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पेशावर कांड की ऐसी सच्चाई, सुनकर रूह कांप उठेगी

Fri, 19 Dec 2014 07:39 PM IST
Updated Fri, 19 Dec 2014 07:39 PM IST
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Peshawar School Attack: Conversation between attackers and masterminds of Peshawar Attack

हमने ऑडिटोरियम में मौजूद सभी बच्चों को मार डाला है। अब हमारे लिए अगला फरमान क्या है? वहीं ठहरो, सेना के लोगों को आने दो। खुद को उड़ाने से पहले उन्हें मार डालो।

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सुरक्षा एजेंसियों के अफसरों के मुताबिक पाकिस्तान के आर्मी स्कूल पर हमला करने वाले फिदायिनों की अपने आकाओं से यह आखिरी बातचीत थी। इसके बाद बच गए दो आत्मघाती हमलावर स्कूल के बाहर तैनात स्पेशल ऑपरेशन के जवानों की ओर बढ़ गए थे।
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आतंकवादियों और उनके आकाओं के बीच इस तरह की बातचीत का खुलासा उस खुफिया डॉजियर में हुआ है, जिसे पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल राहिल शरीफ ने बुधवार को अफगानिस्तान सरकार के आला अफसरों से साझा किया था।
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स्कूल में घुसते ही फि दायिन हमलावर सीधे मुख्य ऑडिटोरियम की ओर बढ़ गए थे जहां, सीनियर सेक्शन के बच्चों को प्राथमिक उपचार के गुर सिखाए जा रहे थे। अफसरों के बीच अब इस बात पर माथापच्ची चल रही है कि क्या हमलावरों को ऑडिटोरियम में मौजूद बच्चों के जमावड़े की पहली से जानकारी थी?

क्या उन्हें कहीं से इसकी सूचना मिली थी? सैनिक अफसर इस सवाल का जवाब ढूंढ़ने में लगे हैं। अभी तक इस बारे में कोई पुख्ता सुराग उनके हाथ नहीं लगा है। खुफिया एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान के पास हमलावरों के नाम और उनकी बातचीत की ट्रांसस्क्रिप्ट है।

उनमें से एक हमलावर का नाम अबुजार था जबकि उसे निर्देश देने वाले का नाम ‘कमांडर’ उमर के तौर पर सामने आया है। उमर नारे के तौर पर जाने जाने वाले उमर अदिजई पुराना आतंकी है। उसका एक नाम उमर खलीफा भी है।

आतंकियों को बच्चों के बारे में थी पूरी जानकारी

Peshawar School Attack: Conversation between attackers and masterminds of Peshawar Attack

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि उसी ने अफगानिस्तान के नांगरहार प्रांत के नाजियान जिले से आतंकवादियों को फोन किया था। पाकिस्तानी अफसर चाहते हैं कि अफगानिस्तान सरकार इस सूचना के आधार पर कार्रवाई करे।

पाकिस्तानी अफसरों का मानना है कि स्कूल पर सात आतंकियों के एक गिरोह ने हमला किया था। पांच ने खुद को स्कूल के एडमिनिस्ट्रेशन ब्लॉक के अंदर ही उड़ा लिया था, जबकि दो ने इसके बाहर आकर खुद को उड़ाया था।

हमलावर स्कूल की बिल्डिंग में पिछली दीवार पर चढ़ कर घुसे थे। इसके लिए उन्होंने सीढ़ियों का इस्तेमाल किया था और कंटीले बाड़ को काट दिया था। क्या इस त्रासदी को टाला जा सकता था? हां, अगर प्रशासन ने स्कूल की सुरक्षा पर चिंता जताने वाले कुछ टीचरों की सुनी होती तो पाकिस्तान को इतने बड़े शोक से नहीं गुजरना पड़ता।

खुफिया एजेंसियों ने भी अगस्त में सुरक्षा को लेकर सूचनाएं दी थीं। टीचर स्कूल के पश्चिमी और उत्तरी दीवार से किसी घुसपैठ की आशंका जता चुके थे। क्या हमले में मारे जाने वालों की तादाद कुछ कम हो सकती थी? इसका जवाब ना में है क्योंकि सैनिकों के पास काफी कम समय था।

आतंकवादियों के घुसने के 10-15 मिनट के अंदर ही सैनिक स्कूल में घुसे थे और तब तक बड़ी तादाद में बच्चे और उनके टीचर मारे जा चुके थे। अब भी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि हमले में कितने आतंकवादी शामिल थे।

(इस्माइल खान पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डॉन से जुड़े पत्रकार हैं।)

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