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गांधी के गांव को नरेंद्र मोदी से क्या हैं उम्मीदें?

Mon, 05 May 2014 04:00 PM IST
Updated Mon, 05 May 2014 04:00 PM IST
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people of karari village have the hope of humanity from modi

गुजरात के नवसारी को दांडी से जो़ड़ने वाली सड़क अब राष्ट्रीय राजमार्ग 228 कही जाती है। इस सुंदर और शांत राष्ट्रीय राजमार्ग से निकली एक पतली सड़क कराड़ी गाँव तक पहुँचती है। गाँव शुरू होने से पहले ही बड़े-बड़े मकान शुरू हो जाते हैं।

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पहली नज़र में ही कराड़ी गाँव किसी विकसित गाँव की परिकल्पना का साक्षात रूप लगता है। सुंदर सड़कों के किनारे बने बड़े-बड़े बंगलेनुमा मकान ठहरकर दोबारा देखने को मजबूर करते हैं।
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स्कूल की ओर से आ रही सड़क पर यूनिफ़ॉर्म पहने बच्चों का समूह इठलाता हुआ आ रहा है। थोड़ा और आगे बढ़ने पर एक बड़ा पक्का तालाब है। तालाब के किनारे ही गाँधी स्मृति मंदिर है। यहीं एक आम के पेड़ के नीचे वह कुटिया अब भी मौजूद है जहाँ दांडी में नमक क़ानून तोड़ने के बाद महात्मा गाँधी 20 दिन से ज़्यादा रहे थे। महात्मा गाँधी ने कराड़ी गाँव को अपना स्थायी पता भी कहा था।

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इस गांव का विदेशों में डंका

people of karari village have the hope of humanity from modi

कराड़ी के सरपंच प्रकाश पटेल के मुताबिक गाँव की आबादी क़रीब तेरह सौ है। गाँव के 75 प्रतिशत लोग एनआरआई हैं जो यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, अमरीका और अफ़्रीका के देशों में रहते हैं। बड़े-बड़े मकान इन्हीं एनआरआई लोगों के हैं। जो एक-दो साल में दो-तीन महीनों के लिए गाँव में आकर रहते हैं।

गाँव में बिजली 24 घंटे रहती है। यहाँ की दुकानों पर बोतलबंद पानी बिकता है। सड़कें पक्की हैं। गाँव में पानी की टंकी है जिससे घरों में सप्लाई का पानी आता है।

प्रकाश पटेल के मुताबिक गाँव में बिजली, पानी और सड़क सरकार की है, बाकी सब गाँव का अपना है। यहाँ हर घर में पक्का शौचालय भी बना हुआ है।

गाँव में गाँधी जी के सिद्धांतों पर चलने वाला एक बड़ा स्कूल है जिसमें अंग्रेज़ी और गुजराती माध्यम में पढ़ाई होती है। सरपंच प्रकाश पटेल के मुताबिक स्कूल करीब तीन करोड़ की लागत से बना है। स्कूल के लिए सारा पैसा एनआरआई लोगों ने ही भेजा था।

'गांधीजी से पहले कराड़ी के लोग अफ्रीका गए थे'

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80 वर्षीय मगन भाई को कराड़ी के लोग अपने गाँव का इतिहासकार बताते हैं। मगन भाई के मुताबिक कराड़ी के लोग ब्रिटिश राज से पहले ही इंजन के बिना चलने वाली नौकाएं बनाते थे। महात्मा गाँधी 1893 में अफ़्रीका गए थे लेकिन कराड़ी गाँव के कुछ लोग 1875 में ही अफ़्रीका गए थे।

मगन भाई के मुताबिक इस क्षेत्र का सबसे पहला स्कूल राष्ट्रीय शाला के नाम से 1920 के दशक में कराड़ी गाँव में खुला था। सरदार वल्लभ भाई पटेल आजीवन इस स्कूल के अध्यक्ष रहे। यहाँ के लोग पहले से ही व्यापारिक प्रवृत्ति के थे, शिक्षा ने उनके लिए नए रास्ते खोले जो उन्हें दुनिया भर में ले गए।

सरपंच प्रकाश पटेल और मगन भाई कराड़ी की खुशहाली का श्रेय यहाँ के लोगों को ही देते हैं। गाँव के एनआईआरआई लोगों के पैसे से कुछ साल पहले जब राष्ट्रीय शाला का विस्तार हुआ तो गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसका उद्घाटन किया।

चुनावी मौसम में भारत के गाँवों में अगली क़तार के इस गाँव में नरेंद्र मोदी को लेकर उत्साह है। गुजरात के अन्य गाँवों की तरह। विकास सभी रूपों में यहाँ पहले ही पहुँच गया है इसलिए यहाँ के लोगों के पास कोई चुनावी मुद्दा नहीं है।

गांव को मोदी से उम्मीदें

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गाँव के लोग भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के रूप में एक गुजराती को सात रेस कोर्स की दौड़ में देखकर उत्साहित हैं। यहाँ जितने भी लोगों से मैंने बात की उन सबने यही कहा कि एक गुजराती अगर प्रधानमंत्री बनता है तो इससे अच्छा क्या हो सकता है।

मगन भाई कहते हैं कि नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व में पिछले कुछ सालों में बहुत बदलाव हआ है। संभवतः वे महात्मा गाँधी के मानवता के सिद्धांत की ओर लौटेंगे और देश का भला करेंगे।

मगन कहते हैं, "सबको साथ लेकर चलने का मानवतावादी रास्ता ही सबसे सही रास्ता है। मोदी अगर प्रधानमंत्री बनते हैं तो उन्हें इस रास्ते पर चलना ही होगा।"

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