मत प्रतिशत से तय होगा मोदी का कद
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पिछले चार विधानसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत अधिक रहा और भाजपा ने राज्य में सरकार बनाने में कामयाबी पाई लेकिन जब-जब मतदान प्रतिशत कम रहा तब-तब कांग्रेस की सरकार बनी है। ऐसे में भाजपा अधिक से अधिक लोगों को घरों से मतदान केंद्रों तक पहुंचाने की रणनीति में जुटी हुई है।
मौजूदा माहौल में मोदी की जीत नजर आ रही है लेकिन उनके लिए पिछली बार जितनी या उससे अधिक सीटें लाने की चुनौती बनी हुई है। अधिक सीटें उनका केंद्रीय राजनीति में कद बढ़ाएंगी। राज्य में वर्ष 1995 में सबसे अधिक 64.5 फीसदी मतदान हुआ था, उसके बाद भाजपा की पहली बार सरकार बनी थी।
वर्ष 2002 में 61.54 फीसदी मतदान होने पर 127 सीटें भाजपा ने हासिल की थी, लेकिन 2007 में इससे कम 57.63 फीसदी मतदान हुआ था और भाजपा के हाथ 117 सीटें आई थीं। वर्ष 1980 और वर्ष 1985 में औसतन मतदान 48.5 प्रतिशत रहा था, जिससे कांग्रेस को क्रमश: 141 व 149 सीटें मिली थीं। इसके बाद मतदान प्रतिशत में कुछ उछाल आया और वर्ष 1990 में 52.2 प्रतिशत मतदान के चलते भाजपा की स्थिति इस प्रदेश में थोड़ी मजबूत हुई और पार्टी के खाते में पहली बार 67 सीटें जुड़ी।