...और एक मोर ने हिला दिया पूरा प्रशासन
इंसानियत के ‘संहार’ की वारदातों से दहकते वर्तमान परिवेश में घटी यह घटना किसी नजीर से कम नहीं है। लोग आदमी की जान लेने में नहीं हिचक रहे, वहीं गांव के कुछ लोगों ने राष्ट्रीय पक्षी की जान बचाने के लिए एबुलेंस तक दौड़वा दी।
वनाधिकारी से लेकर जिलाधिकारी तक के फोन घनघना दिए। छुट्टी में सोए सरकारी तंत्र को दायित्व के लिए मजबूर कर डाला। अलीगढ़ जिला मुख्यालय से करीब आठ किमी दूर थाना क्वार्सी क्षेत्र के गांव हैवतपुर प्रथा में बुधवार की शाम को विद्युत लाइन से चिपककर मोर घायल हो गया।
ग्रामीणों का मजमा लग गया। लोगों ने अपने स्तर पर उसका उपचार किया लेकिन सांसे थमती देख अधिकतर ग्रामीणों ने प्रयास छोड़ दिया। वह वन विभाग को सूचना देने तक ही सीमित रहे।
और इस तरह बच गई मोर की जान
ऐसे में विकास शर्मा, सौरभ उपाध्याय और आलोक ने राष्ट्रीय पक्षी को बचाने के लिए एंबुलेंस के लिए 108 नंबर पर फोन कर दिया। पक्षी के नाम पर एंबुलेंस शायद नहीं आए इसलिए उन्होंने संदेश में बस इतना ही कहा कि एंबुलेस नहीं आई तो एक जान चली जाएगी।
गांव पहुंचे एंबुलेंस चालक ने मरीज के रूप में मोर देखा तो वह भड़क गया, लेकिन ग्रामीणों ने उसे मना लिया। पहली सूचना पर वन विभाग की टीम सक्रिय नहीं हुई तो विकास ने डीएम के यहां फोन कर दिया। ग्रामीणों के प्रयास के चलते डीएम कार्यालय को मामले में दखल देना पड़ा।
वन विभाग की टीम सक्रिय हो गई। क्वार्सी फार्म स्थित पशु अस्पताल पर करीब सात बजे डॉक्टर बुलवाया गया। डॉ. भरत ने मोर का उपचार की उसकी जान बचा ली। इसके बाद मोर को वन कर्मी को देखरेख के लिए सौंप दिया गया।