पिछले एक महीने के बीजेपी सरकार के कार्यकाल को लेकर होलमाघी ने कहा, "नई सरकार में जिस तरह रेल किराये बढ़ाए गए, दूसरी वस्तुओं की कीमतों में इजाफा किया गया, उससे साफ है कि नई सरकार भी यूपीए सरकार की तरह ही कार्य कर रही है। उसने आम जनता से किए वादे तोड़ने का काम किया है।"

इस पीआईएल में प्रधानमंत्री, उनकी कैबिनेट और बीजेपी पार्टी का नाम शामिल है।

याचिकाकर्ता ने सीधे तौर पर मोदी सरकार को उनके किए वादे को लेकर ही घेरने की कोशिश की है। अब मामला कोर्ट में है देखना होगा अदालत का इस मुद्दे पर क्या रुख होगा।

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