'तालिबान फंड' पर आजम के खिलाफ मामला पहुंचा कोर्ट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कानपुर बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री अनूप कुमार द्विवेदी ने नगर विकास मंत्री आजम खान के खिलाफ एसीएमएम 7 गगन भारती की कोर्ट में परिवाद दर्ज कराया है। इसमें कहा है नगर विकास मंत्री ने कहा था कि सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के जन्मोत्सव में खर्च पैसा तालिबानियों, दाऊद इब्राहिम और अबू सलेम ने दिया है। राष्ट्रद्रोहियों से फंडिंग कराकर भारत की सरजमीं पर आयोजन करना राष्ट्रद्रोह है। इसलिए नगर विकास मंत्री को उचित धाराओं में तलब कर कठोर सजा दी जाए। कोर्ट ने वादी और गवाहों के बयान दर्ज कराने के लिए नौ दिसंबर की तारीख लगाई है।
परिवाद दर्ज कराने वाली अर्जी में कहा गया है कि अखबारों में खबर थी कि 21 नवंबर को रामपुर में सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के जन्मदिन उत्सव पर काफी पैसा खर्च हुआ है। पत्रकारों ने जब खर्च के बारे में पूछा तो आजम खान ने कहा था कि इस आयोजन के लिए फंडिंग तालिबानियों से कराई है। कुछ पैसा दाऊद इब्राहिम और कुछ फंड अबू सलेम ने भी दिया है।
बकौल अनूप कुमार द्विवेदी वह कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराने गए तो पुलिस ने इनकार कर दिया। इसलिए नगर विकास मंत्री को उचित धाराओं में तलब कर कठोर सजा दी जाए। परिवाद में एडवोकेट रवि पांडेय, प्रबल सिंह, सिद्धार्थ मिश्र और पुनीत सिंह को गवाह बनाया गया है।
इन धाराओं में परिवाद
धारा 121- भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध करना या युद्ध करने का प्रयास करना या युद्ध करने का दुष्प्रेरण करना। सजा-मृत्यु या आजीवन कारावास और जुर्माना
धारा 121 - ए-राज्य के विरुद्ध कतिपय अपराधों को करने के लिए षडयंत्र। सजा-आजीवन कारावास या दस वर्ष के लिए कारावास और जुर्माना
धारा 116-कारावास से दंडनीय अपराध का दुष्प्रेरण। सजा-यदि दुष्प्रेरण के परिणाम स्वरूप अपराध नहीं किया जाता है-उस दीर्घतम अवधि के एक चौथाई भाग तक का कारावास जो अपराध किया है।
धारा 153-ए-वर्गों के बीच शत्रुता का प्रयास करना। सजा तीन साल का कारावास या जुर्माना या दोनों
क्या होता है परिवाद
पुलिस द्वारा किसी मामले की रिपोर्ट दर्ज न किए जाने करने पर कोई भी व्यक्ति कोर्ट में सीधे कंपलेन केस दर्ज कर सकता है। इसे परिवाद कहते हैं। परिवाद की विवेचना नहीं होती है। कोर्ट में सीधे सबूतों और बयानों के आधार पर सुनवाई होती है। इसके बाद कोर्ट फैसला सुनाती है।