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अब कभी चुनाव नहीं लड़ पाएंगे ओमप्रकाश चौटाला?
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Tue, 22 Jan 2013 01:03 PM IST
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चार बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रह चुके कद्दावर जाट नेता ओमप्रकाश चौटाला का राजनीतिक करियर खत्म होने के कगार पर पहुंच गया है। रोहिणी स्थित सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा जूनियर शिक्षक भर्ती घोटाले 10 साल की सजा सुनाए जाने के बाद वह अब शायद ही कभी चुनाव लड़ पाएं।
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कानूनविदों की मानें तो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के मुताबिक यदि भ्रष्टाचर निरोध कानून के तहत किसी व्यक्ति को सजा या जुर्माना होता है तो वह अगले छह साल के लिए चुनाव नहीं लड़ सकता।
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हालांकि निचली अदालत के फैसले के खिलाफ ऊपर की अदालतों में अपील की जाए तो मामले का निपटारा होने तक वह आगामी चुनाव लड़ सकता है। ऐसे में भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत 10 साल की सजा पाने के बाद अब इस बात की बहुत कम संभावना है ओमप्रकाश चौटाला चुनावी मैदान में दोबारा दिखेंगे।
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वहीं इस फैसले का हरियाणा की राजनीतिक में भी दूरगामी प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। किसी जमाने में भारत में जाट राजनीति के अगुआ रहे चौधरी देवी लाल के बेटे ओमप्रकाश चौटाला का राजनीतिक करियर खत्म होने के साथ हरियाणा से इनेलो का पत्ता भी साफ हो सकता है।
विश्लेषकों का कहना है कि प्रदेश में देवी लाल के बाद चौटाला की जैसी लोकप्रियता थी वैसी उनके बेटों अजय और अभय चौटाला की नहीं है। निश्चित रूप से इसका फायदा हजकां मुखिया कुलदीप बिष्नोई को होगा। कांग्रेस के खिलाफ प्रदेश में वे एक विपक्ष के रूप मे उभर सकेंगे।
ओम प्रकाश चौटाला 2 दिसंबर 1989 से 2 मई 1990, 12 जुलाई 1990 से 17 जुलाई 1990, 22 मार्च 1991 से 6 अप्रैल 1991 और 24 जुलाई 1999 से 4 मार्च 2005 तक हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे थे।
गौरतलब है कि ओमप्रकाश चौटाला और उनके बेटे अजय चौटाला को रोहिणी स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने जूनियर शिक्षक भर्ती घोटाले 10-10 साल की सजा सुनाई है।